Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 28:15 का संदेश: निर्दोष चालचलन और परमसत्ता के उद्घोष
मुख्य interpretable बिंदु: यह आयत जिस दिन तू सिरजा गया और जिस दिन तक तुझमें कुटिलता नहीं पाई गई, उस समय तक तू अपनी सारी चालचलन में निर्दोष रहा—यहाँ परमेश्वर के दर्शन में निर्दोषता और अपराध की गहराई स्पष्ट होती है, परन्तु व्यवहारिक रूप से यह उद्धरण शाश्वत प्रभु के क्षमा और निर्णय की धारा को साथ लेकर चलता है। यह चेतावनी नहीं कि इंसान सदा निर्दोष रहे, बल्कि यह दर्शाता है कि परमेश्वर की ज्ञान-चेष्टा में कुछ दायरे ऐसे हैं जहाँ स्त्री-पुरुष की व्यवहार-चाल उनसे बंधी नहीं जाती।)
पाठ्यपृष्ठीय संदर्भ (साहित्यिक संदर्भ)
यह शिक्षा यहूदियों के इतिहास-परिप्रेक्ष्य में है—राजा और शासक के प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित एक निवारण-आह्वान जहाँ पारदर्शिता, सचाई, और व्यवस्था के अनुरूप चलना सबसे ऊपर है। यहेजकेल पवित्र स्थल के प्रवास के समय की किताब है जिसमें अलग-अलग दृष्टांत और दया की खबरें एक साथ मिलती हैं। यहाँ के कथ्य में यह बतलाया गया है कि सिरजा गया शख्स भी एक समय निर्दोष हो सकता है, परन्तु यह सत्यकथा ईश्वर के पूर्ण-ज्ञान के सामने अस्थिर नहीं है।
केवल्त्विक theological significance
यह आयत मूल रूप से आशीर्वचन के साथ जुड़ा है—परमेश्वर की दृष्टि में “निर्दोषता” की स्थिति एक विशेष समय-सीमा के भीतर मानी जा सकती है, परन्तु मानव व्यवहार की सतह पर यह निष्कर्षलाभ नहीं है कि वह कभी दोषरहित रहा। परमेश्वर की चेष्टा में वह समय एक संकेत देता है जब तेरा असंयम, छल या पाप नहीं था, परन्तु यह भी संकेत देता है कि ईश्वर के सामने दीर्घकालीन न्याय की चाहत है।
प्रमुख cross-reference (संक्षिप्त विश्लेषण)
पुनः विश्लेषण के प्रश्न
एक संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 28:15 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की दृष्टि में “निर्दोषता” का विशेष समय-सीमा हो सकता है, पर मानव-चरित्र में स्थायी रूप से पाप-चाल नहीं चले तो भी हमारा जीवन ईश्वर के अनुसार जनित सत्य और प्रेम के साथ व्यवस्थित होना चाहिए। यह आयत विश्वासयोग्य-व्यक्ति के लिए एक चेतावनी भी है कि बाहरी दृश्यों पर नहीं, भीतर के ईमानदार हलचल पर निगाह रखी जाए।
एजेंसी उद्धरण (महत्वपूर्ण उद्धरण)
मैथ्यू हैनरी, अल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क से सम्मिलित संकल्पित सार उनके क्लासिक टिप्पणियों में मिलता है; नीचे दो-तीन शब्दात्मक अंशों का प्रयोग केवल संदर्भ के रूप में दिया गया है:
“निर्दोष रहा”—यह कथन एक विशेष परिस्थिति में परमेश्वर की नज़र से देखा गया आचरण संकेत है; यह उद्धरण व्यापक पवित्र-चेतना के साथ जुड़ा है।
नोट
यह टिप्पणी सार्वजनिक-डोमेन विचारों पर आधारित है और भीतर के ईमानदार अध्ययन को प्रेरित करने के लिए है। किसी भी विशिष्ट doctrinal व्याख्या के बजाय, पाठ के शब्द-আर्थ और संदर्भ पर टिके रहने का प्रयास किया गया है।