Old Testament
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एस्तेर 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
शूशन गढ़ में मोर्दकै नामक एक यहूदी रहता था, जो कीश नाम के एक बिन्यामीनी का परपोता, शिमी का पोता, और याईर का पुत्र था।
एस्तेर 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 9:1 (HINIRV) »
बिन्यामीन के गोत्र में कीश नाम का एक पुरुष था, जो अपीह के पुत्र बकोरत का परपोता, और सरोर का पोता, और अबीएल का पुत्र था; वह एक बिन्यामीनी पुरुष का पुत्र और बड़ा शक्तिशाली सूरमा था।

2 शमूएल 16:5 (HINIRV) »
जब दाऊद राजा बहूरीम तक पहुँचा, तब शाऊल का एक कुटुम्बी वहाँ से निकला, वह गेरा का पुत्र शिमी था; और वह कोसता हुआ चला आया।

एस्तेर 5:1 (HINIRV) »
तीसरे दिन एस्तेर अपने राजकीय वस्त्र पहनकर राजभवन के भीतरी आँगन में जाकर, राजभवन के सामने खड़ी हो गई। राजा तो राजभवन में राजगद्दी पर भवन के द्वार के सामने विराजमान था;
एस्तेर 2:5 का पठन-संदर्भ और उसका आध्यात्मिक अर्थ
शूशान गढ़ के समय, एस्तेर-युग के निर्देशानुसार एक यहूदी मोर्दकै रहता था। वह करीबी इतिहासिक पृष्ठभूमि देता है: शाही सभा और टकरावों के बीच, यहूदी समुदाय का भविष्य इस पात्र पर निर्भर है। यह विवरण हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर के उपाय कभी-भी जनता की दृष्टि से बड़े नहीं होते, बल्कि उसकी योजना अदृश्य रूप से पुराने और नए प्रतीकों में निहित रहती है।
यह पाठ भगवान या विश्वास के बारे में जो कुछ बताता है
पहला संकेत यह है कि रोशन-जगह में जीवन कैसे चलता है—यहूदी जाति के सदस्य एक ऐसे समय में जी रहे हैं जब उनके भविष्य के लिए निर्णयों की आवश्यकता है। मोर्दकै का अस्तित्व यह दर्शाता है कि विश्वास और निष्ठा का प्रभाव परिस्थिति-परिवर्तन नहीं करता, बल्कि उसकी दृढ़ता और आस्था का प्रभाव समय के साथ उभरकर आता है। संदिग्ध स्थितियों में भी, परमेश्वर के अधिकार और विधान के अनुरूप रहने का आग्रह बना रहता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
संरचित related passages
यहां चारित्रिक लिंक जुड़े हैं जो इस स्थिति को समझाने में मदद करते हैं:
इन संदर्भों से ज्ञात होता है कि निष्ठा, धैर्य, और प्रशासनिक मुश्किलों के बीच परमेश्वर की योजना काम करती है।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप संयुक्त टिप्पणी
एस्तेर 2:5 का पंक्ति-स्तर पर सूचित संकेत यह है कि शूशन गढ़ जैसी सत्ता-स्थल पर भी परमेश्वर की योजना सूक्ष्म रूप से फलती-फूलती है। मोर्दकै जैसे विश्वासयोग्य व्यक्ति का जीवन यह दिखाता है कि दृढ़ आस्था और नैतिक आचरण कैसे समुदाय की सुरक्षा बनते हैं, और कैसे नई पीढ़ियाँ वह विरासत लेकर आगे बढ़ती हैं। प्राचीन पाठों के साथ जुड़े उद्धरण-परिचयों से यह बात स्पष्ट होती है कि विश्वास एक ऐसी धुरी है जो समय-समय पर मानव इतिहास के मोड़ पर भी मार्गदर्शक बनती है—यही है वास्तविक आस्था का प्रभाव।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी टिप्पणियों के छोटे-छोटे उद्धरण जारी किए गए हैं only यदि उपलब्ध हों।