Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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यह पवित्र वचन क्या कहता है
इब्रानियों 10:3 में कहा गया है: "परन्तु उनके द्वारा प्रति वर्ष पापों का स्मरण हुआ करता है।" इसका तात्पर्य यह है कि युक्त-युक्तियों के अनुसार परमेश्वर के सामने बार-बार उन पापों की याद रहती थी जिन्हें प्रायः अतीत से जुड़ा हुआ स्मरण कर पवित्रस्थान की व्यवस्था के अनुसार ढंग से अर्पित किया जाना चाहिए था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नया करार के लेखक यह दिखाते हैं कि पुराने विधान में जान-बूझकर कर्मों के जिज्ञासु स्मरण के साथ पाप की बारीकी से गिनती होती थी, ताकि लोग असली पापिण्डर से मुक्त नहीं होते रहते। हर वर्ष के प्रायश्चित से भी वे पापों के परिणामों और दोष-भाव को हल्के में नहीं कर पाते थे। यह स्मरण कमजोरियों को उजागर करता है कि व्यवस्था स्वयं मोक्ष का पूर्ण उत्तराधिकारी नहीं है बल्कि एक अंश-प्रतीक है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1) पापों का स्मरण बार-बार: पुराने विधान के बल पर हर वर्ष प्रायश्चित्त के समय देवता के सामने स्मरण लाती थी कि पाप कितने हैं और उनका दंड कितना है। यह स्मरण मानव को बताता था कि पाप एक बार के आघात से नहीं धोए जाते, बल्कि समान प्रयास से ही दोष दूर होते हैं।
2) प्रायश्चित्त का ढांचा: यह स्मरण पुराने व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है—प्रतीकात्मक बलियाँ, कभी-कभी पुनरावृत्ति, और विभिन्न जानवरों के बलिदान। परन्तु यह सब एक ढाँचा थी जो यीशु के महिमा-पूर्ण प्रवेश के लिए तैयारी थी।
3) अंतःकरण की स्वतंत्रता की बात: लेखक हर वर्ष के स्मरण के कारण मन में अस्थिरता, भय और निराशा दिखाते हैं; स्वतंत्रता तब है जब हम प्रत्यक्ष पवित्रता और विश्वास के द्वारा परमेश्वर के सामने पहुँचते हैं।
छोटी थीम-सूची
अन्य प्रायः उद्धृत विचार ( cross-references )
यह अनुभाग अन्य पाठों के साथ समग्र समझ देता है:
यूहन्ना 1:29 के संदर्भ में—यीशु क्रूस पर दया के पूर्ण बलिदान के द्वारा पाप के दोषों का समाप्ति; रोम 3:25 के अनुसार—विश्वास के द्वारा पाप-शोधन की पूर्ति; पेित्रूस 1:18-19—खुदे के दाम से खरीदे गए, पवित्र विवेक द्वारा उद्धार।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम अनुभव करें कि पाप के स्मरण से केवल चिंतन नहीं, बल्कि विश्वास-आधारित आशीर्वाद और पवित्र जीवन की ओर बढ़ना है। पुराने विधान की स्मृति हमें यह सिखाती है कि हम भी कभी-भी अपने को उद्धार के योग्यता से बाहर नहीं मान सकते; यीशु के साom पूर्ण बलिदान में ही मुक्तिः का मार्ग है।
क प्रचलित उद्धरण (संदर्भित टिप्पणियाँ)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायन-टिप्पणियों से सीधे उद्धरण दें तो: उन्होंने यह दर्शाया है कि पापों की यादगार व्यवस्था केवल एक मार्ग दिखाती है कि पूर्णता में प्रवेश कैसे नहीं होता, किन्तु मसीह में प्राप्त नई वाचा से मुक्त जीवन संभव है। (नोट: नीचे उद्धृत-शब्द वास्तव में उनके विचार के सार हैं; पूर्ण उद्धरण साइट पर उपलब्ध हो सकता है।)
संयुक्त निष्कर्ष
इस वाक्य के भीतर पुराने व्यवस्था के पाप-यंत्रण और नई व्यवस्था के मुक्त-जीवन के बीच स्पष्ट विभाजन है। पापों की स्मृति व्यवस्था की कमजोरी की याद दिलाती है और यीशु के माध्यम से पूर्णता की ओर संकेत करती है। इसलिए विश्वासयोग्य को प्रेरित करती है कि वह केवल प्रयोगों पर नहीं, बल्कि विश्वासौँ पर टिके।