Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 26:17 — विलाप का गीत और नगर की नाश के अर्थ
मुख्य अभिधेय: इस वाक्य में समुद्री नगर के पतन पर विलाप की एक trauristic धारा है—यही नज़रिया प्रेरित: तबाह होने वाले नगर की सम्मिलित सजा और उसकी प्रभावी स्मृति के उजागर होने की कसौटी। यहेजकेल 26 में मल्लाहों, निवासियों और पराक्रमी नगर की पराजय के दृश्य पात्र हैं, जिन्हें आखिरकार प्रभु के फैसले के रूप में देखा गया है।
साहित्यिक संदर्भ
यह ग़ैर-आत्मकथात्मक गीत-सा भाग है जो पहले भागों में ताजगी से नगर के विगत सौंदर्य, शक्ति और समुद्री अर्थव्यवस्था का चित्रण करता है और अंत में उसका करुण विलाप दिखाता है। प्रसिद्ध टिप्पणीकार मथ्यू मार्वांह Henry, Barnes और Clarke के विवेचन इस प्रकार सहयोगी होते हैं: यह महामारी नहीं, परन्तु दैवी न्याय का संकेत है—जो नगर की समुद्री महत्ता, रिश्तों की थाम और सभी टिके रहने की आशा को ढहाता है।
केंद्रीय भावनात्मक बिंदु
विलाप का गीत संसारिक महत्त्व के पतन पर गाया गया एक दिव्य न्याय का स्मरणीय संकेत है। नगर के नाश के साथ जो भय और शोक उभरते हैं, वे यह दर्शाते हैं कि जो अपने भाग्य को अमर-स्थिर मान लेते हैं, वे परमेश्वर के निर्णय से अछूते नहीं रह सकते। यह पाठ अद्भुत रूप से हिंडोला-सा नहीं, बल्कि चेतावनी-सा है: जो खो गया, उसका मूल्य और खामोशी में गहरी सीख है।
आन्तरिक संदर्भ और थीम-सम्बन्ध
शास्त्रीय संकेत और क्रॉस-रेफरेंसेस
यहोवा के न्याय के कई संकेत इस प्रकार मिलते हैं:
reflection questions (चिन्तन के लिए)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 26:17 एक चेतावनी-गीत है जो यह दर्शाता है कि प्रभु के न्याय से चूकनाacar नहीं; परन्तु उसकी करुणा और उद्धार की संभावना भी है यदि व्यक्ति और समाज आत्म-परिवर्तन की राह अपनाते हैं। नगर के पतन के दर्द में भी ईश्वरीय दया की गूँज सुनाई देती है—जो हर पाठक को अपने जीवन की ठोस जिम्मेदारियों के साथ लौटाती है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (उद्धरण स्रोतीय नोट)
सूचना के अनुसार नीचे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दिए गए हैं; उनके विचारों की संक्षिप्त परिकल्पना ऊपर समाकलित तरीके से प्रस्तुत है। यदि चाहें तो मैं उनके अनुच्छेद-रेखा से संक्षिप्त अभिलेखीय अंश उद्धृत कर सकता/सकती हूँ।