उत्पत्ति 1:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और परमेश्‍वर ने उनको आशीष दी; और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुंद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो।”

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उत्पत्ति 1:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 1:28 पर विचार: प्रकृति के साथ मानवीय अधिकार और उत्तरदायित्व का आरम्भ

यह वाक्य परमेश्वर की आशीष से शुरू होकर मनुष्य को पृथ्वी पर उसके सृजन के उद्देश्य की दिशा दिखाता है। यह संदेश केवल सत्ता के अधिकार की बात नहीं, बल्कि पृथ्वी के सतत पालन-पोषण और जिम्मेदार stewardship की शुरुआत है। क्योंकि परमेश्वर ने कहा कि वे फलें-फूलें, भर जाएं, और जो कुछ भी आकाश-समुद्र-स्थल पर है, उन सब पर उनका अधिकार हो—यह संकेत देता है कि मानवता को प्रकृति के साथ सहभागी बनना है, न कि प्रकृति पर अतिक्रमण करना।

उसका मूल संदर्भ

भूमि-जन्म के अध्याय 1 में संपूर्ण स्रष्टि की रचना के क्रम में यह उद्घोषना आती है कि परमेश्वर ने创造 किया, फिर आशीष दी और लोगों को दायित्व सौंपा। यह दायित्व परमेश्वर की भोमिक योजना का पहला चरण है: एक परिवार बनाना, जो उसकी महिमा के लिए जीवंत प्राणी बनकर दुनियाभर में कार्य करें। इस संदर्भ में 'आशीष' एक प्रेरणा है—क्योंकि आशीष के साथ-साथ दिशा-निर्देश और संसार के प्रति एक सही रवैया आता है।

मुख्य संदेश

  • ग्रहणीय अधिकार और जिम्मेदारी: मनुष्यों को पृथ्वी और उसके प्राणियों पर अधिकार है, पर यह अधिकार दयालुता और पालन-पोषण के साथ जुड़ा है।
  • हर प्रकार की वृद्धि का आह्वान: फलों, फूलों, जल-जीवन, आकाश-चिह्न—सब कुछ में वृद्धि होकर एक जीवंत सामाजिक-पर्यावरणीय क्रम बनना चाहिए।
  • ईश्वर के सर्वव्यापक अधिकार के अनुरूप मानव का कर्तव्य: प्रकृति के साथ रिश्ते में सम्मान, न्याय और स्थिरता बनाए रखना।

पवित्र ग्रंथ से समर्थित थीम

यहाँ कुछ प्रमुख विचार जो अन्य भागों से मेल खाते हैं:

  • दानशील कल्पना और रचना-नियमन: ईश्वर ने क्रम से सृजन किया; व्यक्ति को भी क्रमीक रूप से जीवन बनाते हुए सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए (ऊपर की रचना के क्रम के साथ मिलान).
  • नैतिक प्रभारीता: अधिकार के साथ जवाबदेही जुड़ी है—पर्यावरण के साथ अन्य प्राणी भी सम्मान के पात्र हैं।
  • आशीष के साथ निर्देश: आशीष केवल सुख-सुविधा नहीं देता, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए दिशा-निर्देश भी देता है।

संदर्भ-चयन

नीचे तीन उपयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेस दिए जा रहे हैं जिनसे इस verse के विचार और विशाल संदर्भ पर रोशनी मिलती है:

  • यशायाह 45:18 — परमेश्वर ने पृथ्वी को ऐसा बनाने के लिए नहीं बनाई कि वह उजाड़ रहे; वह इसे उपयुक्त रूप से स्थापित करना चाहता है। यह विचार कि पृथ्वी का निर्माण उद्देश्यपूर्ण है, इस verse के साथ गुथा हुआ है।
  • उत्पत्ति 2:15 — मनुष्य को पृथ्वी के बाग का प्रहरी बनाकर रखा गया; यहाँ अधिकार और उत्तरदायित्व एक साथ आते हैं।
  • नीतियों 3:14-15 — परमेश्वर की सत्तात्मकता और सत्ता के साथ मानवीय दायित्व का संतुलन; सभी जीव-जन्तुओं के प्रति आचरण-सम्मत दृष्टिकोण की आवाज देती है।

इन संदर्भों के माध्यम से समझ आता है कि प्रभु ने पृथ्वी को हमारे लिए बनाया है ताकि हम उसकी महिमा के साथ व्यवहार करें और प्रकृति के प्रति सम्मान बनाए रखें।

आध्यात्मिक devotional विचार

ईश्वर की यह आशीष हमें यह याद दिलाती है कि जीवन का उद्देश्य सिर्फ स्वयं की प्राप्ति नहीं है, बल्कि उसकी सृष्टि के साथ सहभागिता है। प्रत्येक दिन प्रकृति की छोटी-छोटी चीजों में ईश्वर की सृष्टि-निरपेक्ष व्यवस्था को देखना सीखना चाहिए। हमारी प्रार्थना और कार्य-नीति में, यह ध्यान रहे कि अधिकार वही है जो प्रेम और न्याय से प्रेरित हो।

संक्षिप्त समेकन

उत्पत्ति 1:28 एक आदर्श आरम्भ देता है: लोग फूलें-फलें, पृथ्वी भर जाए, और सभी जीवन-पदार्थों पर उनका अधिकार न्यायपूर्ण और दयालु तरीके से हो। यह केवल सत्ता नहीं, बल्कि परमेश्वर-निर्देशित stewardship का स्वर है—जिनमें मानवता पर्यावरण के साथ मधुर और जिम्मेदार संबंध बनाएं।

छोटा-सा विचार-विमर्श

हम कैसे इस दायित्व को अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में समाहित करें?

  • अपने पर्यावरण के प्रति छोटे कदम उठाएं—कचरा कम करें, स्रोत-शक्ति के लिए विवेकपूर्ण चयन।
  • स्थानीय समुदाय के साथ सहयोग कर हरित-योजनाओं में भाग लें।
  • प्रकृति के साथ निष्ठा और सम्मान बनाए रखें; पशु-पक्षियों के जीवन के प्रति दया दिखाएं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 1:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 9:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 9:1 (HINIRV) »
फिर परमेश्‍वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी* और उनसे कहा, “फूलो-फलो और बढ़ो और पृथ्वी में भर जाओ।

उत्पत्ति 9:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 9:7 (HINIRV) »
और तुम तो फूलो-फलो और बढ़ो और पृथ्वी पर बहुतायत से सन्तान उत्‍पन्‍न करके उसमें भर जाओ।”

लैव्यव्यवस्था 26:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 26:9 (HINIRV) »
और मैं तुम्हारी ओर कृपादृष्‍टि रखूँगा और तुमको फलवन्त करूँगा और बढ़ाऊँगा, और तुम्हारे संग अपनी वाचा को पूर्ण करूँगा।

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