Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 9:22 का संदर्भ और उसका महत्व
इस verse को ग्रंथ का क्रम उनके पुराने विधान और नया विधान के बीच प्रायश्चित की व्यवस्था से जोड़ता है। परमेश्वर की व्यवस्था में हर वस्तु को पवित्र करने के लिए लहू की बाध्यता बताई गई है; और इस कारण बिना लहू बहाए क्षमा नहीं होती। यह बात लैव्यविधि 17:11 से स्पष्ट है कि प्रायश्चित का माध्यम जीवित पदार्थ के माध्यम से होता है और लहू נपस्वरूप शुद्धि की अंतिम तत्व है। लेखक इब्रानियों यहाँ दिखाता है कि यीशु मसीह के त्याग से नया विधान स्थिर होता है, जिसमें उसका लहू शाश्वत पवित्रता के लिए पूर्ण और अन्तिम आस्त्र है।
केंद्रीय अर्थ
वास्तव में यह मार्मिक औचित्य है कि क्यों पुरानी व्यवस्था में दोषी मनुष्य के लिए प्रतीकात्मक बकरियों और पशुओं का लहू आवश्यक था, ताकि पाप के लिए क्षमा माँगी जा सके। परंतु नए नियम में यीशु का लहू एक बार के लिए, सभी के लिए, पूर्ण क्षमा के लिए दिया गया है। यह भिन्न नहीं है कि क्यों वह ‘कृष्णियुक्त’ बलिदान के रूप में देखने को मिलता है—यह पाप की सदा के लिए समाप्ति और आत्म-शुद्धि का स्रोत बनता है।
दो मुख्य विषय
अन्य पाठ से सम्बन्ध
1) लैव्यविधि 17:11 — पाप की क्षमा के लिए लहूं का महत्व स्पष्ट है; यह पुराने नियम की संरचना बताता है कि लहू की शक्ति से ही शुद्धि होती है।
2) प्रकाशितिवचन 1:5— यीशु का लहू हमें पाप के दोष से मुक्त कर देता है और हमारे पापों की क्षमा के लिए उसकी भूमिका को पुष्ट करता है।
3) रोमियों 3:25— उसकी कृपा के कारण उसकी ताबेदारी से पाप की बन्धन टूटती है और सत्य की स्थिति स्पष्ट होती है।
व्यावहारिक चिंतन
हमारी नम्रता वही है जो मृत्यु-पूर्व नियम से ऊपर उठ कर विश्वास में ढलती है। गिरहों के समय से भी, पाप के लिए परमेश्वर की योजना केवल आस्तिकता से ही पूरी होती है; हमारे कर्म ही नहीं, बल्कि यीशु के बलिदान की अर्थपूर्णता को स्वीकारना आवश्यक है। दैनिक जीवन में भी यह पवित्रता की कटै-सी प्रेरणा देता है—जो हमें अपने ज़िंदगी के हर क्षेत्र में पवित्र रहने की ओर ले जाती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इब्रानियों 9:22 बताता है कि पुराने विधान में पवित्रता लहू के द्वारा होती थी, और बिना लहू के क्षमा नहीं। पर यीशु के बलिदान से नया विधान स्थापित होता है, जिसमें उनका लहू एक बार सभी के लिए पूर्ण क्षमा और पवित्रता का आधार बनता है। यह परमेश्वर की नयी योजना का केंद्र है—विश्वास द्वारा प्राप्त पवित्रता और भरोसा कि यीशु ही हमारी अंतिम उद्धारक हैं।
संक्षिप्त उद्धरण (योग्यता के अनुसार)
किसी भी सीधे उद्धरण के लिए, नीचे प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त शब्दों का उपयोग किया गया है:
मैथ्यू हेनरी से: “...”
एल्बर्ट बार्न्स से: “...”
ऐडम क्लार्क से: “...”
क्रॉस-रेफरेंसेस: लैव्यविधि 17:11; रोमियों 3:25; प्रकाशितिक 1:5