Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 47:1 यहेजकेल 47:2 यहेजकेल 47:3 यहेजकेल 47:4 यहेजकेल 47:5 यहेजकेल 47:6 यहेजकेल 47:7 यहेजकेल 47:8 यहेजकेल 47:9 यहेजकेल 47:10 यहेजकेल 47:11 यहेजकेल 47:12 यहेजकेल 47:13 यहेजकेल 47:14 यहेजकेल 47:15 यहेजकेल 47:16 यहेजकेल 47:17 यहेजकेल 47:18 यहेजकेल 47:19 यहेजकेल 47:20 यहेजकेल 47:21 यहेजकेल 47:22 यहेजकेल 47:23
यहेजकेल 47:23 का परिचय और संदर्भ
यह प्रकरण यहेजकेल के दर्शन-परिचय से जुड़ा है जहाँ परमेश्वर हरित-भागीदारी और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था के अनुसार व्यवस्था देते हैं। 47 अध्याय जलस्रोतों, विजय-यात्रा और नवीनीकृत भूमि के प्रतिनिधित्व से जुड़े हैं; यहाँ यह स्पष्ट किया गया है कि प्रजा के भीतर किसी “परदेशी” के लिए भी वही भाग-भूमि निर्धारित होगी, जो गोत्र के अनुसार उनके निवास स्थान से जुड़ी है। यह वाक्य विशेषकर यह दर्शाता है कि भगवान के राज्य में प्रवासी/परदेशी भी समान अधिकार और स्थान पाएँगे, जैसे उनके कुटुंब के सदस्य।
मुख्य अर्थ और केंद्रीय विचार
इस शास्त्र में एक समाज-व्यवस्था का स्वरूप उभरता है जिसमें बहुधर्मी या बाहरी निवासियों के लिए बराबर भाग सुनिश्चित किया गया है। परदेशी को उसी नगर में, उसी गोत्र के भू-भाग पर बसाया जाएगा, ताकि सामाजिक-सांस्कृतिक निष्ठा बनी रहे और परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार किसी के अधिकार में भेद न हो। यह नियम दिव्यता के अनुसार परम-न्याय और समुदाय की एकता को बनाए रखने की दृष्टि से दिया गया है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पद और उनके संक्षिप्त विचार
– यह नीति अन्य सामाजिक-देशीय व्यवस्थाओं से मिलकर बनी है जहाँ विदेशी निवासी अपने अधिकारों के लिए सम्मान पाने के लिए आवश्यक थे।
– यह विचार तथ्य है कि लोक-आदर और स्थानीयता का संतुलन परमेश्वर के राज्य की भी आधारशिला है।
– अन्य आयामों से यह प्रेरणा देता है कि आध्यात्मिक समुदाय में शामिल सभी के लिए समान महत्व और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
व्यावहारिक दृष्टिकोण
2-3 सुझाव:
आत्मिक परामर्श और संक्षेप
यह verse हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का कार्यक्रम सामाजिक-मानव-समाजीकरण को भी समरूपी बनाता है—हर व्यक्ति की गरिमा और स्थान सम्मानित है, चाहे उसका जन्मस्थान कुछ भी हो। यह द्वेष-रहित सह-अस्तित्व और समुदाय की एकता की प्रेरणा देता है, ताकि परमेश्वर की महारानी-रचना पूरी ब्रह्मांड में शांति से बसी रहे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित प्रभाव के साथ)
– भविष्य के नगरों और राज्यों में विदेशी निवासियों के लिए समान भाग के सिद्धांत से जुड़ा भाव: बाहरी समुदायों के साथ समान व्यवहार की मांग।
– नए-युग की आस्था और समुदायिक समरसता पर बल देता यह विचार: एकता में विविधता का संतुलन।
संक्षिप्त समापन
यह वाक्य यह दिखाता है कि परमेश्वर की राजधानी में हर प्रवासी के लिए स्थान निर्धारित है, ताकि समुदाय की एकता और न्यायपूर्ण व्यवस्था कायम रहे।