Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 14:1 2 शमूएल 14:2 2 शमूएल 14:3 2 शमूएल 14:4 2 शमूएल 14:5 2 शमूएल 14:6 2 शमूएल 14:7 2 शमूएल 14:8 2 शमूएल 14:9 2 शमूएल 14:10 2 शमूएल 14:11 2 शमूएल 14:12 2 शमूएल 14:13 2 शमूएल 14:14 2 शमूएल 14:15 2 शमूएल 14:16 2 शमूएल 14:17 2 शमूएल 14:18 2 शमूएल 14:19 2 शमूएल 14:20 2 शमूएल 14:21 2 शमूएल 14:22 2 शमूएल 14:23 2 शमूएल 14:24 2 शमूएल 14:25 2 शमूएल 14:26 2 शमूएल 14:27 2 शमूएल 14:28 2 शमूएल 14:29 2 शमूएल 14:30 2 शमूएल 14:31 2 शमूएल 14:32 2 शमूएल 14:33



सारांश-परिचय
2 शमूएल 14:14 में शिला की बुद्धिमत्ता और धर्मी युक्ति का संदर्भ है। यह वचन बुनियादी मानव-भंगुरता तथा परमेश्वर की दया और जीवन-परिवर्तनकारी सामर्थ्य पर प्रकाश डालता है। वचन यह स्वीकार करता है कि मनुष्य का जीवन धरती पर क्षणिक है, परन्तु परमेश्वर के हाथ में मृत्यु की शक्ति भी सीमित हो सकती है—वह मारे नहीं, बल्कि ऐसा रास्ता निकालता है जिससे जीने और लौटने की संभावना बनती है।
अध्याय के संदर्भ में यह पद
यह शिला के उस विचार का हिस्सा है जो वह राजा शाऊल की पुत्री अबिशग की कथा के बीच अलग कर के कहती है, ताकि दबे हुए परिवार के लिये मार्ग निकले। अध्याय में शिला दया, न्याय और सामुदायिक-बचाव का विकल्प खोज रही है। 14:14 का वचन सामान्य मानव दशा की कटुता बताता है एवं बताता है कि परमेश्वर के पास विनाश के इरादे से भी बढ़कर, उद्धार और सम्यक् निर्णय का मार्ग है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य भौतिक रूप से नश्वर है—"मरना ही है" और "भूमि पर गिरे हुए जल के समान" अस्थिर है। फिर भी परमेश्वर का स्वरूप केवल नाश नहीं है; वह जीवन और सम्भावनाओं का स्रोत है। यहाँ पर आध्यात्मिक आशय यह है कि पराधीनता, दोष या सामाजिक मृतप्रायावस्था के बीच भी परमेश्वर नई आशा और पुनर्संबन्ध की व्यवस्था कर सकता है। यह विश्वास और दया पर उभरता है—न्यायपूर्ण ओर बुद्धिमत्ता से समस्या का समाधान संभव है।
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व्यावहारिक प्रवर्तन (Application)
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परंपरागत टिप्पणीकारों के कुछ संक्षिप्त अंश
मैथ्यू हेन्री की शैली में विचार करते हुए यह कहा जा सकता है कि परमेश्वर अक्सर मानव युक्ति को सहारा देकर जीवन की रक्षा करता है। अल्बर्ट बार्न्स ने भी इस तरह की पंक्तियों में परमेश्वर की करुणा और न्याय दोनों पर बल दिया। (यहाँ किसी एक वाक्य का सटीक उद्धरण उपलब्ध नहीं है; केवल विचारों का संश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।)
संक्षेप
2 शमूएल 14:14 हमें सिखाता है कि मानवीय जीवन भंगुर है पर परमेश्वर का उद्देश्य केवल नाश नहीं है — वह ऐसे उपाय करता है जो जीवन और सम्बन्धों को बहाल कर सकें। व्यक्तिगत और सामाजिक संघर्षों में हमें विनम्रता, न्याय और दया के साथ मध्यस्थता करनी चाहिए, और परमेश्वर की करुणा पर आशा रखनी चाहिए।