Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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दानिय्येल 7:27 पर दृष्टि: परमेश्वर के राज्य की महिमा
यह वचन दानिय्येल की एक स्वप्न-परिभाषा के भाग के रूप में आता है, जहाँ स्वर्गीय सिंहासन और अत्याचारपूर्ण शक्तियों के विरुद्ध परमेश्वर का अंततः प्रतिष्ठित राज्य स्पष्ट किया गया है. यहाँ “राज्य और प्रभुता” का अर्थ केवल earthly kingdoms नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनंत शासन की प्राप्ति है, जिसमें उसके पवित्र लोग शामिल होते हैं। इस वाक्य के पीछे की लोक-आस्था बताती है कि पृथ्वी पर हर सत्ता का स्थायित्व उसे ही मान्यता देता है, और अन्त में उसका राज्य तसलुम, न्याय और पवित्रता से परिपूर्ण होगा।
पाठ की संदर्भ-चर्चा (दानिय्येल 7:27 के साथ)
मूल स्वप्न में चार महान जीव उभरते हैं और दानिय्येल को पता चलता है कि परमेश्वर के राज्य के सामने सारी सत्ता की प्रत्यक्ष गवाही होगी. उस समय यह स्पष्ट होता है कि राज्य केवल earthly kingdoms तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सार्वभौमिक, शाश्वत शासन है जिसमें परमप्रधान की प्रजा—पवित्र लोग—उसके समान अधिकार और सुरक्षा प्राप्त करेंगे. प्रजा की सुरक्षा और उसकी आज्ञापालन इस भविष्यवाणी के केंद्र में है.
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
चर्चनात्मक अनुपूरक: अन्य बाइबल संदर्भ
• प्रकाशन 11:15 का उल्लेख यहाँ “उसका राज्य सदा का राज्य है” शब्द-चित्र की पुष्टि करता है कि परमेश्वर का राज éternally स्थापित है।
• यशायाह 9:7, रोम 8:17-18 भी इस अनंत शासन की महिमा और दास-पर-नियन्त्रम की प्रेरणा देते हैं कि दुख के पीछे भी ईश्वर की महिमा छिपी है।
• मत्ती 25:34-40 में एक सक्रिय दायित्व मिलता है कि पवित्र लोगों के व्यवहार से राज्य का वास्तविक प्रभाव प्रकट होता है—करुणा, न्याय, और सेवाभाव.
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
दानिय्येल 7:27 में परमेश्वर के सार्वभौमिक और शाश्वत राज्य की घोषणा हमारे लिए एक उत्साह और जिम्मेदारी दोनों रखती है: आशा दें कि सत्ता के अंत में परमेश्वर का शासन ही कटे-कटे भविष्य का निर्धारण करेगा, और हमारे जीवन का उद्देश्य उसी राज्य के अनुरूप चलना है—पवित्र लोगों की सुरक्षा, सेवा, और सत्य की पुष्टि के साथ।
लेखकों के संकेतित उद्धरण
एमैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के कुछ विचार उद्धृत रूप में उपयोग किये गये हैं; नीचे उनके संक्षिप्त संकेत उपलब्ध हैं:
• “राज्य हमेशा परमेश्वर का ही है” (हेनरी से प्रेरित सामान्य स्वर)
• “पवित्र लोगों की पवित्रता ही राज्य की सुरक्षा है” (बार्न्स के विचारों का अनुरूप सार)
• “मजबूत विश्वास के साथ परमेश्वर की योजना की पुष्टि करें; दुनिया के तवज्जो से ऊपर” (क्लार्क के प्रवचनशैली के अनुरूप)
याद रहे: इन उद्धृत विचारों का उद्देश्य पाठ के गहरे भाव को उभारना है, पूर्ण वाक्यों के बजाय पूरक सार प्रस्तुत किया गया है।