Old Testament
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गलातियों 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उनके अधीन होना हमने एक घड़ी भर न माना, इसलिए कि सुसमाचार की सच्चाई तुम में बनी रहे।
गलातियों 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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गलातियों 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 2:14 (HINIRV) »
पर जब मैंने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैंने सब के सामने कैफा से कहा, “जब तू यहूदी होकर अन्यजातियों के समान चलता है, और यहूदियों के समान नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों के समान चलने को क्यों कहता है?”

गलातियों 3:1 (HINIRV) »
हे निर्बुद्धि गलातियों*, किस ने तुम्हें मोह लिया? तुम्हारी तो मानो आँखों के सामने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया!

गलातियों 2:5 का तुरंत परिचय और संदर्भ
इस पद में पौलुस उन घटनाओं को याद कराते हैं जो प्रेरित लोगों और विश्वासियों के बीच विश्वास-स्वतंत्रता की मिसाल बनती हैं। उद्धृत पाठ कहता है: "उनके अधीन होना हमने एक घड़ी भर न माना, इसलिए कि सुसमाचार की सच्चाई तुम में बनी रहे।" यह समय-सीमा और निर्भरता का प्रश्न है कि विश्वासी परमेश्वर के काम में स्वतंत्र हों, और അവരുടെ सुसमाचार की सच्चाई बनी रहे।
ईश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ बताता है
यहाँ प्रमुख विचार यह है कि मानव अधिकारों या बाहरी दबाव के कारण सुसमाचार की निष्पक्षता और उसकी धार कुचली नहीं जा सकती। प्रेरित पौलुस ने विश्वासियों के बीच किसी भी नेता-यथा जेरूसालेम के अश्वस्त कर देने वाले दबाव के आगे घुटने टेकने से इनकार किया ताकि प्रभु की सच्चाई/गूढ़ सुसमाचार शुद्ध रहे। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के उद्देश्य में मानवीय संस्थाओं का प्रभाव सीमित है जब तक कि वे सुसमाचार की महिमा को बढ़ाते हैं, न कि उसे घटाते हैं।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और दृश्य-चित्र का स्पष्टीकरण
अन्य प्रस्थान और समान उद्धरण (Cross-references)
1) रोम 14:1-3 — दूसरे के अधिकार और व्यक्तिगत आस्थाओं की स्वीकार्यता: भिन्न-भिन्न मान्यताओं के बीच भी सुसमाचार की प्राथमिकता बनी रहे।
2) गालातियों 5:1 — स्वतंत्रता की आधारशिला: पवित्र-स्वाधीनता जो येसु मसीह में मिलती है, उसे कभी नष्ट न होने दें।
3) एफ़ेसीय 4:3-4 — एकता का अनुरोध: आत्मा के द्वारा एक ही आशा में चलना, एक ही बॉन्धन-परिवेश।
ग्लोबल अनुप्रयोग (आज के पाठ के लिए)
आज के विश्वासियों के लिए यह पद सिखाता है कि धार्मिक दबाव में पड़कर हम सुसमाचार की सरलता, सच्चाई और स्वतंत्रता को खतरे में डालें नहीं। प्रभु के कार्य में व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाये रखना आवश्यक है—परस्पर सम्मान के साथ—ताकि यीशु मसीह के जीवन-ख़बर हमारी बस्ती में चमकती रहे।
उद्धरणीय टिप्पणी (इतिहासिक टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संदर्भ)
मथयू Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-domain विचारों में से यह तथ्य निकलता है कि प्रभु की सच्चाई के विरुद्ध दबाव में पड़ना आत्मा के लिए खतरा है; परन्तु सही मार्ग वही है जिसमें सुसमाचार की पवित्रता बनी रहे।