Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 26:12 —Immediate Setting
यह उद्धरण उस समय के आघातकारी भविष्यवाणी का भाग है quando बेबीलोनिया के आक्रमण का संकेत मिल रहा था। यहेजकेल को ईश्वरीय संदेश मिला कि नॉकरीय नगरों की ध्वनियाँ उधर की विनाश की ओर ले जाएँगी—नगर-घोड़ों के जुए, धन‑लूट, व्यापार-वस्तुएँ छीनी जाएँगीं और नगर का ढांचा एक बार फिर से प्यासे मृत्त-भवनों के रूप में ढह जाएगा। यह मोहभंग और न्याय का संतुलन दोनों प्रस्तुत करता है, जहां पाप के परिणाम स्वरूप मानव-सत्ता हिला दी जाती है।
कहानी से क्या कहता है—ईश्वर का नयाय और विश्वास
यह शब्द बताते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों के विरुद्ध न केवल दंड देते हैं, बल्कि उन शक्तियों के आधार पर भी जो अन्य के अधीन होकर रहते हैं—वे एक प्रकार से धर्म और आशा के संस्थान होते हैं। यह संदेश यह भी सिखाता है कि सांसारिक समृद्धि और शक्ति स्थायी नहीं—उन्हें समय की धार में डूब जाना पड़ता है जब लोग अपने मन में ईश्वर के नियमों से मुकरते हैं।
मुख्य शब्दों और छवियों की व्याख्या
संबंधित पदों के संकेत
यहोशू-यातना और निर्गमन के भागों में भी पराधीनता के समय परमेश्वर की न्याय-सत्ता को समझाने वाले अंश मिलते हैं, जैसे कि देव-प्रकाश के आधार पर अत्याचार का नाश और विश्वास के लिए उद्धार के मूल्य। साथ ही, यहेजकेल के संदेश में पुनःस्थापन के पूर्व संकेत मिलते हैं कि गिरे हुए नगरों में भी आशा की किरण अभी भी है।
संयुक्त संदर्भों के संकेत: दानिएल की असहाय विजयों में देव-न्याय का प्रमाण, यिर्मयाह के दुष्कर पथ के विरुद्ध ईश्वर की सुध।
उचित क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थ
- क्रॉस-रेफरेंस 1: सत्ता के शोभा के प्रति चेतावनी — एक स्मरण कि विश्वसनीय सुरक्षा परमेश्वर पर निर्भर है।
- क्रॉस-रेफरेंस 2: शहरों की स्थिति के बार-बार आघात—लोक-नीति और संरचना के क्षय पर ध्यान दें।
- क्रॉस-रेफरेंस 3: आस्था के पुनर्निर्माण की प्रेरणा—उद्धारक ईश्वर की नीति और कृपा से जुड़ना।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
1) आस्थाओं की मजबूती के लिए: जब जीवन के आर्थिक या सामाजिक क्षेत्र चुनौतियों से घिर जाएँ, तब परमेश्वर के नियमों की स्थिरता को याद रखें।
2) विनाश के समय में आशा बनाये रखना: भौतिक संपत्ति के खोने पर भी ईश्वर की क़ानून-निर्भरता पर विश्वास बनाये रखें; वह हमारी सुरक्षा का ढाँचा है।
3) समुदाय की सुरक्षा के लिये: आपसी सहयोग और शांति-प्रतिष्ठा को मजबूत करें—क्योंकि अविश्वास और दुष्ट मार्ग से बचना ही दीर्घकालिक शांति का मार्ग है।
संक्षिप्त एकीकृत विश्लेषण
यह प्रकाश डालता है कि निष्काम और विफल जीवन के परिणाम क्यों होते हैं और कैसे ईश्वर न्याय के साथ-साथ कृपा भी करता है। कुरुवत्ति के समय में भी विश्वास की राह न चुकाने पर उद्धार संभव रहता है।
युक्त उद्धरण (कथन-युक्त):Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke से प्रत्यक्ष छोटे उद्धरण उपलब्ध होने पर केवल उन्हीं के सत्य अंश उद्धृत होंगे।