Old Testament
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एस्तेर 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सांझ को तो वह जाती थी और सवेरे को वह लौटकर रनवास के दूसरे घर में* जाकर रखेलों के प्रबन्धक राजा के खोजे शाशगज के अधिकार में हो जाती थी, और राजा के पास फिर नहीं जाती थी। और यदि राजा उससे प्रसन्न हो जाता था, तब वह नाम लेकर बुलाई जाती थी।
एस्तेर 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 4:11 (HINIRV) »
“राजा के सब कर्मचारियों, वरन् राजा के प्रान्तों के सब लोगों को भी मालूम है, कि क्या पुरुष क्या स्त्री, कोई क्यों न हो, जो आज्ञा बिना पाए भीतरी आँगन में राजा के पास जाएगा उसके मार डालने ही की आज्ञा है; केवल जिसकी ओर राजा सोने का राजदण्ड* बढ़ाए वही बचता है। परन्तु मैं अब तीस दिन से राजा के पास नहीं बुलाई गई हूँ।”

उत्पत्ति 34:19 (HINIRV) »
और वह जवान जो याकूब की बेटी को बहुत चाहता था, इस काम को करने में उसने विलम्ब न किया। वह तो अपने पिता के सारे घराने में अधिक प्रतिष्ठित था।

व्यवस्थाविवरण 21:14 (HINIRV) »
फिर यदि वह तुझको अच्छी न लगे, तो जहाँ वह जाना चाहे वहाँ उसे जाने देना; उसको रुपया लेकर कहीं न बेचना, और तेरा उससे शारीरिक संबंध था, इस कारण उससे दासी के समान व्यवहार न करना।
एस्तेर 2:14 का प्रस्तर-संदेश: संध्या से सवेरे तक की प्रतीक्षा और राज्य के भीतर प्रेम
विधेयक के अनुसार, एस्तेर 2:14 में प्रसंग यह है कि राणी विक्रमिणी के चयन के भाग के रूप में पात्रो के जटिल इंतज़ार और अवसरों की प्रस्तुति होती है। संध्याकाल में वह प्रवेश करती है और सवेरे वह रनवास के दूसरे घर में जाकर रखेलों के प्रबन्धक के पास पहुंचती है, जहाँ राजा के उत्तर-प्रशासन में उसे बोलने का अवसर मिलता है; यदि राजा प्रसन्न होता है, तो उसे बुला लिया जाता है। यह दृश्य सामुदायिक और रानी-निर्वाचित परंपरा के भीतर एक महत्वपूर्ण तटस्थता और अवसर-गत्य को दर्शाता है।
यह पाठ ईश्वर की योजना या विश्वास के बारे में क्या बताता है
गलत या बहुलक अनुवादों के बिना भी यह स्पष्ट है कि प्रभु-योजना के पीछे अनदेखी कुशलता और प्रकटन का क्रम है। इस विशेष प्रसंग में, ईश्वर के धर्म और कर्तव्य की उपलब्धि मानव-निर्णय से स्वतंत्र नहीं, बल्कि उनके बीच एक प्रकार की क्रमबद्ध सहायता के रूप में उभरती है। राजा के पास बुलाए जाने की प्रक्रिया में यह दिखता है कि किस प्रकार परिस्थितियाँ एक साथ जुड़ कर किसी की स्थिति को मुकाम देती हैं। यह हमारी आज की चिंता के लिए प्रेरणा है कि कैसे विश्वासयोग्य जीवन में उचित समय और अवसर मिलते हैं, और कैसे ईश्वर उन अवसरों को पहचानने में हमारी मदद करते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों का स्पष्टीकरण
संबद्ध पाठ (Cross-references) और उनका संक्षिप्त उपयोग
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि घटनाओं की क्रमिकता और समय-निर्णय ईश्वर की सदा-स्थापित योजना के अनुरूप होते हैं; हमारी भागीदारी में धैर्य और विश्वासन आवश्यक है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
इस पाठ में मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों का सामान्य सहयोग मिलता है: अवसर-चयन में धैर्य और प्रभु-प्रेरित नेतृत्व की भूमिका पर बल; तथा नीतिगत निर्णयों में ईश्वर की योजना के साथ हमारे कदमों की संगतता पर दृष्टि। अगर आप इन टिप्पणीकारों के शब्दों का संक्षिप्त सार देखते हैं, तो वे यह संकेत देते हैं कि कठिन समय के बीच भी परमेश्वर का उद्देश्य प्रमुख रहता है और भक्तों को सही आगे बढ़ना चाहिए।