Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
इब्रानियों 10:1 इब्रानियों 10:2 इब्रानियों 10:3 इब्रानियों 10:4 इब्रानियों 10:5 इब्रानियों 10:6 इब्रानियों 10:7 इब्रानियों 10:8 इब्रानियों 10:9 इब्रानियों 10:10 इब्रानियों 10:11 इब्रानियों 10:12 इब्रानियों 10:13 इब्रानियों 10:14 इब्रानियों 10:15 इब्रानियों 10:16 इब्रानियों 10:17 इब्रानियों 10:18 इब्रानियों 10:19 इब्रानियों 10:20 इब्रानियों 10:21 इब्रानियों 10:22 इब्रानियों 10:23 इब्रानियों 10:24 इब्रानियों 10:25 इब्रानियों 10:26 इब्रानियों 10:27 इब्रानियों 10:28 इब्रानियों 10:29 इब्रानियों 10:30 इब्रानियों 10:31 इब्रानियों 10:32 इब्रानियों 10:33 इब्रानियों 10:34 इब्रानियों 10:35 इब्रानियों 10:36 इब्रानियों 10:37 इब्रानियों 10:38 इब्रानियों 10:39


इब्रानियों 10:18 का महत्त्व और संदर्भ
यह वाक्य बताता है कि एक बार क्षमा मिलते ही पाप के लिए फिर से दोषारोपण या दंड की मांग संभव नहीं रहती। ऐसी स्पष्ट स्थिति अंत-कालीन क्रियाओं के बजाय व्यक्तिगत विश्वास के परिणामस्वरूप परमेश्वर की अनुग्रहपूर्ण माफी को स्थिर मानने का संदेश देती है। इसके पीछे यह विचार है कि क्रूस के बलिदान के द्वारा एक बार में ही पापों की पूर्ण माफी मिल जाती है और फिर से पाप का अवसर नहीं रहता जब ईमानदार repentance और विश्वास के साथ भागीदारी अवश्य हो।
असल संदर्भ
पत्र के लेखक इस पत्र में यह दिखाते हैं कि旧 व्यवस्था के पश्चात नई व्यवस्था कैसे सत्यापित होती है। पुराने नियम में धार्मिक कर्मकांड बार-बार होते थे, पर यीशु के मसीहत्व से एक बार की पूर्ण माफी मिलती है। जब विश्वास के साथ अंतःकरण में परिवर्तन होता है, तब पाप की कोई स्थायी ताकत नहीं रहती। यह वचन उन विश्वासियों को सचेत करता है जो पारम्परिक रीति-रिवाजों में ही आत्म-रक्षा या आत्म-गवाही की उम्मीद रखते हैं; न कि उन्नत आस्था और निर्भरता पर।
मुख्य संदेश
पवित्र ग्रंथ के संदर्भ से समझ
इसी अध्याय में लेखक दिखाते हैं कि नया अनुबंध पुरानी व्यवस्था से अधिक श्रेष्ठ विश्वास-व्यवस्था है। जब हम ईश्वर के प्रेसेंस में आते हैं और पाप के लिए दिल से क्षमा मांगते हैं, तो बलिदान का पुनरुक्ति क्रम नहीं चलता।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षिप्त परिचय)
रोमियों 3:25-26— पाप के क्षय के लिए परमेश्वर किस प्रकार न्याय-संतुलन में बलिदान-प्रयोग दिखाते हैं।
यHebrews 9:14-15— पवित्र आत्मा के प्रभाव से, एक बार के बलिदान से पूर्ण पवित्रता की प्राप्ति।
यहेअ 10:12-14— स्पष्ट रूप से यीशु का एक बार का बलिदान, जो पापों के लिए दूर है, और अब शांति से बैठा है।
पैग्लिक विषयों के साथ संदर्भित विचार
यह वाक्य विश्वासयोग से यह बताता है कि माफी मिलते ही हमारे ऊपर पाप का दायित्व समाप्त नहीं रहता; हमें आचरण का परिवर्तन, विश्वास का स्थायित्व और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीना है।
संক্ষেপित विवेकपूर्ण सार
जब हम क्रूस पर यीशु के बलिदान के पूर्णत्व को स्वीकारते हैं, पाप का प्रभाव हमारे ऊपर टिक नहीं पाता। यह स्मरण दिलाता है कि ईश्वर के लिए विहित माफी एक अंतिम, स्थायी कृपा है, जिसे स्वीकार कर जीवन-परिवर्तन के रास्ते पर चलना चाहिए।
कुलदेय devotional reflection
हम हर दिन नई आशा के साथ आते हैं कि परमेश्वर ने अपने पुत्र के बलिदान से हमारे पापों को खत्म कर दिया है। यदि अपराध होते भी हैं, तो माफी की कृपा सच है; परन्तु उसका आशय है कि हम पापीपन से मुक्त होकर एक नये जीवन की ओर बढ़ें। आज इस मसीही सच को दोहराएं: पाप की गिरफ्त से मुक्त होकर, सच्चे विश्वास के साथ ईश्वर की प्राथमिकता बनें, ताकि आपकी प्रार्थना और कर्म एक साथ परमेश्वर की महिमा के लिए उठें।
उद्धरण नोट
अगर चाहें, तो हम Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से छोटे, उपयुक्त उद्धरण साझा कर सकते हैं। यहां उपलब्ध नहीं हैं, पर जरूरी उद्धरण उचित संदर्भों में जोड़े जा सकते हैं—जैसे यदि आप चाहें तो मैं सीधे स्रोत-उद्धरण को संकलित कर सकता हूँ।