Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 27:14—दत्त एकांत में धरोहर और सामर्थ्य
मुख्य interpretive point: धरोहरों की यह सूची समुद्री-व्यापार और प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में गढ़ी गई है; तोगर्मा के घराने के लोगों ने तेरी संपत्ति लेकर तेज़ घोड़ों, सवारी के घोड़ों और खच्चरों को देकर अपनी शक्तिपरक, वैश्विक व्यापार-परम्परा में स्थिति स्थिर करने का प्रयास किया। यह चेतावनी है कि सुरक्षा और मूल्य-सम्पदा के जालों के पीछे आध्यात्मिक निर्भरता ईश्वर के अनुसार नहीं, बल्कि सांसारिक सामर्थ्य पर है। यहोवा के तरीकों को न अपनाकर, मूर्त संपदा के लिए प्रेम रखने की परिणामस्वरूप गणना और विनिमय में अति-विश्वास किया गया।
साहित्यिक संदर्भ
यह पंक्ति नायु-व्यापार और राजनीतिक सौदेबाजी को दर्शाती है जब नबी यहेज़्केल यहोवा के अकथित-दर्शक प्रसंगों के क्रम में बिखरे हुए शहरों और शासकों की क्रिया-विशेषताएं बताता है। तुगर्मा (उल्लेखित घराने) के सदस्य, जो व्यापारिक और आर्थिक शक्तियों से जुड़े थे, ने अपनी संपत्ति से लाभ उठाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयत्न किया। यह दृश्य यह दर्शाता है कि किस प्रकार सांसारिक संपत्ति और राजधानी-आत्मविश्वास आध्यात्मिक अक्षमता बन जाते हैं।
भगवद् उद्देश्य और सिद्धांतगत संदेश
यह संदेश तीन आयामों में स्पष्ट होता है:
Cross-reference विचार
कई अन्य भागों में संचयी शक्ति, संपदा और भरोसे की चेतावनी मिलती है:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि संपदा का उपयोग किस दृष्टिकोण से होता है—क्या यह ईश्वर-आज्ञा की पूर्ति में है या सांसारिक गौरव के लिए?
विचारयोग्य प्रश्न
1) क्या मैं अपने वातावरण में संपत्ति के लिए इतनी लगन दे रहा हूँ कि परमेश्वर के साथ संबंध कमजोर पड़ जाए? 2) क्या मेरी योजना और निर्णय ईश्वर के मार्गदर्शन पर आधारित हैं, या मेरे बैंक खाते/सामाजिक स्थिति पर? 3) कैसे मैं धन के साथ ईश्वर की सेवा को संतुलित कर सकता हूँ?
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहोवा के संदेश में यहूदियों के लिए एक चेतावनी है कि संपत्ति और शक्ति कभी-कभी आत्म-गौरव और सांसारिक मान-प्रतिष्ठा के साधन बन जाते हैं। परमेश्वर के सामने हमारा लक्ष्य कुल-समर्पित विश्वास और ईश्वर-योजना के अनुसार जीवन जीना होना चाहिए, न कि सम्पत्ति के गड्ढों में फँसना। तोगर्मा के घराने के लिए यह एक शिक्षाप्रसंग भी है—सत्ता और संपत्ति के आश्रय से बाहर आकर, परमेश्वर की कृपा में स्थिर रहने की जरूरत है।
पूर्व-महत्त्वपूर्ण उद्धरण संकेत: मथ्यू चैप्टर Henry, Barnes, Adam Clarke से बिल्कुल उद्धृत नहीं किया गया है, पर उनकी विचार-शैली और व्याख्या से प्रेरित सामान्य निष्कर्ष सम्मिलित है।