Old Testament
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इब्रानियों 9:7 का परिचयात्मक संदर्भ
पर्वे में कहा गया है कि परम महायाजक एक वर्ष भर में एक बार के लिए पवित्रस्थान में प्रवेश करता है, परन्तु उसकी प्रवेश-यात्रा बिना लहू के नहीं होती; वह अपने लिए और लोगों की भूल-चूक के लिए चढ़ावा चढ़ाता है। यह विवरण यह दिखाता है कि पुरानी व्यवस्था में परमेश्वर के समक्ष पवित्रता की गहरी आवश्यकता और पाप के संबंध में उच्चतम सम्मान की आवश्यक व्यवस्था कैसे स्थापित थी।
ईश्वर और विश्वास के प्रति यह पाठ क्या बताता है
यह पाठ यह स्थापित करता है कि परमेश्वर एक पवित्र दयालुता-युक्त ईश्वर हैं, जो पाप के विरुद्ध एक स्पष्ट सीमा रखते हैं। महायाजक का वर्ष-भर में एक ही प्रवेश दर्शाता है कि पवित्र स्थान की निकटता और परमेश्वर के सामने प्रायश्चित्त का कार्य कैसे एक सीमित, बार-बार करने वाला कार्य था, जिसका लक्ष्य लोगों के दोषों को स्मरण रखना था। यह भी दिखाता है कि पुरानी व्यवस्था में विश्वसनीयता और पवित्रता के लिए यीशु का महिमंडित कार्य कैसे अनोखा और पूर्ण था, क्योंकि वह एक बार पर पूर्ण प्रायश्चित्त कर सकते थे।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित आयतें (cross-references) और उनका संक्षिप्त अर्थ
1) निर्ग. 30:10 — उच्च पुरोहित के वश में प्रायश्चित्त के प्रयोजन की व्यवस्था; यह बताता है कि दाय और आस्था कैसे एक साथ चलते हैं।
2) लैवीय 16 — उद्धृत पथ, जहां याजक की एक विशिष्ट दिवसीय चढ़ाई और पापों के लिए चढ़ावे का विवरण है; पवित्र स्थान के प्रवेश-व्यवस्था की पूर्णता की清晰ता मिलती है।
3) इब्रानियों 10:19-22 — नया संहिता के अंतर्गत “हम अभी भी बिना भय के आ Etats” का भाव स्पष्ट करता है; यीशु के एक बार के प्रायश्चित्त की महिमा प्रस्तुति करता है।
प्रमुख शिक्षा और उनके today के लिए अर्थ
पुरानी व्यवस्था के भीतर महायाजक का प्रवेश एक स्मरण-योग्य तंत्र था जो पाप की वास्तविकता को दर्शाता था—कि बिना रक्त के पाप क्षमा नहीं होते। लेकिन यह व्यवस्था फोटो-जैसी है; यह वास्तविक, अंतिम और पूर्ण प्रायश्चित्त की आवश्यकता को संकेतित करती है। नया विधान बताता है कि यीशु ने एक बार ही अपने प्रायश्चित्त से महान लक्ष्य को पूरा कर दिया, ताकि हमारे पापों के कारण हमें सदा के लिए पवित्र स्मरण-स्थिति मिले।
ऐतिहासिक टिप्पणी से बने निष्कर्ष
एडल्टों, बर्न्स और क्लार्क जैसे सार्वजनिक डोमेन टीका-लेखकों के सुझावों के अनुसार, इस पाठ में दोष-स्वीकारिता और पवित्रता के बीच एक संतुलन दिखता है: पुरानी व्यवस्था में प्रक्रिया-आधारित प्रायश्चित्त, और नया करुणामय प्रभाव जिसमें यीशु का एक-बार का बलिदान पूर्णता देता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
टिप्पणी-योग्य उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की उद्धरणों से जो स्पष्ट है वह यही है कि पुरानी व्यवस्था में भोग-पूर्वक प्रायश्चित्त और नया विधान में पूर्णता का परिवर्तन है।