Old Testament
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गलातियों 6:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर हर एक अपने ही काम को जाँच ले*, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्ड करने का अवसर होगा।
गलातियों 6:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
गलातियों 6:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 13:5 (HINIRV) »
अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जाँचो*, क्या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो।

1 कुरिन्थियों 11:28 (HINIRV) »
इसलिए मनुष्य अपने आप को जाँच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।

गलातियों 6:4 — संदर्भ में जाँच और प्रामाणिकता
पद के पहले भाग में प्रेरित पवित्र लेखन हर एक व्यक्ति को अपने आचरण और कार्यों की जाँच के लिए प्रेरित करता है। इसे दृढ़ता से समझना आवश्यक है कि हम अपने अपने कर्मों के उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हैं; बल्कि यह जाँच आत्म-आलोचना के लिए है ताकि आत्म-घमण्ड और दूसरों के बहाने हमारी प्रवृत्ति से मुक्त हो सके। पाठ हमें यह भी सिखाता है कि दूसरों के विषय में निष्कर्ष निकालने से पहले अपने व्यवहार की वास्तविकता देखनी चाहिए।
मुख्य अर्थ
इस पद का केंद्र यह है कि हर व्यक्ति को अपने ही कर्मों की सच्ची परख करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की छल-छप्पल याguru-गर्णन से बचा जा सके। जब हम अपने कार्यों की जाँच करते हैं, तब दूसरे के विषय में टिप्पणी करने का अवसर नहीं रहता; बल्कि आत्म-चितावनी और सही रास्ते पर चलना प्रमुख होता है।"
दो प्रमुख विषय
क्रॉस-रेफरेंस (संरचित संदर्भ)
1) रोमियों 12:3 — उदारता से अपने अपने माप को नापना और आत्म-निरपेक्षता से न चलना, ताकि हम दूसरों के साथ विनम्र रह सकें।
2) 2 कुरिन्थी 10:12 — वे लोग जो खुद को सही मानते हैं, वे दूसरों के बारे में अधिक दावा नहीं कर सकते; उनका ज्ञान इन चोटों को दूर कर सकता है।
3) याकूब 1:23-24 — बाहरी देखने में जो सही लगता है, वह अंततः अपने आप में नहीं; आंतरिक सत्य ही परिवर्तन लाता है।
पद्धति-गत व्याख्या
डि़यरेशन सीधे-सीधे कहता है कि आत्म-आलोचना से ही सच्चे परिवर्तन आरम्भ होते हैं। जब हम अपने कर्मों की कसौटी पर खरे उतरते हैं, तो हमारी पवित्रता और प्रमाणिकता मजबूत होती है। इसके विपरीत, हर प्रकार की दूसरों पर टिप्पणी या घमण्ड अक्सर हमारी वास्तविक स्थिति को छुपा देती है।
व्यावहारिक विचार
छोटा समापन
यह छोटा लेकिन शक्तिशाली उपदेश हमें स्मरण दिलाता है कि पवित्रता का मार्ग आत्म-निरीक्षण से आरम्भ होता है। अपने कामों की सच्ची जाँच के बिना हम घमण्ड से बच नहीं पाएंगे, और बिना आत्म-नियम के हम दूसरों की कमियों पर अधिक टिप्पणी करेंगे।
संक्षिप्त सार
अपने कर्मों की ईमानदार जाँच करें; इससे घमण्ड का प्रवाह रुकता है और धार्मिक जीवन की वास्तविकता बनी रहती है।
स्वरूप-उद्धरण: इस प्रवचन में 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध बहुवचन टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सूक्तों के संजीव संस्करण का उल्लेख किया गया है। उनकी भिन्न-विध टिप्पणियाँ पाठ के लिए सूचनात्मक मार्गदर्शन देती हैं; परन्तु यहाँ संक्षेप में एक संयुक्त दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।