Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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संक्षिप्त प्रस्तावना और संदर्भ
यहेजकेल 34:31 में परमेश्वर अपने लोगों से बोलते हैं—“तुम तो मेरी भेड़-बकरियाँ...मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ।” यह वचन उस बड़े संदर्भ का भाग है जिसमें यहेजकेल ने मूर्ख चरवाहों की निन्दा की और परमेश्वर ने खुद के रूप में सच्चे चरवाहे की मसीहित्व की घोषणा की। पहले अध्यायों में इज़राएल के नेताओं की असफलता और जनता की परित्याग-स्थिति का चित्र है; अब परमेश्वर सुलह और आत्मीय सम्बन्ध की ओर बुलाते हैं।
मुख्य अर्थ
यह वचन दो स्तरों पर बोलता है। प्रथम, यह पहचान कराता है कि ईश्वर और लोग एक अभिन्न संबंध में हैं—लोग परमेश्वर की “भेड़-बकरियाँ” हैं जिन्हें वह पालता, रक्षा करता और मार्गदर्शित करता है। द्वितीय, यह परमेश्वर की स्वामित्व और उत्तरदायित्व को रेखांकित करता है: यदि वह उनका ईश्वर है, तो वह उनकी रक्षा, न्याय और पुनर्स्थापना करेगा। वचन का आशय उपेक्षा और परितप्ति के बीच आशा का वचन देना है—ईश्वर ने छोड़ा नहीं है, वह फिर से अपने लोगों के लिये काम करेगा।
मुख्य विषय
संबंधित पद और उनकी व्याख्या
कुज्य के समानार्थक विचारों को समझने के लिए निम्न पदों पर ध्यान दें:
व्यावहारिक चिंतन
व्यक्तिगत जीवन में यह पद हमें निम्न बातों पर ले आता है: पहले, अपनी निर्भरता को स्वीकार करना—हम स्वयं को परिपूर्ण सुरक्षा का स्रोत नहीं मानें। दूसरों के प्रति करुणा रखें क्योंकि हम भी "भेड़-बकरियाँ" हैं। दूसरे, सामुदायिक नेतृत्व और धार्मिक जिम्मेदारियों पर सोचना—क्या हम दूसरों के चरवाहे के रूप में उन पर परवाह, मार्गदर्शन और न्याय प्रदान कर रहे हैं? तीसरे, संकट में भी आशा रखें क्योंकि परमेश्वर ने पुनर्स्थापना का वादा दिया है।
पल-पुष्टि: पुराने टिप्पणों से संकेत
मैथ्यू हेनरी ने इस तरह के पदों पर लिखा कि प्रभु की आत्मीयता और स्वामित्व से आश्रय मिलता है; अल्बर्ट बार्न्स भी ईश्वर की संरक्षणकारी भूमिका पर बल देते हैं। (यहाँ कोई लंबा उद्धरण न दिया गया है, केवल सिद्धांतात्मक संकेत प्रस्तुत किए गए हैं।)
संक्षेप में
यहेजकेल 34:31 में परमेश्वर का कथन न केवल स्वामित्व का सूचक है, बल्कि परित्याग से लेकर पुनर्स्थापना तक का मार्ग भी दिखाता है। यह वचन आश्वासन देता है कि चाहे मानव असफल रहे हों, परमेश्वर अपनी भेड़ों का ख्याल रखेगा—वह उनका परमेश्वर है और वे उसकी भेड़-बकरियाँ हैं। यह पहचान आत्मनिरीक्षण, भरोसे और सामाजिक दायित्व दोनों को प्रेरित करती है।