Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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पद का सीधे अर्थ
व्यवस्थाविवरण 3:27 में परमेश्वर के अनुसार मसीहा के मार्ग में माने जाने वाले सीमाओं का निर्देश है: ग्रहणशील नेजात और उन स्थानों के बारे में आंख उठाकर देखने को कहा गया है, क्योंकि इस समय योशुआ को यरदन से पार नहीं जाने दिया जाएगा।
प्रस्तावित पाठमुष्ठ/background
यह कड़ियाँ वाचा-निर्देश में एक राज्य-यात्रा की योजना से जुड़ी हैं। मूस के उत्तराधिकारी योशुआ को इस समय यह बतलाया गया कि उसे आगे जाके कनान की भूमि का भाग्य तय करना है, पर कुछ जगहों पर सीमा-पालन के कारण आगे बढ़ना असंभव होगा। इस दायित्व के साथ वह पहाड़ों और चारों दिशा-स्थलों को देखकर देश की स्थिति का आकलन करे।
व्याख्या के प्रमुख निष्कर्ष
पवित्र पाठ के साथ संबंध बनाए रखने के लिए 2-3 cross-references
1) व्यवस्था 2:24-25 — उस समय के नेताओं को सीमाओं पर निर्णय लेने की अनुमति मिलने से पहले उनका आशीर्वाद और योजना स्पष्ट होती है। यह संदर्भ बताता है कि सीमा-निर्धारण में परमेश्वर की योजना कितनी स्पष्ट होती है।
2) यूहन्ना 14:6 — परमेश्वर के मार्गदर्शन के बिना मार्ग ढूंढ़ना संभव नहीं; यह verse यह दिखाता है कि सही निर्णयों के लिए ईश्वर का प्रकाश आवश्यक है।
3) यशायाह 30:21 — प्रशंसा और मार्गदर्शन के लिए कानों का उत्तरदायित्व; जब आप चलते हैं, तब भी परमेश्वर की आवाज मार्गदर्शक होती है।
सूक्ष्म interpretive observations
- यहां कदम उठाने से पहले चारों दिशाओं को देखना यह दर्शाता है कि सैनिक-यात्रा से पहले हर पक्ष विचारणीय है।
- "उस देश को देख ले" से संकेत है कि भूमि की स्थिति, अवसर और खतरे की सत्ता दृष्टिगोचर हो, ताकि बाद के चरण judiciously लिए जा सकें।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
केंद्रीय takeaway
हमारे जीवन में भी कई बार हमें स्पष्ट रूप से देखना पड़ता है कि कब अस्थाई रोक संभव है और कब पूर्ण कदम उठाने चाहिए। परमेश्वर के आदेश में विवेक, धैर्य और विश्वास साथ होते हैं। स्थिति की सम्यक निरीक्षण से हम सही दिशा में कदम रख पाते हैं।
नोट्स: महनीय उद्धरण (यदि उपलब्ध)
इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलित विचारों से आवश्यकतानुसार संक्षिप्त उद्धरण दिए जा सकते हैं, परंतु মোট पाठ में पूर्ण उद्धरण नहीं होंगे। नीचे संकलित निष्कर्षात्मक बिंदु केवल संदर्भ हेतु हैं:
- Henry/ Barnes/ Clarke से स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध होने पर, उन्हें पंक्तिबद्ध रूप में समाहित किया जाएगा ताकि पाठक के लिए संरक्षित पाठ की विशिष्टता बनी रहे।