Old Testament
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एस्तेर 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एक-एक प्रान्त में, जहाँ-जहाँ राजा की आज्ञा और नियम पहुँचा, वहाँ-वहाँ यहूदी बड़ा विलाप करने और उपवास करने और रोने पीटने लगे; वरन् बहुत से टाट पहने और राख डाले हुए पड़े रहे।
एस्तेर 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 22:4 (HINIRV) »
इस कारण मैंने कहा, “मेरी ओर से मुँह फेर लो* कि मैं बिलख-बिलखकर रोऊँ; मेरे नगर के सत्यानाश होने के शोक में मुझे शान्ति देने का यत्न मत करो।”

यशायाह 58:5 (HINIRV) »
जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूँ अर्थात् जिसमें मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ के समान झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैलाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो? (मत्ती 6:16, जक. 7:5)

यशायाह 22:12 (HINIRV) »
उस समय सेनाओं के प्रभु यहोवा ने रोने-पीटने, सिर मुड़ाने और टाट पहनने के लिये कहा था;
एस्तेर 4:3 पर टिप्पणी— संदर्भ में दृष्टिकोण
पुस्तक एस्तेर में हार्षकून के शासन के समय यहूदियों के लिए संकट बढ़ता है जब अस्वीकृत योजना के कारण उनके जीवन पर खतरा मंडराने लगता है। इस verse में सारा समाज, विशेषकर यहूदी समुदाय, राजा की आज्ञा के अनुरूप अपने पक्ष में घोर शोक और प्रकट दुख दिखाता है। एक्रेट-राज्य की गहरी सुरक्षा-हीन स्थिति में Ester के चेर-चेतावनी और मोर्देखाई के साहस के साथ यहूदियों का एकजुट होकर उपवास, रोना-पीटना और राख-के-कपड़े पहनना उनकी गहरी स्तिथि का प्रतीक है।
मूल संदेश और मुख्य विचार
यह verse यह दर्शाता है कि संकट के समय समुदाय की एकजुटता और प्रार्थना-उपवास कितनी शक्तिशाली साक्ष्य बन जाती है। यहूदियों ने भावनात्मक और शारीरिक रूप से अपने दुख को व्यक्त किया ताकि प्रभु की कृपा और उद्धार की आशा बनाए रखी जा सके। वहीं, यह धारण करता है कि सांसारिक शक्ति के सामने भी परमेश्वर के नियंत्रण पर निर्भर रहने से ही उद्धार संभव होता है।
मुख्य thèmes
अनुसंगीय क्रॉस-रेफरेंसे
1) दानिय्येल 9:3-5 — प्रतिबिंबित शक्तियों के बीच प्रार्थना और अनुवर्तन की गतिविधियाँ। छोटा व्यावहारिक पाठ यह है कि संकट के समय प्रभु के प्रति समर्पण अधिक आवश्यक रहता है।
2) जाक 5:16 — पाप-विश्वास के क्षय के समय समुदायिक प्रार्थना और विश्वास का महत्व।
3) योहन 11:41-42 — विश्वास के साथ ईश्वर की महिमा को बुलाने और उद्धार की आशा बनाए रखने की प्रेरणा।
व्यावहारिक विचार
कठिन समय में हमारी पहली प्रतिक्रिया भय और आत्म-स्व-रक्षा से हो सकती है; परंतु यह बताता है कि ईश्वर के सामने के अभय और विश्वास से ही सचमुच राहत मिलती है। यहूदियों ने उपवास और राख डाले हुए जीवन-स्थिति में प्रभु की खोज को प्राथमिकता दी, जो आज भी हमारी आध्यात्मिक व्यवस्था के लिए एक संकेत है—व्यक्ति-परक सुरक्षा से ऊपर परमेश्वर के निर्णयों की ओर झुकना।
संक्षेपण
एस्तेर 4:3 वह दृश्य है जिसमें संकट के समय यहूदियों की सामूहिक आस्था, संकल्प और प्रभु से आशा दिखाई देती है—एक पारिवारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रतिक्रिया का संयुक्त उदाहरण। यह verse यह स्पष्ट कर देता है कि हमें संकट के बीच में भी परमेश्वर के मार्ग की खोज और उसके उद्धार पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
इन विचारों के संक्षेप में, Mattew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विवरणों से मिली प्रेरणा, यह दर्शाती है कि संकट के समय आस्था की सक्रियता और समुदाय की एकजुटता ही उद्धार के मार्ग बने रहते हैं।