Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 1:1 2 तीमुथियुस 1:2 2 तीमुथियुस 1:3 2 तीमुथियुस 1:4 2 तीमुथियुस 1:5 2 तीमुथियुस 1:6 2 तीमुथियुस 1:7 2 तीमुथियुस 1:8 2 तीमुथियुस 1:9 2 तीमुथियुस 1:10 2 तीमुथियुस 1:11 2 तीमुथियुस 1:12 2 तीमुथियुस 1:13 2 तीमुथियुस 1:14 2 तीमुथियुस 1:15 2 तीमुथियुस 1:16 2 तीमुथियुस 1:17 2 तीमुथियुस 1:18

सीधे अर्थ का सार
2 तीमुथियुस 1:17 में कहा गया है कि पॉल ने रोम में आते समय प्रत्यक्ष प्रयास करके पिता के समान प्रेम दिखाने वाले वेद-रिसा से भेंट की — अर्थात वह ईश्वर के साथ निर्भीक भुवन-यात्रा में निष्ठावान साथी खोजने के लिए प्रबल इच्छा और प्रयत्न के साथ आगे बढ़े। यह वाक्य द्योतक है कि प्रेरित पॉल के लिए मित्रता, सेवक-परिस्थितियों में भी ईश्वर की योजना के अनुसार, एक संवेदनशील और सक्रिय खोज था, न कि निष्क्रिय प्रतीक्षा.
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पत्र-प्रेषित पॉल रोम स्थितियों में सेवक-समय के भीतर भी अपने मिशन को पूर्ण बना रहे थे। इस वाक्य में यह संकेत है कि वे अपने सहयोगियों, साथियों और प्रेमपूर्ण साथियों को खोज निकालते थे जो संकट-समय में भी उनके साथ दृढ़ता से खड़े रहते। यह पढ़ना उनके व्यक्तिगत अनुभवों के कारण है—कैसे वे अन्य विश्वासियों के बीच सक्रियता और सहभागिता से काम लेते थे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
2-3 विद्वान टिप्पणी (संश्लेषित सार)
Matthew Henry (संक्षिप्त): वे दिखाते हैं कि ईश्वर के लड़ाकों के बीच निकटता और मिलन-स्पर्श से प्रेरणा मिलती है—कहि गई बातों में निष्ठा और प्रेम का प्रकाश दृढ़ होता है।
Albert Barnes (संक्षिप्त): रोम में पॉल का यह कदम यह सिद्ध करता है कि सुसमाचार की सेवा के लिए मित्रों की निर्भरता अनिवार्य है; साथी मिलना आत्मिक उन्नति का भाग है।
Adam Clarke (संक्षिप्त): यह दृश्य विश्वास-समुदाय की प्रबलता को दर्शाता है—जहाँ एक सच्चे सेवक के लिए प्रयत्नशील होना परम उद्देश्य का भाग है।
प्रमुख विचार (संक्षिप्त थीमिक सूची)
अन्य सम्बद्ध आयतें
1) प्रेरितों के साथ मित्रता—याकूब 5:16 के समान आत्मीयता और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना; यह दर्शाता है कि एकजुटता से कठिनाइयाँ हल होती हैं।
2) सहयोग की महिमा—1 कुरिन्थियों 12:12-27 में शरीर के अंगों की समन्वयता जैसी विस्तृत तस्वीर मिलती है कि हर एक सदस्य के बिना पूर्णता नहीं होती।
3) दयालु लाभ—इब्रानियों 10:24-25 समुदायिक उत्साह और प्रेरणा के लिए साथ चलने का आह्वान है।
संकेतित व्यावहारिक निष्कर्ष
ईश्वर की सेवा में निष्ठावान साथी ढूंढ़ना और उन्हें सुदृढ़ करना, हर कठिनाई का सामना करने में सहायता बनता है। आप भी अपने चर्च-समुदाय में उन लोगों के साथ समय बिताएँ जो विश्वास के पथ पर आज भी सक्रिय हैं, ताकि उनका साथ आपकी और दूसरों की सेवा को दृढ़ बना सके।