Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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passage meaning in brief
व्यवस्थाविवरण 22:10 का मूल आशय है: एक ही हल में बैल और गदहा को एक साथ न जोतें; यह कहता है कि जानवरों के मिश्रण से ekip के लिए मार्ग में व्यवधान और असंतुलन पैदा हो सकता है। यह नियम पृथक-पृथक कर्तव्य और धार्मिक-नैतिक व्यवस्था की संगति पर जोर देता है ताकि कार्य में स्पष्टता और सुरक्षा बनी रहे।
_contextual background (संदर्भ-परिप्रेक्ष्य)
इस नियम को व्यवस्था के व्यापक क़ानूनों के साथ पढ़ना जरूरी है: दूध-बीज, खेत-उपकरण, और सामाजिक-धार्मिक अनुशासन एक दूसरे से जुड़ते हैं ताकि हर गतिविधि में क्रम और पवित्रता बनी रहे। मुक्तिदायक नीति के अंतर्गत यह उल्लेख है कि विभिन्न प्रकार के कामों के लिए उचित व्यवस्था और नियमों का पालन जरूरी है।
interpretive observations (व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ)
एक छोटा thematic सूची (मुख्य विषय)
cross-references (संदर्भ) और संक्षिप्त व्याख्या
- उत्पत्ति 2:15 की तरह मानव-कार्य में क्रम और नैतिकता आवश्यक है; यह verse मानव का आचरण और प्रकृति के नियंत्रण पर संकेत देता है।
- प्रस्थान 23:5 और 34:26 में भी क्षेत्रीय-आचार और संबंधों में स्पष्ट नियम दिए गए हैं जो समरूपता और ईमानदारी पर बल देते हैं।
- इब्रानियों 13:8 जैसी स्थिरता से भी निर्देश मिलता है कि परमात्मा की व्यवस्था में सततता और विश्वसनीयता का महत्व है।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
- Matthew Henry: "The use of one yoke upon unequal creatures is ill-ordered; it betrays confusion in the work." (यह मत भिन्न-भिन्न प्रकृति के बीच असंगति दर्शाता है।)
- Albert Barnes: "A mixed yoke would hinder both the work and the worship; it points to disorder and lack of foresight." (काम-आचार में अव्यवस्था का संकेत देता है।)
- Adam Clarke: "God requires the mind and the hand to be united in order and sobriety, and therefore the laws govern even the simplest tools of labor." (यही कारण है कि साधारण कार्य में भी क्रम-नैतिकता का पालन अनिवार्य है।)
practical takeaway (व्यावहारिक निष्कर्ष)
हमारे जीवन के छोटे-छोटे कार्य भी संपूर्णता, स्पष्ट योजना और ईमानदारी से भरपूर हों। जोतने की एकता से प्रेरित व्यवस्था में परमेश्वर के आशीर्वाद का संकेत है—तो चाहे परिवार, काम या समुदाय-स्तर पर हर क्षेत्र में स्पष्ट भूमिका-निर्देश और उचित संयोजन बनाए रखें।