Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 38:9 का संक्षेप परिचय और भावार्थ
यहोवा के भविष्यवक्तव्य में यहेजकेल 38 में गैद की chốngाह परिशिष्ट और गढ़ित आक्रमण का दृश्य प्रस्तुत है। इस अध्याय के अंत में, बाबलोन, रूस-सीरिया जैसी शक्तिशाली सेनाएँ एक विशाल मिलेजुली सेना बनाकर इस्राएल के विरुद्ध उठती हैं। यह verse 38:9 विशिष्ट रूप से कहता है कि वे चढ़ाई, आंधी की तरह आएँगे, अपने दलों और अनेक देशों के साथ, जैसे मेघ देश पर छा जाएं। यह एक तेज और निर्णायक आक्रमण का चित्र है, जहाँ प्रभु की नीयत के अनुसार राज्य-योजना और दुष्टों के सामूहिक प्रयासों की व्यापकता उजागर होती है।
मुख्य अर्थ के केंद्र
इस पद में एक बड़ी चाल-बढ़त का चित्रण है जहाँ परमेश्वर की योजना के अनुसार सुरक्षा के विरुद्ध उभरती शक्तियाँ आकर यह कहती हैं कि वे युद्ध के लिए आएँगे, परंतु यह केवल मानवीय रण-कौशल नहीं है—यह दिव्य नियति का भाग है। यहžas एक परम कृपा-नियति के भीतर है जिसमें यहूदियों के विरुद्ध एक बड़ी चुनौती सामने आती है, परन्तु भविष्यवाणी में यह भी दर्शाया गया है कि परमेश्वर अपनी सत्ता से अंततः उद्धार और न्याय दोनों प्रदान करेंगे।
कुंजी विषय
लाभप्रद क्रॉस-रेफरेंसेज
1) दरवाजा खुलना: यहेजकेल 39:6 में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर अपनी महिमा से युद्ध-घोषाओं को पूरा करते हैं, और यह verse उसी चतुर्थांश का भाग है जहाँ दुष्टों के आक्रमण के बाद परमेश्वर की सुरक्षा और उद्धार स्पष्ट होता है।
2) जोश और उद्धार: यह्रव 38:16 में नजाते हैं कि परमेश्वर अपने भविष्यवाणी-कार्य के द्वारा आश्चर्यचकित उद्धार का मार्ग बनाते हैं।
3) न्याय की प्रतिज्ञा: यहेजकेल 39:25-29 में God की कर्तव्यपरायणता और इस्राएल के लिए फिर से स्थापना का संकेत मिलता है।
व्यावहारिक चिंतन
जीवन में जब विपत्तियाँ दहाड़ती प्रतीत होती हैं, हमें यह याद रखना चाहिए कि आघात क्या है—एक चुनौती है या अवसर—यीशु के विश्वस्त पथ पर विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। इस Verse की तरह, बड़ी शक्तियाँ दिखती हैं, पर परमेश्वर की वाणी में एक उद्देश्य है: धर्मी की सुरक्षा और न्याय की स्थापना। स्वयं को भय से मुक्त करिए, prisions से बाहर निकलकर प्रार्थना और भरोसे के साथ कदम बढ़ाइए, ताकि आप संघर्षों के बीच भी धैर्यपूर्ण और सेहमी रहें।
संक्षेप सार
यहेजकेल 38:9 एक बड़ी, संगठित आक्रमण की तस्वीर देता है जो मानवीय महत्त्वाकांक्षा और दुष्ट योजनाओं को उजागर करता है। पर यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर की योजनाओं के सामने कोई भी शक्ति स्थिर नहीं रहती; अंततः ईश्वर न्याय करेगा और उद्धार दिखाएगा।
संक्षेप में उच्चार-उद्धृत विचार
“तू चढ़ाई करेगा, और आँधी के समान आएगा... मेघ के समान देश पर छा जाएगा।” अगर आप इस पाठ को गहराई से पढ़ें, तो यह दर्शाता है कि मानव आक्रामकता के बावजूद, ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च सत्ता के निर्देश ही इतिहास को मोड़ते हैं, और धर्मी निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।