व्यवस्थाविवरण 29:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

रोटी जो तुम नहीं खाने पाए, और दाखमधु और मदिरा जो तुम नहीं पीने पाए, वह इसलिए हुआ कि तुम जानो कि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्‍वर हूँ।

व्यवस्थाविवरण 29:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

व्यवस्थाविवरण 29:6 पर टिप्पणी—तुमने रोटी, दाखमधु, और मदिरा क्यों नहीं खाई पी?

परिप्रेक्ष्य: यह verse मसहयाउन के पुनःप्राप्ति-संकेत के समय के दृश्यों से जुड़ा है, जब प्रथमिक इस्राइल के लोग wilderness में थे और परमेश्वर ने उन्हें चिह्नों के साथ सिखाया कि जीवन का हर आवश्यक उन पर निर्भर है। यहाँ रोटी, दाखमधु और मदिरा के अभाव का उल्लेख एक स्पष्ट पाठ है: परमेश्वर अपनी सत्ता और संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत निर्भरता को स्थापित कर रहे हैं। यह घटना बताती है कि सामान्य भोजन और पेय भी ढाल बन जाते हैं ताकि लोगों को यह याद रहे कि वे अपने वास्तविक स्रोत से जुड़े हैं—यहोवा ही उनका परमेश्वर है।

केंद्रीय अभिप्राय

इस verse में प्रेरित अभिप्राय यह है कि वह अनुभव जो परमेश्वर आपको जीवन की छोटी-छोटी चीजों में देता है—खाना, पीना, सुरक्षा—उसी परमेश्वर की ओर आपकी निर्भरता की पुष्टि है। यह अतीत की पश्चाताप-यात्रा का स्मारक है कि यहूदियों के लिए उनके समुदाय की पहचान और परमेश्वर के साथ उनका संबंध कैसे बना रहता है: प्रत्येक अनुदान और हर असामान्य अभाव—दोनों—यहोवा के नेतृत्व को याद दिलाते हैं।

मुख्य विषय

  • भरोसा केवल भोजन पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के निर्देशों पर भी है; वह जो खाते-पीते हैं, वह उसकी कृपा के कारण संभव है।
  • भूखा रहना या रोटी-पीने में कमी एक चेतावनी है कि लोग भटक न जाएँ; परमेश्वर के उद्धार और संरक्षण की स्मृति बनाए रखें।
  • उपवास जैसे सामाजिक-धार्मिक क्रम प्रकट करते हैं कि लोग कब या क्यों एक खास स्थिति में मानवता की निर्भरता का अनुभव करें।

विवेचित संबंधित आयतें

1) हिब्रू इतिहास में भोजन-भोजन के साथ परमेश्वर की उपस्थिति—उक्त घटनाओं का स्मरण; 2) निर्भरता पर जोर देने वाले अन्य verses जैसे कि प्रस्थान 16:4, 17:6—जहाँ मूसा को आकाश से रात्रि के लिए आकाश से रोटी प्रदान करने का संकेत मिलता है; 3) दाऊद की तपस्या-व्यवहार में भी भोजन के साथ परमेश्वर के निर्देश की स्मृति मिलती है।

व्यावहारिक विचार

हम आज भी अपने जीवन के छोटे-छोटे स्रोत—आहार, स्वास्थ्य, सुविधा—क्या यह स्मरण कराते हैं कि सभी कुछ परमेश्वर के हाथ में है? यदि किसी दिन आवश्यकता अधिक हो, तो यह पंक्ति स्मरण कराती है कि हमारा उद्देश्य परमेश्वर के साथ नज़र और समर्पण बनाए रखना है, ताकि हम उनके आदेश में चलते रहें। साथ ही, दैनंदिन कामकाज में ईमानदारी, आशीर्वाद और कृतज्ञता का विकास हो।

छोटी-सी समापन टिप्पणी

यह verse यह याद दिलाता है कि हमारे भोजन और पेय—even in deprivation—परमेश्वर की योजना और स्नेह का संकेत हैं। यह সরল स्मरण है कि हमारा जीवन-भर का आधार वही है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संचार)

- निर्भरता और स्मरण की विचारधारा: निर्गमन 16:4 में ईश्वर आकाश से रोटी देता है ताकि लोगों को उनके उद्धारकर्ता की कृपा याद रहे।

- परिशुद्ध निर्देश और आशीर्वाद: व्यवस्थाविवरण 8:3 दिखाता है कि मन्ना से सहायता मिलती है ताकि मनुष्य यह जान ले कि मनुष्य केवल रोटी से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन से जीवित रहता है।

उद्धृत उल्लेख: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शाब्दिक उद्धरण अगर उपलब्ध हों तो केवल वही उल्लेखित हैं; नीचे दिए गए सार में उनके विचार natural रूप से समाहित हैं, और पूर्ण उद्धरण आवश्यक संदर्भों में उद्धृत किए गए हैं।

संघर्ष के बिना, यह verse हमें स्मरण कराता है कि हमारा जीवन और आशीर्वाद एक ही स्रोत से आते हैं—यहोवा, हमारा परमेश्वर।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 29:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 8:3 (HINIRV) »
उसने तुझको नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा भी जानते थे, वही तुझको खिलाया; इसलिए कि वह तुझको सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो-जो वचन यहोवा के मुँह* से निकलते हैं* उन ही से वह जीवित रहता है। (मत्ती 4:4, लूका 4:4 1 कुरि. 10:3)

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इफिसियों 5:18 (HINIRV) »
और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ, (नीति. 23:31-32, गला. 5:21-25)

निर्गमन 16:35 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 16:35 (HINIRV) »
इस्राएली जब तक बसे हुए देश में न पहुँचे तब तक, अर्थात् चालीस वर्ष तक मन्ना को खाते रहे; वे जब तक कनान देश की सीमा पर नहीं पहुँचे तब तक मन्ना को खाते रहे।

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