Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 27:25 के immediate सेटिंग और उसका अर्थ
यह दर्शनकथा एक वक्तव्य के साथ चलते हैं जिसमें तर्शीश के जहाज व्यापारी माल लेकर आते हैं। शास्त्र कहते हैं कि तेरे व्यापार के माल के ढोनेवाले तू समुद्र के बीच रहकर धनवान और प्रतापी हो गई थी। यहाँ जहाज, व्यापार और समुद्री मार्गों के माध्यम से एक नगर या साम्राज्य की आर्थिक शक्तिशाली स्थिति का चित्र उभरता है। यह का उद्देश्य यह दिखाना है कि यह विश्वास-आधारित साम्राज्य किस प्रकार बाह्य संपदा और सामर्थ्य से बनता है, और किस प्रकार उसकी निर्भरता परमेश्वर के विरुद्ध हो सकती है।
ईश्वर की रोशनी में यह टेक्स्ट क्या बताता है
यह प्रसंग दिखलाता है कि आर्थिक सफलता कभी-कभी यह संकेत दे सकती है कि लोग अपनी महिमा को ऊपर कर लेते हैं और स्वयं को सुरक्षित समझ लेते हैं। पर यह भी स्पष्ट है कि यह प्रभु की स्वतंत्र योजना के अधीन है—जहाजों की ताकत, धन, और प्रताप अंततः Tuhan के पास नज़र आते हैं। सिद्धान्ततः, परमेश्वर की निगाह में वास्तविक संपदा और अधिकार उसकी इच्छा और आशीर्वाद से जुड़ते हैं, न कि केवल कारोबार के चक्र और समुद्री रास्तों से।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अनुस musikalिक संदर्भ
प्रभु के विरुद्ध आत्म-निर्भरता और सम्पत्ति-परक सुरक्षा के खतरे को खुले आह्वान के रूप में समझना चाहिए। अन्य passages जो इस धारणा को उजागर करते हैं उनमें से: - यहीएशा 30:15, where शांति और सुरक्षा के संकेत तौलबद्ध होते हैं; - दानियाल 4:25, जहाँ महिमा और सत्ता केवल अल्लाह के निर्देश से मिलती है; - हबकुक 2:9-10, जहाँ धन-संपत्ति पर अति निर्भरता नैतिक पतन की चेतावनी है।
पवित्रशास्त्र के अन्य संदर्भ के साथ संयोग
यह भाग यह दर्शाता है कि सार्वजनिक शक्ति और आर्थिकी कितनी भी विशाल हों, परमेश्वर उनके स्रोत और नियंत्रण को बनाये रखता है। पूर्वी-आधारित संदेश यह है कि धन और सामर्थ्य का वास्तविक मूल्य परमेश्वर के विश्वास और प्रतिज्ञा पर निर्भर है।
आज के लिए प्रयोग
संदर्भ-वाक्य
यहाँ उद्धृत नहीं किए गए पूर्ण ग्रंथ चौकसी से देखे जा सकते हैं; परन्तु यह विचारधारा नीचे के क्रॉस-रेफरेंसेज़ से अंतःसंबंध रखते हैं:
1) ईश्वरीय मालिकाना: नीतिवचन 10:22; 1 तीमथियुस 6:17— धन का स्रोत परमेश्वर है; 2) सुरक्षा बनाम परमेश्वर-आशीष: यिर्मयाह 17:7-8; 3) प्रभु के अधीन संचालित सामर्थ्य: याकूब 1:17; यह संकेत देता है कि सत्य जीवन में निरंतर आशीष परमेश्वर के कारण आती है, न कि केवल सांसारिक सफलता से।
उद्धरण आवश्यक होने पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचार उनके अनुसार सहज रूप में मिलते हैं।
मैथ्यू हेनरी (प्रकाशित टिप्पणियाँ) के अनुसार, यह संदेश है कि जो धन-सम्पत्ति से अपने आप को ऊपर नहीं उठाते, वे निग्रह और आशीर्वाद में स्थिर रहते हैं; और ऐतिहासिक संदर्भ में यह यहूदी राज्य की सांसारिक महिमा की चेतावनी है।
एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार, व्यापारी सफलता अक्सर आत्म-गौरव और निर्भरता की कमी को बढ़ाती है; पर परमेश्वर की योजना में यह सब चढ़ाव एक चेतावनी के रूप में आता है कि धन और शक्ति केवल परमेश्वर के आदेश के अनुरूप उपयोग किये जाएँ।
एडम क्लार्क के अनुसार, यह संदेश यह है कि समुद्री मार्गों से प्राप्त धन एक अस्थायी उपहार है, जो परमेश्वर के प्रशासन के अधीन है; अतः ईमानदारी और आत्म-नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है।
निष्कर्षतः, यह नजारा हमें याद दिलाता है कि वास्तविक सुरक्षा और सम्मान परमेश्वर के संरक्षण और वचन में है—न कि केवल आर्थिक समृद्धि में।