Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 4:1 प्रेरितों के काम 4:2 प्रेरितों के काम 4:3 प्रेरितों के काम 4:4 प्रेरितों के काम 4:5 प्रेरितों के काम 4:6 प्रेरितों के काम 4:7 प्रेरितों के काम 4:8 प्रेरितों के काम 4:9 प्रेरितों के काम 4:10 प्रेरितों के काम 4:11 प्रेरितों के काम 4:12 प्रेरितों के काम 4:13 प्रेरितों के काम 4:14 प्रेरितों के काम 4:15 प्रेरितों के काम 4:16 प्रेरितों के काम 4:17 प्रेरितों के काम 4:18 प्रेरितों के काम 4:19 प्रेरितों के काम 4:20 प्रेरितों के काम 4:21 प्रेरितों के काम 4:22 प्रेरितों के काम 4:23 प्रेरितों के काम 4:24 प्रेरितों के काम 4:25 प्रेरितों के काम 4:26 प्रेरितों के काम 4:27 प्रेरितों के काम 4:28 प्रेरितों के काम 4:29 प्रेरितों के काम 4:30 प्रेरितों के काम 4:31 प्रेरितों के काम 4:32 प्रेरितों के काम 4:33 प्रेरितों के काम 4:34 प्रेरितों के काम 4:35 प्रेरितों के काम 4:36 प्रेरितों के काम 4:37



प्रेरितों के काम 4:3 — संदर्भ और अर्थ
यह पाठ प्रेषितों के जीवन में संघार्ष की भयावहता और विश्वासी समुदाय की धैर्य को दर्शाता है। प्रेरितों के काम 4 चैप्टर में इस्तब्द करने के बाद शास्त्रों के विश्वासी समाज को सन्नद्ध किया गया, ताकि वे भगवान की शिक्षा और प्रचार में दृढ़ रहें। संध्या के समय उनके गिरफ्तार होने का उल्लेख यह संकेत देता है कि धार्मिक प्रकाश के साथ विरोध भी घेर लेता है, पर दुष्ट बलों के बावजूद प्रभु के संदेश का प्रभाव बढ़ रहा था।
मुख्य 의미
यह verses दिखाते हैं कि पवित्र आत्मा की प्रेरणा से साझा किया गया सुसमाचार समाज के भीतर और बाहर कितनी प्रतिरोधों का सामना करता है। गिरफ्तारी एक कठोर परीक्षण है, पर यह भी संकेत देता है कि विश्वास की सच्ची शक्ति 기다 is not हिंसा, बल्कि धैर्य, प्रार्थना और प्रभु की योजना पर अडिग विश्वास है।
दो–तीन प्रमुख विषय
संदर्भित अन्य पाठ
यह घटना पवित्र तक से जुड़ी अन्य घटनाओं के साथ संगति स्थापित करती है:
छोटे व्यावहारिक विचार
समापन सार
4:3 में गिरफ्तारी के क्षण एक चेतावनी नहीं, बल्कि यह पुष्टि है कि ईश्वर के काम का प्रचार कभी रुकता नहीं— भले ही परिस्थितियाँ सख्त क्यों न हों। पवित्र आत्मा से प्रेरित प्रेरक और उनके साथ का समुदाय सत्ता-प्रतिष्ठा के सामने भी अपनी आस्था और उद्देश्य पर अडिग रहते हैं। यह पाठ आज भी सिखाता है कि मैदान में हो या जेलखाने में, ईश्वर के काम के लिए दिल साफ और prayed-up मन ही सबसे बड़ी विजय है।
उद्धरण और संपृक्ति टिप्पणी
यहाँ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke द्वारा प्रचलित निष्कर्षों की मौलिक धाराओं से प्रेरणा ली गई है लेकिन सीधे उद्धरण संक्षेप में दिए गए हैं ताकि पाठ सरल और सुसंगत रहे।
उद्धरण-उद्धृत भाग: "The Apostles endured temptation and opposition with steadfastness" (संकेतात्मक सार)
Cross-references (संक्षेप में स्पष्टक संबंध)
1) प्रेरितों के काम 5:19–20 — प्रभु के संदेश को बचाने के लिए देवदूत द्वारा मुक्त कराये जाना; यह दर्शाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर का संरक्षण है।
2) यशायाह 43:2 — आग, जल से होकर भी ईश्वर सुरक्षा देता है; कठिन परीक्षण के बीच विश्वास को पुरस्कार मिलता है।
3) 1 पतरस 4:12–13 — कष्टों में भी ईश्वर के साथ खुशी और आशा बनाए रखने की शिक्षा।
यह लेख एक संतुलित, कलात्मक दृष्टिकोण के साथ लिखा गया है ताकि हिंदी पाठक आसानी से संदर्भ, संदेश और व्यवहारिक अनुप्रयोग समझ सकें.