Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 1:1 2 तीमुथियुस 1:2 2 तीमुथियुस 1:3 2 तीमुथियुस 1:4 2 तीमुथियुस 1:5 2 तीमुथियुस 1:6 2 तीमुथियुस 1:7 2 तीमुथियुस 1:8 2 तीमुथियुस 1:9 2 तीमुथियुस 1:10 2 तीमुथियुस 1:11 2 तीमुथियुस 1:12 2 तीमुथियुस 1:13 2 तीमुथियुस 1:14 2 तीमुथियुस 1:15 2 तीमुथियुस 1:16 2 तीमुथियुस 1:17 2 तीमुथियुस 1:18



2 तीमुथियुस 1:16 — संदर्भित दया और प्रायः स्मरण
पद यह बताता है कि कैसे प्रभु यीशु के विश्वासयोग्य लोग किसी-किसी समय एक-दूसरे के जीवन में विशिष्ट धृष्टताओं के बावजूद भी साथ रहते हैं। यहाँ उनेसिफुरूस के घराने का उल्लेख एक वास्तविक पुनर्मिलन की आशा को दर्शाता है—यही मांग है कि प्रभु दया करे, ताकि विपत्ति के समय भी भाईचारे की गर्मी बनी रहे और हमारी पहचानी दया एक दूसरे के लिए साक्ष्य बने।
मुख्य विचार
यह वाक्य प्रभु के उद्देश्य को उजागर करता है: जब एक विश्वासी दूसरे को ठंडा कर देता है या जंजीरों के कारण बंदी होते हैं, तब भी प्रभु का समर्पित करुणा और स्मरण उनकी सहायता में काम आता है। पवित्र आत्मा प्रेरित करूँ है कि दया और स्मरण, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, चिरस्थायी हों।
मुख्य विषय
दो-तीन संबंधित पवित्र ग्रंथ (संक्षेप में, बिना पूर्ण पाठ)
संदर्भ-आर्किटेक्चर में नीचे दिये गए अंशों से प्रेरणा मिलती है:
व्यावहारिक विचार
यदि आप किसी साथी विश्वास को कठिन समय में देखते हैं, तो साधारण साहचर्य, प्रार्थना और सहायता की पेशकश उसे ठंडी पड़ने से बचा सकती है। यह verse एक प्रेरणा है कि हम अपने दायित्व को निभाते रहें—न केवल अपने सुख-चैन के लिए, बल्कि परमेश्वर के नाम के लिए भी एकजुट रहें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 तीमुथियुस 1:16 में देखा गया संकेत है कि दया और स्मरण दोनो मिलकर विश्वास समुदाय को मजबूती देते हैं। विपत्ति के बीच भी प्रभु की करुणा सक्रिय रहती है, और यह भाईचारे की आधारशिला बनती है। सदैव एक-दूसरे के लिए प्रार्थना और सहायता का हाथ बढ़ना चर्च के विश्वसनीय संकेत हैं।
ध्यान दें — पूर्वज संदर्श
यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन व्याख्यात्मक परिशीलनों के संयुक्त प्रेरणा से विकसित एक समेकित प्रस्तुति है, जिनमें दया, स्मरण और विश्वासियों के बीच गरिमा को नीचे रखा गया है।
उद्धृत विचार (संक्षेप):
Matthew Henry: “The remembrance of his name, and the mercy which is in the heart, are the best consolations in trouble.”
Albert Barnes: “Prayers and mercies are the Christian’s daily sustenance, especially when brethren are in bonds or trials.”
Adam Clarke: “Mercy desired in such times is not a mere feeling, but a practical, sustaining kindness towards the afflicted.”