Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 11:1 प्रेरितों के काम 11:2 प्रेरितों के काम 11:3 प्रेरितों के काम 11:4 प्रेरितों के काम 11:5 प्रेरितों के काम 11:6 प्रेरितों के काम 11:7 प्रेरितों के काम 11:8 प्रेरितों के काम 11:9 प्रेरितों के काम 11:10 प्रेरितों के काम 11:11 प्रेरितों के काम 11:12 प्रेरितों के काम 11:13 प्रेरितों के काम 11:14 प्रेरितों के काम 11:15 प्रेरितों के काम 11:16 प्रेरितों के काम 11:17 प्रेरितों के काम 11:18 प्रेरितों के काम 11:19 प्रेरितों के काम 11:20 प्रेरितों के काम 11:21 प्रेरितों के काम 11:22 प्रेरितों के काम 11:23 प्रेरितों के काम 11:24 प्रेरितों के काम 11:25 प्रेरितों के काम 11:26 प्रेरितों के काम 11:27 प्रेरितों के काम 11:28 प्रेरितों के काम 11:29 प्रेरितों के काम 11:30



प्रेरितों के काम 11:25 का समाधानात्मक अर्थ
इस वचन का सरल अर्थ है: शाऊल (पश्चिमी नाम से पॉल) तरसुस को खोजने के लिए रवाना हुआ ताकि उसकी अगुवाई में नए विश्वासियों तक पहुँच सके और उनकी शिक्षा-प्रचार का मार्ग सुरक्षित कर सके।
परिप्रेक्ष्य-परिचय
कार्य 11 अध्याय में प्रेरितों ने एंटियोख में दिए गये भगव्याकरण के अनुसार ईशशास्त्र का प्रसार किया। आरोपण के बाद पतरस ने यह अनुभव किया कि ईसू के संदेश का दायरा जातीय सीमाओं से ऊपर उठ रहा है, और अब गैर-यहोदियों पर भी उद्धार के अधिकार खुले हैं। इस संदर्भ में शाऊल/पौलियुक को तरसुस जाने की सलाह मिली ताकि वह वहाँ के नए प्रतिनिधियों के बीच जाकर प्रचार कर सके और समुदाय की संस्थाओं को संगठित कर सके.
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीमैटिक सूची
संबद्ध पवित्र ग्रंथ (क्रॉस-रेफरंसेस)
यद्यपि पूर्ण पद नहीं दिया गया, परन्तु इन क्रॉस-रेफरंसेस से संकेत मिलता है कि: तरसुस-यात्रा समुदाय के उद्धार-योजनाओं का हिस्सा है; पॉल का उद्धार और प्रचार-कार्य विश्वव्यापी मिशन का अंग बनता है; और यह दिखाता है कि ईश्वर की योजना में विविधता और एकता दोनों का योग है।
संक्षेपित निष्कर्ष और व्यवहारिक takeaway
इस पाठ से यह स्पष्ट है कि प्रेरितों के कार्यों में साहस, धैर्य और स्पष्ट ईश्वरीय निर्देशन आवश्यक है। शाऊल की खोज-यात्रा उदाहरण है कि परमेश्वर कितनी बार भिन्न-भिन्न लोगों और पृष्ठभूमियों को एक साथ लाकर एक नया मिशन बना देता है। हमारे जीवन में भी—यदि ईश्वर our मार्गदर्शन दें—तो हम नए अवसरों को अपनाकर अपने समाज में प्रेम, गिरह-खोलने और उद्धार का संदेश फैलाने में समर्थ हो सकते हैं।
इन्ही विचारों में निम्न उद्धृत टिप्पणीकारों के पंक्ति-खंड मिलते हैं:
मैथ्यू हेनरी से एक सार-रेखा: “क्रिया-योजना में परमेश्वर की योजना को प्रधानता दें, और प्रेरितों का मार्गदर्शन उसी के अनुसार बने।”
एल्बर्ट बार्न्स से एक छोटा बिंदु: “विश्व के सभी हिस्सों में उद्धार का संदेश फैलना प्रारम्भिक चर्च की आत्मा-चालना थी।”
एडम क्लार्क से एक उल्लेखनीय विचार: “कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर का चयन और मार्गदर्शन विशेषज्ञ-कार्य को संभव बनाता है।”
नोट: ऊपर प्रत्येक कथन में जहां-जहां स्पष्ट उद्धरण मिलते हैं, उन्हें उपलब्ध रूप से संक्षेपित किया गया है।