Old Testament
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गलातियों 6:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
धोखा न खाओ, परमेश्वर उपहास में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
गलातियों 6:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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गलातियों 6:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 9:6 (HINIRV) »
परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (नीति. 11:24, नीति. 22:9)

होशे 10:12 (HINIRV) »
अपने लिये धर्म का बीज बोओ*, तब करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो; देखो, अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है, कि वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाएँ। (यिर्म. 4:3)

सीधे अर्थ का सार
गलातियों 6:7 में स्पष्ट चेतावनी है: परमेश्वर उपहास नहीं उड़ाते। जो बोते हैं, वही काटते हैं; इसका तात्पर्य यह है कि हर कर्म के पीछे वही परिणाम आते हैं, जो व्यक्ति अपने जीवन में उगता है। आध्यात्मिक जीवन में बुरे कर्मों के परिणाम सुदृढ़ रहते हैं, तथा अच्छाई के बीजों का फल भी उगता है। परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार हमारी सच्ची वजह-फितरत ही हमारे फल-फसलों को निर्धारित करती है।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह पद पौलुस के प्रेरित-चर्ची वक्तव्य का भाग है जिसमें उसने आत्म-उत्पत्ति, आत्म-निर्भरता और भाईचारे के रिश्ते पर जोर दिया है। गलातियों के लेखन में, समाज-चर्च के भीतर भेदभाव, सिद्धांतों की गलतफहमी और प्रशंसाओं के बजाय वास्तविक परिवर्तन की माता-रचना की बात है। “जो काटेगा” से संकेत मिलता है कि हमारी प्रकृति और क्रिया-कलापों का परिणाम समय के साथ सामने आता है—नफरत, धिकार, दूसरों के उद्धार की राह में बाधाएं अथवा प्रेम, उदारता और मेल-जोड़ का फलोंदार परिणाम।
interpretive observations
- न्याय का नियम दिव्य है: जो कुछ बोया जाता है, वही काटा जाएगा। यह से प्रेरित है कि हम अपने व्यवहार के बीज स्वयं बोते हैं; जो कर्म हम चुनते हैं, वही हमारे जीवन का मूल बनता है।
- यह चेतावनी प्रेरित-चर्च के भीतर नैतिकता और प्रायः भेद-भाव की प्रवृत्ति के विरुद्ध है; हर किसी पर बराबर प्रभाव पड़ता है, भले ही बाहरी स्थिति कैसी भी हो।
- परन्तु यह उद्धार के लिए नहीं रोके जाने की बात नहीं; बल्कि परिवर्तनशील जीवन की दिशा को स्पष्ट करता है—जितना और जैसा बोएंगे, उतना ही पाएंगे।
छोटी थीम-सूची
अनुदेशक विचार (Cross-references)
- रोम 2:6-9: कर्म के अनुसार तुमको प्रतिफल मिलता है; अच्छे लोगों को जीवन, बुरे लोगों को कष्ठ।
- मत्ती 7:16-20: उनके फल से पेड़ का प्रकार पहचाना जाता है; वास्तव में बीज-कृतियां फलित होती हैं।
- याकूब 3:18: उद्धार के फल में मेल-जोल, शांति और धार्मिकता के बीज उगते हैं।
सार-निष्कर्ष
यह पाठ बताता है कि जीवन के हर चयन के परिणाम विद्यमान होते हैं, चाहे उन्हें हम तत्काल देख पाएं या नहीं। परमेश्वर उपहास नहीं उड़ाते; वह सत्य के मार्ग पर चलकर अपने बच्चों को धैर्य और विवेक के साथ फल देता है। इसलिए अपने व्यवहार में यथार्थता, प्रेम और नैतिकता को ऊँचा रखें।
व्यावहारिक takeaway
अपने दैनिक जीवन में वे बीज चुनें जो प्रेम, ईमानदारी और करुणा के Wheat-भाग बनें; आलोचना से नहीं, पर सुधार से आगे बढ़ें। दूसरों के प्रति दया दिखाएं, ताकि आपके जीवन में सुखद और स्थायी फल दिखाई दें।
उद्धृत टिप्पणी-उल्लेख
एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क एवं मैथ्यू हेनरी के सार्वजनिक-डायरी-टिप्पणियों से जो कथन स्पष्ट हों, उनके शब्द नीचे उद्धृत हैं यदि उपलब्ध हों: कृपया ध्यान दें कि नीचे केवल वे संक्षिप्त उद्धरण हैं जो स्रोत-योग्य हैं:
“जो बोएगा वही काटेगा”—यह विचार मैथ्यू हेनरी के अद्यतन टिप्पणियों में भी समाहित दिखता है।