Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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मुख्य विचार: मैदान में पाई गई कन्या का न्याय और समाज-व्यवस्था
व्यवस्थाविवरण 22:27 का पाठ यह दर्शाता है कि जहाँ कन्या चिल्लाती है और उसकी मदद करने वाला कोई नहीं मिलता, वहां उसकी सुरक्षा और अधिकारों का प्रश्न है। इससे पता चलता है कि पुरानी व्यवस्था में विवाह-उद्देश्य के लिए पड़ने वाले अपराधों और सुरक्षा-नियमों के बीच सामाजिक विवेक कैसे काम करते थे, और पीड़ित के प्रति समुदाय की जिम्मेदारी कहाँ तक पहुँचती थी।
पाठ का साहित्यिक संदर्भ (literary context)
यह पद विवाह-विवाह और पुरुष-नियंत्रण के दायरे में एक विशेष स्थिति को स्पष्ट करता है: किसी कन्या के लिये “मैदान” में पाई जाना और चिल्लाने के बावजूद सहायता का अभाव, समाज में सुरक्षा के व्यवस्थित विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाता है। यह कानून में स्पष्ट व्यवस्था की मांग करता है कि ऐसे मामलों में आरोपी की क्रिया स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित हो और पीड़िता के लिए दायित्व निर्धारित रहे।
धार्मिक महत्व (theological significance)
यहाँ सुरक्षा का उल्लंघन एक नैतिक चिंता है। परमेश्वर का उद्देश्य सदाचार, सुरक्षा और सच्चे प्रेम का समाज बनाना है। कन्या की चिल्लाहट और सहायतापूर्ण प्रतिक्रिया की कमी से समाज की अंतरात्मा पर प्रश्न चिह्न लगते हैं, जो कानून के साथ सामाजिक दायित्व की भी आवश्यकता बताता है।
Cross-reference connections
ये संदर्भ दिखाते हैं कि बाइबल में सुरक्षा, विवेक और निष्पादन-प्रक्रिया कैसे एक समान नैतिक ताने-बाने में बंधे हैं।
प्रस्तुत प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse एक संरक्षक समाज की अपेक्षा को दर्शाता है: यदि कोई कन्या मैदान में चिल्लाती है और उसे सहायता नहीं मिलती, तो यह संकेत है कि समुदाय के भीतर सुरक्षा-नियम और नैतिक दायित्व प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं हो रहे थे। व्यावहारिक नियम और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से यह पाठ बताता है कि प्रभावी संरक्षण और सहायता, समाज की रक्षा के लिए अनिवार्य है, और न्याय के कार्यों में जहां घायल-वंचित की आवाज रहती है, वहां भी सक्रियता अपेक्षित है।
महत्वपूर्ण उद्धरण नोट: इस पृष्ठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के उपलब्ध समान-उद्धरणों में से यदि सीधे किसी छोटे कथन का उल्लेख किया गया हो, तो उसे सन्निर्वाचित किया गया है: इस टेक्स्ट में इन commentators के मौखिक छोटे उद्धरण सीधे नहीं दिए गए हैं।