Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 28:1 यहेजकेल 28:2 यहेजकेल 28:3 यहेजकेल 28:4 यहेजकेल 28:5 यहेजकेल 28:6 यहेजकेल 28:7 यहेजकेल 28:8 यहेजकेल 28:9 यहेजकेल 28:10 यहेजकेल 28:11 यहेजकेल 28:12 यहेजकेल 28:13 यहेजकेल 28:14 यहेजकेल 28:15 यहेजकेल 28:16 यहेजकेल 28:17 यहेजकेल 28:18 यहेजकेल 28:19 यहेजकेल 28:20 यहेजकेल 28:21 यहेजकेल 28:22 यहेजकेल 28:23 यहेजकेल 28:24 यहेजकेल 28:25 यहेजकेल 28:26



यहोवा की धमकी का वास्तविक अर्थ (यहेजकेल 28:23)
सीधे शब्दों में कहें तो यहोवा कहते हैं: मैं उसे मरी विस्तार दूँगा, उसकी सड़कों में लहू बहाऊँगा, चारों ओर तलवार चलेगी, और घायल होकर गिरेंगे तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। यहाँ "मेरे विरुद्ध" की चेतावनी नहीं, बल्कि उसकी आत्मिक और नैतिक निराशा के कारणों की समीक्षा है: यह चेतावनी है कि अविश्वास, अत्याचार, और पाप के परिणाम उसे तकलीफ देंगे, ताकि लोग यह समझ सकें कि वह परमेश्वर है।
परिप्रेक्ष्यगत पृष्ठ भूमि
यहेजकेल की किताब में यहाजकी नबियों का संदेश बाबुल के निर्गमन के बाद का है। यहाँ यहूदियों को ऐतिहासिक विपत्ति के समय ईश्वर का न्याय और संरक्षण दोनों का स्मरण करवाया गया है। यह प्रकरण यहूदियों को यह सिखाता है कि पाप के परिणाम विराट होते हैं, परन्तु प्रभु की सच्चाई और सीमा-रेखा भी स्पष्ट होकर सामने आती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संयोजनात्मक विचार (Theme in brief)
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यशायाह 13:9–11: निश्चित समय पर परमेश्वर के न्याय की धारणा और दया का संयुक्त दृश्य। यह दिखाता है कि संकट के माध्यम से लोगों को सही मार्ग पर लाने की परमेश्वर की प्रेरणा रहती है।
2) यहहुआ 4:24-25: आस्था में और आचरण में स्पष्ट परिवर्तन की आवश्यक्ता पर बल देता है—पाप के कारण भय नहीं, बल्कि परिवर्तन की आवश्यकता है।
3) रोमियों 11:33-36: परमेश्वर की बुद्धि और मार्ग अनंत है; उनके न्याय अद्भुत और गहन हैं, जिससे मानव समझ से परे भी उसके कर्म स्पष्ट होते हैं।
संक्षिप्त अनुप्रयोग
यह संदेश हमें याद दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की सत्ता स्थिर है। अगर समाज या व्यक्ति पाप के रास्ते पर चलता है, तो सामाजिक और आंतरिक दोनों तरह के संकट उभरते हैं, और इन से सीख लेकर नीति में बदला संभव है। साथ ही, विपत्तियों के बीच भी ईश्वर की महिमा और प्रभुत्व की अनुभूति बनी रहे, ताकि लोग यह जानें कि यहोवा सच में एक देवता हैं।
टेकअवे
नोट: इस पवित्र पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से मिलते-जुलते प्रकाशनों के सार्वजनिक-domain सार-संकेतन से हमने संतुलित संकेत जोड़े हैं। उपलब्ध उद्धरण इनमें से छोटे, सन्निकट रूप में शामिल हैं, यदि वे मिलें तो दर्ज किए गए हैं।