Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएस्तेर 4:8 बाइबल पद की व्याख्या
एस्तेर 4:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर यहूदियों को विनाश करने की जो आज्ञा शूशन में दी गई थी, उसकी एक नकल भी उसने हताक के हाथ में, एस्तेर को दिखाने के लिये दी, और उसे सब हाल बताने, और यह आज्ञा देने को कहा, कि भीतर राजा के पास जाकर अपने लोगों के लिये गिड़गिड़ाकर विनती करे।
एस्तेर 4:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 4:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सभोपदेशक 10:4 (HINIRV) »
यदि हाकिम का क्रोध तुझ पर भड़के, तो अपना स्थान न छोड़ना, क्योंकि धीरज धरने से बड़े-बड़े पाप रुकते हैं।

अय्यूब 9:15 (HINIRV) »
चाहे मैं निर्दोष भी होता परन्तु उसको उत्तर न दे सकता; मैं अपने मुद्दई से गिड़गिड़ाकर विनती करता।

एस्तेर 3:14 (HINIRV) »
उस आज्ञा के लेख की नकलें सब प्रान्तों में खुली हुई भेजी गईं कि सब देशों के लोग उस दिन के लिये तैयार हो जाएँ।
एस्तेर 4:8 पर टिप्पणी — संदर्भ और समझ
एस्तेर 4 में यहूदियों के पक्ष में मरक़ज़ित संकट का क्षण है जब ऐमनेश्वर के शासन के कारण ईश्वरीय व्यवस्था के अनुरूप उनकी सुरक्षा खतरे में है। इस verse में मोर्देखाई एक संदेश भेजते हैं जो एस्तेर को राजा के समक्ष जाकर यहूदियों के लिए विनती करने को कहता है। एक साथ उन्हें यह दिखाने के लिए कि खतरा कितना गंभीर है, उसने एक नकल प्रस्तुत की—यानी शूशन के आदेश का कड़ाई के साथ उल्लेख—ताकि एस्तेर समझ जाए कि यह कार्य कितनी गम्भीरता का है।
मूल अर्थ और उद्देश्य
यह verse यह संकेत करता है कि संकट की स्थिति में ईश्वर के लोगों के लिए साहसपूर्वक कदम उठाने की आवश्यकता है, भले ही वह कदम प्रथम दृष्टया भॉतिक जोखिम लिए हुए क्यों न हो। मोर्देखाई की भाषा स्पष्ट करती है कि राजा के सामने जाकर विलाप या विनती करने की आज्ञा एक आवश्यक रणनीति है ताकि यहूदियों के विरुद्ध चल रही विपत्ति का समाधान हो सके।
तीन प्रमुख थीम
मेल-जोड़ने वाले उद्धरण (प्रमुख निष्कर्ष से जुड़े)
टिप्पणीकारों के साथ संदर्भ मिलते हैं कि एस्तेर की स्थिति में धैर्य, कर्तव्य-निष्ठा और प्रार्थना एक साथ काम करते हैं। नीचे कुछ संकाय-आउटपुट से निकली समान धारणाएँ हैं, जिन्हें पठन-पाठन में समझने में मदद मिलती है:
इनमें से कोई एक-वाक्यात्मक उद्धरण यदि उपलब्ध हो तो उसका उल्लेख नीचे किया गया है:
“तुम्हीं ने इन कर्मों को किया है”—यह प्रकार के विचार मोर्देखाई के संदेश में झलकते हैं।
Related passages
कुछ सम्बन्धित संदर्भ जहां इसी प्रकार के निर्णय, प्रार्थना, और समुदाय के लिए खड़े होने की आवश्यकता उभरती है:
इन संदर्भों का उद्देश्य यह दिखाना है कि कठिन समय में ईश्वर के लोग कैसे अपने विश्वास और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाते हैं।
व्यवहारिक विचार
जब हमारे सामने भी ऐसी स्थिति आती है, जहाँ खतरा हो पर ईश्वर का कार्य भी साथ हो, तो पहिलो कदम स्पष्ट हो सकता है: धैर्य और प्रार्थना के साथ उचित उपाय चुनना—क्योंकि कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना बनती है। एस्तेर के दृष्टांत से प्रेरणा मिलती है कि सही समय पर नीति-निर्णय और समुदाय के लिए साहसपूर्वक खड़ा होना, प्रभु के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है।
संक्षेप
4:8 में मोर्देखाई का संदेश एस्तेर के लिए एक स्पष्ट चुनौती है: राजा के समक्ष जाकर अपनी जनता के लिए विनती करना ताकि लोग सुरक्षित रहें। यह भाग प्रार्थना, बहादुरी और कर्तव्य-निष्ठा के संयोजन की याद दिलाता है—ऐसी तैयारी जो जोखिम के बावजूद उद्धार के मार्ग को सुनिश्चित करती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
यहोशू 1:9; नीतिसूत्र 3:5-6; प्रवेशद्वार के लिए प्रेरणा के अन्य संदर्भ—ये सभी यह दिखाते हैं कि संकट के समय विश्वास के साथ साहसपूर्ण कदम उठाने का महत्व है, और परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहना चाहिए।