उत्पत्ति 1:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर परमेश्‍वर ने कहा, “हम मनुष्य* को अपने स्वरूप के अनुसार* अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।” (याकू. 3:9)

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उत्पत्ति 1:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 1:26 पर टिप्पणी — परमेश्वर की छवि में मनुष्य की बनावट

संक्षिप्त परिचय

उत्पत्ति 1:26 में परमेश्वर के स्वरूप और समानता में मनुष्य को बनाये जाने की महत्वपूर्ण घोषणा है। यह वाक्य मानव का मूल उद्देश्य, अधिकार और दायित्व निर्धारित करता है। परमेश्वर ने मानव को अन्य सृष्यों की तुलना में अलग माना और उसे सृष्टि के लिए प्रतिनिधि रूप दिया ताकि वह पृथ्वी के सभीijo में न्याय और व्यवस्था स्थापित करे।

पद का पाठ और संदर्भ

“फिर परमेश्वर ने कहा, ‘हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।’”

मुख्य बिंदु

  • मनुष्य को परमेश्वर के स्वरूप के मुताबिक बनाना—आत्म-समानता, मानसिक व नैतिक क्षमताओं की प्रतिष्ठा।
  • मानव के लिए पृथ्वी पर अधिकार और जिम्मेदारी—प्रकृति की व्यवस्था, सेवक-शासन और देखरेख का दायित्व।

चर्चनात्मक व्याख्या (चयनित आध्यात्मिक पाठ से संबंधित विचार)

यह आयत बताती है कि मनुष्य एक विशेष दायित्व के साथ लिया गया है—न केवल जीवित बनना, बल्कि परमेश्वर के समानता में जीना और उसकी महिमा को प्रकट करना। यह बराबरी और दायित्व दोनो का संदेश देता है: मनुष्य की गरिमा बिना किसी भेदभाव के है, पर उसे सृष्टि के प्रबंधन में उत्तरदायिता भी दी गई है।

कथन-जल्दबाजी नहीं, पर ब्योरे के साथ

ये संदेश 1:26 के नीचे याकूब 3:9 जैसा cross-reference देता है कि हम किस प्रकार दूसरों के बारे में बोलते हैं—हम मानवीय गरिमा के साथ व्यवहार करें, न कि अधर्मी-भेदभाव से।

पवित्रशास्त्रीय तुलना—अनुछेदित गहराई

• मत्ती 5-7 के आरंभिक उपदेशों में परमेश्वर की कृपा और मनुष्य की आंतरिक नैतिकता की आवश्यकता स्पष्ट होती है—शासन के साथ आंतरिक परिवर्तन भी आवश्यक।

• डेब्यू-रचना में पृथ्वी की वयवस्था के बारे में परमेश्वर के आदेश—हर प्राणी का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मनुष्य की भूमिका एक दूसरे के साथ जुड़ी है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • हमारी गरिमा: हर इंसान की सम्मानपूर्वक सराहना करें, भेदभाव और आक्षेप से बचें।
  • हमारा दायित्व: प्रकृति की देखभाल करें, पृथ्वी के संसाधनों को टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करें, और समाज में न्याय के लिए सचेत रहें।
  • रिश्ता-निर्माण: एक-दूसरे के साथ समान व्यवहार, प्रेम और करुणा दिखाएं, ताकि परमेश्वर की समानता की बात जीवन में उभरे।

3-4 बिंदुओं का संक्षेप (सार)

  1. मानव का मूल उद्देश्य परमेश्वर के स्वरूप में बनना है।
  2. हमारे पास पृथ्वी पर अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं—समझदारी से शासन करें।
  3. याकूब 3:9 के प्रमाण में, मानव-आचरण में भेदभाव निषेध है; सभी को सम्मान दें।
  4. व्यावहारिक जीवन में गरिमा, करुणा और जिम्मेदारी एक साथ निभाएं।

क्रॉस-रेफरंस का छोटा नोट

1) गलत अभिमान बनाम गरिमा: हर मानव के भीतर परमेश्वर की उपस्थिति की पुष्टि करता है; दूसरे के सम्मान में कमी न करें।

2) न्याय एवं देखभाल: पृथ्वी-प्राणी के प्रति दया और सुरक्षा के कदम उठाएं।

3) आचरण-परिवर्तन: आंतरिक परिवर्तन से बाहरी व्यवहार सुधरे, ताकि मानव की प्रबंधक-की भूमिका सार्थक हो सके।

संक्षेप निष्कर्ष

उत्पत्ति 1:26 एक मजबूत दार्शनिक-आध्यात्मिक संदेश देता है: मानव का निर्माण परमेश्वर के स्वरूप के अनुसार हुआ है, जिसका प्रभाव उसकी गरिमा, अधिकार और दायित्व पर पड़ता है। यह दिखाता है कि कैसे उचित आचरण और देखरेख से संसार की व्यवस्था के लिए हम कर्तव्य-निष्ठ बनते हैं।

महत्वपूर्ण नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट पंक्तियों के संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हों तो उसी के अनुरूप उल्लेख किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 1:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इफिसियों 4:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
इफिसियों 4:24 (HINIRV) »
और नये मनुष्यत्व को पहन लो, जो परमेश्‍वर के अनुसार सत्य की धार्मिकता, और पवित्रता में सृजा गया है। (कुलु. 3:10, 2 कुरि. 5:17)

कुलुस्सियों 3:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
कुलुस्सियों 3:10 (HINIRV) »
और नये मनुष्यत्व को पहन लिया है जो अपने सृजनहार के स्वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।

भजन संहिता 8:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 8:4 (HINIRV) »
तो फिर मनुष्य क्या है* कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?

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