Old Testament
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एस्तेर 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह उन बन्दियों के साथ यरूशलेम से बँधुआई में गया था, जिन्हें बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर, यहूदा के राजा यकोन्याह के संग बन्दी बना के ले गया था।
एस्तेर 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 24:14 (HINIRV) »
फिर वह पूरे यरूशलेम को अर्थात् सब हाकिमों और सब धनवानों को जो मिलकर दस हजार थे, और सब कारीगरों और लोहारों को बन्दी बनाकर ले गया, यहाँ तक कि साधारण लोगों में से कंगालों को छोड़ और कोई न रह गया।

2 इतिहास 36:20 (HINIRV) »
जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों-पोतों के अधीन रहे।

2 राजाओं 24:6 (HINIRV) »
अन्त में यहोयाकीम मर कर अपने पुरखाओं के संग जा मिला और उसका पुत्र यहोयाकीन* उसके स्थान पर राजा हुआ।
एस्तेर 2:6 — संदर्भ में व्याख्या
यह पद asteर 2:6 बताता है कि यहूदा के राजा यकोन्याह के समय सेज जिसे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने बंदी बनाकर ले गया था, वह पागलपन से नहीं, बल्कि एक क्रम के हिस्से के रूप में गया था। यह संदर्भ ऐतिहासिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत है कि यहूदियों के निर्वासन का पहला चरण बाबुल के बड़े साम्राज्य के विस्तार के साथ जुड़ा था।
मुख्य अर्थ
पद दर्शाता है कि कई कुशल और योग्य लोग भी बाबुल की राजधानी के भाग्य में थे—क्योंकि वे “हत्या-यात्रा” की जगह, एक सामाजिक-धार्मिक-नैतिक परीक्षण के भाग बने। यहूदा के प्राचीन राजपरिवार के लोग, जिनमें यकोन्याह के साथ परमेश्वर की चुनी हुई व्यवस्था के भाग थे, अब एक विदेशी सत्ता के अधीन रहने के लिये ले जाए गए।
मुख्य विषय
सम्बन्धी पद
– पूर्व का निष्कासन प्रेरित करता है कि यहूदियों की अस्थिरता और परमेश्वर के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बना।
– यहस्त्र की कहानी में आगे आने वाला परिवर्तन इस निर्वासन-स्थिति से उत्पन्न होता है; यह दिखाता है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति भी ईश्वर की योजना के अनुसार प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
– बाबुल के राजा के शासन के समय की राजनीतिक-धार्मिक गतिशीलता पर विचार करना यहूदियों की आस्थाओं के साथ जुड़े निर्णयों को समझने में मदद करता है।
व्यावहारिक विचार
जीवन में कभी-कभी हमारे चयन भी बड़े इतिहास के धारा को प्रभावित कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर की योजना स्थिर रहती है; निर्भरता उसकी ओर रखते हुए, सामाजिक दबाव के बावजूद निष्ठा बनाए रखना चाहिए। यहस्त्र कहानी के beginnen से हमें यह सिखाती है कि दृष्टिकोण बदल सकता है, पर ईश्वर की योजनाएं नहीं।
संक्षिप्त समापन
एस्तेर 2:6 यह स्मरण कराता है कि निर्वासन की कड़वी वास्तविकता के बीच भी परमेश्वर की योजनाएँ चलती हैं। यह पद Esther की कहानी के पन्नों को खोलने वाला पहला चरण है, जिसमें आगे चलकर वही पात्र और घटनाएँ उधर मोड़ लेंगी जिनसे उद्धार और विश्वास की नई परंपराएं जन्म लेंगी।
क्रॉस-रेफरेंसे
1) इज़राइल के बंधन और निर्गमन के संदर्भ: यह बताता है कि कैसे इस्राइल के लोग विदेशी क्षेत्रों में रहते हुए भी परमेश्वर के आश्वासन-निर्देशों पर टिके रहते हैं (संकेत: निर्वासन के पाठों पर विचार)।
2) दाऊद के गुण और परिचय: कठिन परिस्थितियों में निष्ठा और धैर्य बनाए रखना—यहाँ Esther की ओर संकेत।
3) अन्य बाइबिल पात्र जो विदेशीता में ईश्वर-योजनाओं के अधीन रहे: यहूदियों के लिए एक प्रेरक प्रमाण कि अस्थायी परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के उद्देश्य को नहीं रोक सकतीं।
नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के सीधे उद्धृत छोटे वाक्य उपलब्ध नहीं थे; यदि उपलब्ध हों तो उन्हें आवश्यक रूप से उद्धृत किया जाएगा और संदर्भ के साथ स्पष्ट किया जाएगा।