Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 1:31 — ठहराव और समापन की बेटी की बात
प्रथम अध्याय के आखिरी भाग में, दिन-प्रतिदिन की रचना-योजना के क्रम में, परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, उसे देखने के लिए एक क्षण ठहरते हैं। यह verse बताता है कि परमेश्वर ने हर चीज को देखा—जो कुछ भी निर्मित हुआ, उसके समस्त पहलुओं को समझ लिया गया—और पाया कि वह "बहुत ही अच्छा" है। इसके साथ ही दिन-रात्रि के चक्र के अंतिम भाग पर “भोर” और “शाम” का क्रम पूरा होता है, जिससे रचना का क्रम एक संतुष्ट और पूर्ण उद्देश्य की ओर अग्रसर होता है।
ईश्वर के बारे में पाठ से निकलने वाले संदेश
1) परमेश्वर की पूर्ण योजना और ठहराव: हर दिन की रचना के पलों में ईश्वर अपने कार्य को "देख" कर संतुष्ट होते हैं। यह दर्शाता है कि रचना एक सुव्यवस्थित, लक्ष्य-प्रधान, और सामंजस्यपूर्ण योजना का परिणाम है, न कि अकारण संघर्ष का पश्चात्ताप।
2) विश्वास और आस्था की दृष्टि: “बहुत ही अच्छा” कहना केवल वस्तुओं की सुंदरता नहीं है, बल्कि परमेश्वर के अंतर्निहित मानक का प्रतीक है—जो कुछ भी ईश्वर की योजना के अनुसार बनता है, वह नैतिक और आध्यात्मिक मानक पर भी उत्तम है।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और चित्र
अनुबंधित बातें: अन्य पाठ से संबद्ध संकेत
• 1 पतरस 4:10-11; ईश्वर के दिए उपहारों पर विश्वास के साथ उनकी महिमा को बांटना।
• रोमियों 12:2; नई सोच और प्रकृति-परिवर्तन, ताकि जीवन में परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बदलाव आये।
• कोलुसियों 1:16-17; वह सब कुछ जो होता है, वह क्रिएशन के कारण और मध्यम से है—समय की रचना की स्थिरता में ईश्वर की सच्चाई बनती है।
बाइबल के कुछ स्पष्ट उद्धरण से सहारा (फुटनोट शैली, केवल छोटा-सा अंश)
उल्लेखनीय पाठ-आधार: Matthew Henry और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन व्याख्यात्मक नोट्स में प्रमुख विचार आते हैं कि रचना का क्रम और पूर्णता ईश्वर की महिमा के दृढ़ प्रमाण हैं।
आज के संदर्भ में व्यावहारिक आवेदन