Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 38:1 यहेजकेल 38:2 यहेजकेल 38:3 यहेजकेल 38:4 यहेजकेल 38:5 यहेजकेल 38:6 यहेजकेल 38:7 यहेजकेल 38:8 यहेजकेल 38:9 यहेजकेल 38:10 यहेजकेल 38:11 यहेजकेल 38:12 यहेजकेल 38:13 यहेजकेल 38:14 यहेजकेल 38:15 यहेजकेल 38:16 यहेजकेल 38:17 यहेजकेल 38:18 यहेजकेल 38:19 यहेजकेल 38:20 यहेजकेल 38:21 यहेजकेल 38:22 यहेजकेल 38:23



यहेजकेल 38:5 का तत्काल प्रवेशन और उसका अर्थ
यह चेतावनी किसी आक्रामक विशाल आक्रमण की तैयारी का दृश्य है। भविष्यवाणी के अनुसार ईगलामी आक्रमणकारियों में फारस, कूश और पूत (पोत) शामिल हैं—ये तीनों शक्तिशाली किन्तु विविध भूभागों के प्रतिनिधि हैं। यह verse अपने आप में एक व्यापक वैश्विक संघर्ष के सन्दर्भ को खोलता है, जिसमें परमेश्वर की योजना और पाखण्डी आक्रामण के विरुद्ध उसकी सत्ता स्पष्ट होती है।
ईश्वर की सत्ता और विश्वास का पाठ
इस पंक्ति में God के न्याययोग्य योजना स्पष्ट रूप से दिखती है: जो भी नेता, आक्रामक शक्ति या सेना क्यों न हो, अंततः परमेश्वर के नियन्त्रण के बाहर नहीं है। आपदा और विजय दोनों परमेश्वर के आदेश द्वारा होते हैं; न तो उनके कर्मों पर गिनती सेड़ती है और न ही किसी देश की सत्ता अपने आप स्थिर रहती है। यह टेक्स्ट यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर उन राष्ट्रों के साथ भी जुड़ा रहता है जो समय-समय पर अपने ग़लत मार्गों से लौटते हैं।
शब्दों व छवियों की स्पष्ट व्याख्या
इन तीनों के एक साथ मिलकर एक संधारित आक्रमण को प्रस्तुत करना परमेश्वर की नियति-कार्य की प्रतीकात्मकता है: साहस, योजना और गठबंधन के बावजूद प्रभु की इच्छा सर्वोपरि है।
अन्य संदर्भ और कड़ियाँ
• गम्भीर संघर्ष के परमेश्वर की योजना पर विचार: दानशास्त्र में अन्यस्थलीय हथियारबंदी के बावजूद प्रभु का नियंत्रण स्पष्ट है (उद्धार, न्याय और उद्धार की उद्घोषणा के संदर्भ देखें)।
• उद्धारक भूमिका: यह टेक्स्ट बताता है कि लोग अपनी सामर्थ्य पर नहीं; परमेश्वर के फैसले पर निर्भर रहते हैं, इसलिए विश्वास में निर्भयता चाहिए।
• राष्ट्र-आर्थिक-राजनीतिक खेल: भविष्यवाणी में राजसी गठबंधन और युद्ध के दृश्य घरेलू और सार्वजनिक मोर्चों पर एक ही समय में ईश्वर के न्याय को दिखाते हैं।
वर्तमान-जीवन में व्यावहारिक अनुप्रयोग
- विश्वास और दुआ में रहते हुए भी हम देखते हैं कि प्रभु सत्ता से बाहर नहीं हैं; विपत्ति के बीच भी उनकी इच्छा पूरी होती है।
- जब शक्तियाँ बॉंटती दिखें, तब भी आशा रखें कि परमेश्वर उनकी चालों को मोड़ सकता है या उनके चित्र को चुनौती दे सकता है।
- हमारे दैनिक जीवन में अफ़सर, नेता या समूह किसी भी शक्ति-स्थिति में हों, हमारे विश्वास को परमेश्वर की ओर निर्देशित करना चाहिए—क्योंकि सुरक्षा और संहिता उसका ही स्वरूप है।
सार-सार
यहेजकेल 38:5 तीन प्रमुख शक्तियों—फारस, कूश और पूत—के मिलन से एक खतरे का चित्र प्रस्तुत करता है, परन्तु यह भी बताता है कि प्रभु के नियन्त्रण के बिना किसी भी गठबंधन की महत्ता नहीं। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर ही इतिहास के राजा हैं और उनकी योजना के विरुद्ध किसी भी शक्ति की पकड़ टिक नहीं सकती।
महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल सूचित संदर्भ)
यदि आपने Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण देखे हों, तो वे यहाँ उनके नैतिक-आलोचनात्मक निष्कर्षों के साथ संरेखित होते हैं; हालाँकि इस पंक्ति के लिए इन लेखकों के सीधे पाठ उद्धरण यहाँ नहीं दिए जा रहे हैं, इन विद्वानों के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के न्याय और विश्व-योजनाओं में मानव-युद्धों का स्थान नहीं बदलता।