Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 3:1 प्रेरितों के काम 3:2 प्रेरितों के काम 3:3 प्रेरितों के काम 3:4 प्रेरितों के काम 3:5 प्रेरितों के काम 3:6 प्रेरितों के काम 3:7 प्रेरितों के काम 3:8 प्रेरितों के काम 3:9 प्रेरितों के काम 3:10 प्रेरितों के काम 3:11 प्रेरितों के काम 3:12 प्रेरितों के काम 3:13 प्रेरितों के काम 3:14 प्रेरितों के काम 3:15 प्रेरितों के काम 3:16 प्रेरितों के काम 3:17 प्रेरितों के काम 3:18 प्रेरितों के काम 3:19 प्रेरितों के काम 3:20 प्रेरितों के काम 3:21 प्रेरितों के काम 3:22 प्रेरितों के काम 3:23 प्रेरितों के काम 3:24 प्रेरितों के काम 3:25 प्रेरितों के काम 3:26



हलके शब्द में अर्थ
प्रेरितों के काम 3:23 में यह चेतावनी दी गई है कि जो भी भविष्यद्वक्ता की बातों को नहीं सुनेगा, वह नष्ट किया जाएगा। यह कथन उस समय के नियम और नैतिक_initialize अनुभव से जुड़ा है कि परमेश्वर के निर्देश का पालन करना अनिवार्य है, ताकि समाज में न्याय और पवित्रता बनी रहे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सूक्ति प्रेरितों के काम में लौटती है जब पवित्रात्मा बपतिस्मा के साथ पहले समुदाय को निर्देश दे रहा था और भविष्यद्वक्ताओं के संदेशों के महत्व को स्पष्ट किया जा रहा है। लैव्यवस्था 23:29 और व्यवस्थाओं के अन्य हिस्सों के संदर्भ में यह नियम यह दर्शाता है कि असत्य या अविश्वास के कारण औचित्य-हीन उल्लंघन निष्ठा और पवित्र समुदाय के लिए खतरा बन सकता है। यहाँ “भविष्यद्वक्ता” से तात्पर्य ऐसे प्रेरक-वार्ता से है जो परमेश्वर के निर्देशों को सत्यापित करते हैं, न कि मानव-स्वल्प भावनाओं से प्रेरित विचार।
प्रमुख विश्लेषण
संबद्ध पद
यहाँ से जुड़ी कुछ सन्दर्भ कथन हैं, जो पाठ के समग्र नैतिक ताने-बाने को स्पष्ट करते हैं:
मुद्देगत जानकारी: 2 प्रमुख टिप्पणी-आइकन
Matthew Henry (संक्षेप): भविष्यद्वक्ताओं के संदेशों के प्रति अविश्वास का नाशकारी परिणाम है; परमेश्वर के नियम को मानना परम जयता है।
Albert Barnes (संक्षेप): संदेशों की अवहेलना से समुदाय में असत्य और अन्याय पनपते हैं; सतर्क रहना चाहिए कि मनुष्य के विचार नहीं, परमेश्वर के वचन मान्य हों।
Adam Clarke (संक्षेप): यह वाक्य समाज में दंड के नियम को रेखांकित करता है ताकि पवित्रता और धर्म-बोध बनी रहे।
कई क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके प्रभाव
1) प्रेरितों के काम 4:12: कोई दूसरा नाम नहीं जिसके द्वारा उद्धार हो; संदेशों की सच्चाई का पालन अनिवार्य है।
2) प्रेरितों के रूप 5:29: परमेश्वर के आदेशों के विरुद्ध मनुष्यों के नियमों को नहीं मानना; प्रभु की आज्ञा को प्राथमिकता देना चाहिए।
3) नीतिवाचन 12:28: धर्म-सत्य के मार्ग पर चलना समाज को स्थिरता और आशीष देता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद शिक्षा देता है कि परमेश्वर के संदेशों को सुनना और मानना एक साथ चलता है। यदि हम भविष्यद्वक्ताओं के वचनों को अनसुना करते हैं, तो सामाजिक-नैतिक ढांचे में अवनति आ सकती है। मानना और पालन करना ईमानदार विश्वास की निशानी है।