उत्पत्ति 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और परमेश्‍वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।

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उत्पत्ति 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

प्रथम दिवस और आकाश का विभाजन — उत्पत्ति 1:8 का अर्थ

परमेश्वर ने पृथ्वी के पहले चरण के क्रम में आकाश को “आकाश” कहा, और सांझ-भोर के मानक चक्र के साथ दूसरा दिन शुरू हुआ। इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर ने सृष्टि को क्रमबद्ध करने के लिए समय के माप को स्थापित किया, ताकि हर दिन के साथ एक नई भौतिक और निर्जीव-जगह में विभेद उभरे।

परिप्रेक्ष्य और पृष्ठभूमि

यह अध्याय सृजन के आरम्भ का भाग है। पहले दिन परमेश्वर ने पहली रौशनी पैदा की, और दूसरे दिन आकाश-भूमि के विभाजन के क्रम में “आकाश” की स्थापना की। यह क्रम बताता है कि परमेश्वर की योजना संगत और क्रमबद्ध है, प्रकृति की संरचना एक लक्षित उद्देश्य के साथ बनती है।

व्याख्यात्मक संकेत

- “उस अन्तर को आकाश कहा” — यहाँ आकाश का उल्लेख भू-स्थल और उसके ऊपर फैले विभाग के रूप में है। यह विभाजन दर्शाता है कि प्रकृति को अलग-अलग भागों में संरचना दी गई है, ताकि वर्षा, आकाशीय चिह्न और समय का नियोजन संभव हो सके।

- “तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ” — दिन-रात के चक्र का आरम्भ। धार्मिक साहित्य में यह चक्र सदा नए दिन की उम्मीद और नए कार्य की संभावना का प्रतीक माना गया है।

- “इस प्रकार दूसरा दिन हो गया” — दिन-क्रम का स्थायित्व, ताकि सृष्टि के सभी भाग एक संगत क्रम में विकसित हों।

महत्वपूर्ण विचार

  • परमेश्वर की सृष्टि-निर्माण में क्रम का महत्व: हर दिन एक निर्धारित कार्यसार को सम्मिलित करता है।
  • आकाश-भूमि का विभाजन: पवित्र व्यवस्थापक प्रभु के अनुसार वातावरण की संरचना—आकाश, जल-परतें, भूमि आदि—आकार लेती हैं।

संयुक्त Cross-reference (संक्षिप्त समझ के साथ)

- उत्पत्ति 1:1–2: “आदि…” का आरम्भात्मक संदर्भ—सृष्टि की शुरुआत और परमेश्वर के आदेश का स्वरूप। यह verses इस दिन-क्रम निर्माण के साथ गूंजते हैं।

- भजन 19:2–4 — आकाशों में परमेश्वर की कलाकारी का दृश्य, जो हर दिन और हर रात आवाज देती है; यह आकाश-प्रकाश के क्रम का महत्त्व बताता है।

- यशायाह 45:18 — परमेश्वर ने पृथ्वी को व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि वह उसे स्थिर बनाने के लिए बनाया गया है; विभाजन से संबन्धित रचनात्मक उद्देश्य स्पष्ट होता है।

कथनात्मक निष्कर्ष

यह छोटी-सी पाठिका दिखाती है कि परमेश्वर की रचना क्रमबद्ध है और हर दिन एक नई उपलब्धि के साथ आरम्भ होता है। हमारे लिए यह विश्वास देता है कि परमेश्वर का योजना-कामना व्यवस्थित और पूर्ण है, और समय की हर वृत्ति में उसकी योजना के अनुरूप एक उद्देश्य है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और परमेश्‍वर ने उजियाले को दिन और अंधियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहला दिन हो गया।

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तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।

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तब परमेश्‍वर ने जो कुछ बनाया था, सबको देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवाँ दिन हो गया। (1 तीमु. 4:4)

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