Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इफिसियों 5:22 के immediate setting और अर्थ
पद 22 का संदर्भ न केवल एक विशेष सामाजिक भूमिका की बात है, बल्कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं के प्रकाश में विवाह-जीवन के विश्वासभरे अनुशासन को प्रस्तुत करता है। यह परिप्रेक्ष्य नया निर्माण के सिद्धान्त के अनुरूप है, जहाँ आत्मिक परिवर्तन से पारिवारिक संबंध क्रमशः ढलते हैं। पवित्रशास्त्र में पति-पत्नी का सम्बन्ध प्रेम और सम्मान से भरा हुआ दिखाया गया है, ताकि संसार में ईश्वर के रब्बी-कर्तव्य का प्रत्यक्ष द्योतक बने।
पाठ का मुख्य संदेश: ईश्वर के संदर्भ में पत्नी और पति की भूमिका
यह पाठ स्पष्ट करता है कि पत्नी अपने पति के अधीन हों, जैसा कि प्रभु के अनुसरण में हो—यह आत्म-त्याग नहीं, बल्कि ईश्वर के आदेश के अनुरूप एक व्यवस्था है जिसमें पति-पत्नी के संबंध में संतुलन बना रहता है। कुलुस्सियों 3:18 और 1 पतरस 3:1 जैसे अन्य सूक्तियाँ इस विचार को आगे बढ़ाती हैं कि घरेलू जीवन में प्रभु की आज्ञा के अनुसार आचरण कितना अहम है।
कुंजी शब्द और छवि
अनुचित निष्कर्ष से बचना
यह आयत किसी प्रकार के द्वंद्व या तलाक-प्रेरक तर्क को नहीं बनाती; बल्कि रिश्ते के दायित्वों को प्रभुसत्ता और प्रेम की रोशनी में देखने को कहती है। अन्य पासेज़—उदा. एफिसियों 5:25-28 में पति के प्रेम की उच्चतम मानक (स्व-सेवा-आरोहण) भी दिया गया है—इनका संगत प्रभाव यह दर्शाता है कि दाम्पत्य जीवन एक-दूसरे की रक्षा और सेवा से बनता है।
अन्य संबद्ध संदर्भ
• कुलु 3:18—पत्नी को पति के अधीन होने की exhortation का समर्थन; प्रेम और सम्मान की दृष्टि से परिवार की व्यवस्था।
• 1 पतरस 3:1—जो स्त्रियाँ अपने पति के प्रति आचरण में शांति और नम्रता दिखाती हैं, वे आत्मिक प्रभाव डाल सकती हैं।
• उत्पत्ति 3:16—परिवारिक चक्र में समर्पण और उत्पन्न चुनौतियाँ, जहाँ पति और पत्नी के बीच सहयोग जरूरी है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
– पारिवारिक जीवन में एक दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग को ऊँचा रखें।
– संदेह और विवाद के समय भी प्रेम भरा आचरण बनाए रखें, ताकि घर ईश्वर-आदर का स्थल बना रहे।
– पति-पत्नी दोनों मिलकर prayed-leaning निर्णय लें; बच्चों के लिए स्थिर और संस्कारी वातावरण बनाएं।
संयुक्त टिप्पणी: मिसाल से कुछ निष्कर्ष
मत्ती हार्नी की टिप्पणी के अनुसार, इस प्रकार के आदेश पर यदि प्रेम, अधिकार और सम्मान संतुलित रहते हैं, तो घर में शांति और ईश्वर की महिमा बढ़ती है। ऐल्बर्ट बर्न्स ने कहा कि पति की भूमिका प्रेमपूर्ण नेतृत्व की है, जिससे पत्नी सुरक्षित और समर्थ महसूस करे। ऐडम क्लार्क ने इसे गतिविधि के तौर पर देखा कि पूरे दाम्पत्य में एक-दूसरे की गरिमा की रक्षा आवश्यक है।