इफिसियों 5:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे पत्नियों, अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के। (कुलु. 3:18, 1 पत. 3:1, उत्प. 3:16)

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इफिसियों 5:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

इफिसियों 5:22 के immediate setting और अर्थ

पद 22 का संदर्भ न केवल एक विशेष सामाजिक भूमिका की बात है, बल्कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं के प्रकाश में विवाह-जीवन के विश्वासभरे अनुशासन को प्रस्तुत करता है। यह परिप्रेक्ष्य नया निर्माण के सिद्धान्त के अनुरूप है, जहाँ आत्मिक परिवर्तन से पारिवारिक संबंध क्रमशः ढलते हैं। पवित्रशास्त्र में पति-पत्नी का सम्बन्ध प्रेम और सम्मान से भरा हुआ दिखाया गया है, ताकि संसार में ईश्वर के रब्बी-कर्तव्य का प्रत्यक्ष द्योतक बने।

पाठ का मुख्य संदेश: ईश्वर के संदर्भ में पत्नी और पति की भूमिका

यह पाठ स्पष्ट करता है कि पत्नी अपने पति के अधीन हों, जैसा कि प्रभु के अनुसरण में हो—यह आत्म-त्याग नहीं, बल्कि ईश्वर के आदेश के अनुरूप एक व्यवस्था है जिसमें पति-पत्नी के संबंध में संतुलन बना रहता है। कुलुस्सियों 3:18 और 1 पतरस 3:1 जैसे अन्य सूक्तियाँ इस विचार को आगे बढ़ाती हैं कि घरेलू जीवन में प्रभु की आज्ञा के अनुसार आचरण कितना अहम है।

कुंजी शब्द और छवि

  • —यह शब्द अधिकार-प्राप्ति नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वासपूर्ण सहयोग और सम्मान का संकेत है।
  • —प्रभु की प्रेरणा को मानना, जो प्रेम, सहनशीलता और सेवा-भाव की पर्व है।

अनुचित निष्कर्ष से बचना

यह आयत किसी प्रकार के द्वंद्व या तलाक-प्रेरक तर्क को नहीं बनाती; बल्कि रिश्ते के दायित्वों को प्रभुसत्ता और प्रेम की रोशनी में देखने को कहती है। अन्य पासेज़—उदा. एफिसियों 5:25-28 में पति के प्रेम की उच्चतम मानक (स्व-सेवा-आरोहण) भी दिया गया है—इनका संगत प्रभाव यह दर्शाता है कि दाम्पत्य जीवन एक-दूसरे की रक्षा और सेवा से बनता है।

अन्य संबद्ध संदर्भ

• कुलु 3:18—पत्नी को पति के अधीन होने की exhortation का समर्थन; प्रेम और सम्मान की दृष्टि से परिवार की व्यवस्था।

• 1 पतरस 3:1—जो स्त्रियाँ अपने पति के प्रति आचरण में शांति और नम्रता दिखाती हैं, वे आत्मिक प्रभाव डाल सकती हैं।

• उत्पत्ति 3:16—परिवारिक चक्र में समर्पण और उत्पन्न चुनौतियाँ, जहाँ पति और पत्नी के बीच सहयोग जरूरी है।

आज के जीवन में अनुप्रयोग

– पारिवारिक जीवन में एक दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग को ऊँचा रखें।

– संदेह और विवाद के समय भी प्रेम भरा आचरण बनाए रखें, ताकि घर ईश्वर-आदर का स्थल बना रहे।

– पति-पत्नी दोनों मिलकर prayed-leaning निर्णय लें; बच्चों के लिए स्थिर और संस्कारी वातावरण बनाएं।

संयुक्त टिप्पणी: मिसाल से कुछ निष्कर्ष

मत्ती हार्नी की टिप्पणी के अनुसार, इस प्रकार के आदेश पर यदि प्रेम, अधिकार और सम्मान संतुलित रहते हैं, तो घर में शांति और ईश्वर की महिमा बढ़ती है। ऐल्बर्ट बर्न्स ने कहा कि पति की भूमिका प्रेमपूर्ण नेतृत्व की है, जिससे पत्नी सुरक्षित और समर्थ महसूस करे। ऐडम क्लार्क ने इसे गतिविधि के तौर पर देखा कि पूरे दाम्पत्य में एक-दूसरे की गरिमा की रक्षा आवश्यक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

इफिसियों 5:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हे पत्नियों, जैसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने-अपने पति के अधीन रहो। (इफि. 5:22)

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1 पतरस 3:1 (HINIRV) »
हे पत्नियों, तुम भी अपने पति के अधीन रहो। इसलिए कि यदि इनमें से कोई ऐसे हो जो वचन को न मानते हों,

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उत्पत्ति 3:16 (HINIRV) »
फिर स्त्री से उसने कहा, “मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दुःख को बहुत बढ़ाऊँगा; तू पीड़ित होकर बच्चे उत्‍पन्‍न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।” (1 कुरि. 11:3, इफि. 5:22, कुलु. 3:18)

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