Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
व्यवस्थाविवरण 3:1 व्यवस्थाविवरण 3:2 व्यवस्थाविवरण 3:3 व्यवस्थाविवरण 3:4 व्यवस्थाविवरण 3:5 व्यवस्थाविवरण 3:6 व्यवस्थाविवरण 3:7 व्यवस्थाविवरण 3:8 व्यवस्थाविवरण 3:9 व्यवस्थाविवरण 3:10 व्यवस्थाविवरण 3:11 व्यवस्थाविवरण 3:12 व्यवस्थाविवरण 3:13 व्यवस्थाविवरण 3:14 व्यवस्थाविवरण 3:15 व्यवस्थाविवरण 3:16 व्यवस्थाविवरण 3:17 व्यवस्थाविवरण 3:18 व्यवस्थाविवरण 3:19 व्यवस्थाविवरण 3:20 व्यवस्थाविवरण 3:21 व्यवस्थाविवरण 3:22 व्यवस्थाविवरण 3:23 व्यवस्थाविवरण 3:24 व्यवस्थाविवरण 3:25 व्यवस्थाविवरण 3:26 व्यवस्थाविवरण 3:27 व्यवस्थाविवरण 3:28 व्यवस्थाविवरण 3:29



विगत नगरों की पूर्ण विजय का संदेश
अर्थ स्पष्ट है: व्यवस्थाविवरण 3:4 में बतलाया गया है कि ईश्वर ने पूरे आर्गोब क्षेत्र को इस्रायल के हाथ में दे दिया और उसमें स्थित सभी नगर हमने जीत लिए। यहाँ “सारे नगर” से मिशन-स्थिर विजय की सफलता और ईश्वर की वफ़ादारी का प्रमाण मिलता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद यहूदियों के लिए एक ठोस स्मरण है कि दीर्घकालिक संघर्षों के बीच परमेश्वर अपनी योजनाओं की पूर्ति में साथ है। मोशे की अगुवाई के बाद यूदा-इस्राइल विशाल युद्धों की दिशा में बढ़ रहा था, और बाशान प्रदेश के ओग के राज्य की साठ नगरों का कब्जा यह दिखलाता है कि परमेश्वर ने उन सीमाओं को भी पार किया जो विरोधी दुनिया के लिए सुरक्षित मानी जाती थीं।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमैटिक बिंदु
अन्य पदों के साथ क्रॉस-रेफरेंस
1) व्यवस्थाविवरण 2:24-25 — परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार युद्ध की शुरुआत। यह दिखाता है कि विजय पहले विश्वास के आह्वान पर निर्भर है और फिर कर्म-प्रयोग से सिद्ध होती है।
2) व्यवस्थाविवरण 7:22 — परमेश्वर बड़े बड़े विरोधों को छोटे-छोटे क्रमों में कम करता है ताकि लोगों की याददाश्त और भरोसा मजबूत रहे।
3) आकाशवाणी 3:8 (या उपलब्ध पाठ) — यही सिद्धांत कि ईश्वर के उद्घोष के अनुसार नेता और समुदाय एक संग चलें, ताकि दैवीय रणनीति सफल हो सके।
व्यावहारिक निष्कर्ष
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भरोसा और आज्ञापालन में ईश्वर की सड़क पर चलना कठिन समयों में भी स्पष्ट मार्ग देता है। व्यक्तिगत संघर्ष में भी, परमेश्वर के निर्देशों के प्रति समर्पण ही सुरक्षा और सफलता का मार्ग है।
पहचान योग्य उद्धरण-उद्धृतियाँ
महत्वपूर्ण उनके उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट पाठ से अगर संजोए गए शब्द मिलते हैं, उन्हें उद्धृत करने का अवसर है। नीचे उनके छोटे, विशिष्ट शब्दों के वास्तविक उद्धरण नीचे नहीं दिए जा रहे; परन्तु यदि उपलब्ध हों तो ब्रह्म-वचन के साथ संदर्भित किए जा सकते हैं।