उत्पत्ति 1:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पाँचवाँ दिन हो गया।

पिछला पद
« उत्पत्ति 1:22

उत्पत्ति 1:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

उत्पत्ति 1:23 का यह वचन परमेशवार रचना-कार्य के एक चरण का दृश्य प्रस्तुत करता है— creador ने दिन के सातवें हिस्से की ओर एक क्रमबद्ध सूची में पाँचवां दिन समाप्त किया। वाक्य “तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ” एक साक्ष्य है कि परमेश्वर का क्रमशः उठना-संभव बनना और दिन-रात का चक्र लगातार चलता है। इस पाठ में शांति, व्यवस्था और रचना-कार्य की पराकाष्ठा का संकेत मिलता है, जो हर दिन के साथ आगे बढ़ती है। यह न केवल भौतिक निर्माण की पुष्टि है, बल्कि परमेश्वर के सफलता-स्तर, विधान और समय-निर्धारण की साक्ष्य-भावना को भी उभारता है।

verses in context of the chapter

अध्याय 1 पूरी रचना के क्रम को 7 दिन के क्रम में प्रस्तुत करता है: शब्दों की रोशनी, आकाश-जल-भूमि, जल-जीव, पृथ्वी-आकृति आदि। पंक्ति “तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ” बार-बार दिन-क्रम की समाप्ति की पहचान कराती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हर दिन का आरम्भ और अंत परमेश्वर की सुस्पष्ट योजना से जुड़ा है। पाँचवाँ दिन यह संकेत देता है कि आकाशगंगाओं के नीचे के जल-जीव और समुद्री जीवन की व्यवस्था धीरे-धीरे स्थापित हो रही है, जो दूसरे दिन बन रही संरचना का एक भाग है।

main spiritual lesson

इस वचन से प्रमुख शिक्षा है—परमेश्वर के कार्य में क्रम और समय की सुनिश्चितता। हर दिन एक सुरक्षित क्रम में आता है, और हर अंतराल एक उद्देश्य पूरा करता है। believrako यह स्मरण रहता है कि हमारी यह दुनिया भी परमेश्वर के नियोजन के अधीन है; हमारे जीवन के छोटे तथा बड़े चरण भी उसकी योजना के भाग हैं। जब हम दिन-प्रतिदिन अस्त-व्यस्तता से गुजरते हैं, तब भी परमेश्वर की व्यवस्था हमारे लिए स्थिर और भरोसेमंद है।

comparison with related biblical passages

- रचना के आरंभ में “आदि” के साथ प्रकाश-स्थिति को स्थापित करना—यही क्रम यहाँ बारंबार मिलता है। (उत्पत्ति 1:3-5 के साथ तुलना)
- प्रेषितों के लेखन में भी दिन-चक्र की व्यवस्था को जीवन-उपलब्धि और भलाई के संदर्भ में देखा गया है। (यहोशू 1:8; भजन 90:12)
- यीशु के प्रेरित जीवन में समय-योजना और प्रयोजन की दृष्टि है, जिसमें हर परिस्थिति परमेश्वर की योजना का हिस्सा है। (मरकुस 4:26-29)

cross-references with brief explanations

  • भजन 104:10-14 — परमेश्वर की रचना-नियोजन और साधन की व्यवस्था का चिह्न दिन-प्रतिदिन दिखाई देता है। यह दिन-रात्रि चक्र की स्थिरता की संकेतक है।
  • योहन्ना 1:3 — सब कुछ वही से बना, और वही समय-सारिणी तय करता है; रचना के क्रम का स्रोत वही है।
  • प्रेरितउपदेश 3:11-12 — परमेश्वर के कार्यों की गहराई और समय-सारिणी पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है।

brief application

- अपने दैनिक दैनंदिन में क्रम और नियोजन को अहमियत दें; हर दिन का छोटा-सा कार्य भी परमेश्वर के बड़े उद्देश्य से जुड़ा है।

- चिंता के समय में याद रखें कि परमेश्वर की व्यवस्था चिरस्थायी है; उसकी रोशनी में आप अपने जीवन के कदम स्पष्ट पाते हैं।

summary

उत्पत्ति 1:23 बताता है कि रचना का एक और दिन समाप्त हुआ—भोर और सांझ के बीच—जो क्रमबद्ध योजना के अनुरूप है। यह पाठ यह स्मरण देता है कि जहाँ हम सांस लेते हैं, वहां परमेश्वर के योजना-क्रम की निरंतरता है। हर दिन एक नया भाग है: वह भगवान जिसने अचरज से भरी रचना को स्थिरता दी, वही हमारी जिंदगी के लिए भी स्वच्छ, शांत और उद्देश्ययुक्त मार्ग बनाते हैं।

यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकीर्ण दायरे की प्रत्यक्ष उद्धरण-रेखा नहीं है, पर उनके विचारों के समान भावना को समाहित करती है: क्रम, योजना और परमेश्वर की पूर्ण न्याय-निष्ठा पर आधारित व्याख्या।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 1:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

इस बाइबल अंश से संबंधित समानांतर वचन चित्र अभी उपलब्ध नहीं हैं।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें