Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 9:3 पर अर्थ-सार
मुख्य अर्थ: दूसरे पर्दे के पीछे स्थित वह तम्बू परमपवित्र स्थान है, जिसे यह लेखक पुराने विधान के भीतर परमाधिकार और पूजनीय उपासना के वेदी-घर के रूप में दर्शाता है। यहाँ का संकेत भगवान के सामने प्रवेश के विशिष्ट और पुण्य स्थान की विस्तृत व्यवस्था पर केंद्रित है, जो यीशु मसीह के मिशन से नया अंदाज़ सामने रखता है।
पृष्ठभूमि संक्षेप
व्यवस्था में दो परदों वाले tent-खण्ड थे: पहला, सामान्य पूजा का स्थान; दूसरा, परमपवित्र स्थान, जहां कबीलों की दृष्टि के भीतर सिर्फ उच्च पुरोहित एक बार प्रत्येक वर्ष प्रवेश कर सकता था। निर्गमन 26:31–33 में इसका विवरण मिलता है। नयी विधान के लेखक ने इसी संरचना का उल्लेख कर यह दिखाया कि पुरातन व्यवस्था में पूजा की प्रतीक्षा और सीमाएं थीं, जबकि मसीह के आने से यह सीमाएं पूर्णता में बदलीं।
व्याख्यात्मक धारणाएँ
- परमपवित्र स्थान का रहस्य: परदा उन लोगों के लिए नहीं था जो बाहरी थे; यह स्थान दिव्यता और पवित्रता के अस्थायी और निषेधात्मक संकेत कर्तव्य के रूप में घटित होता रहा।
- पुरोहित व्यवस्था बनाम नया प्रवेश: पुराने नियम में उच्च पुरोहित के लिए एक-एक वर्ष की छूट के साथ प्रवेश संभव था; पर ईस्वीय क्रिया के अनुसार अब समस्त विश्वासियों के लिए सीधी प्रवेश की राह खुली है, क्योंकि मसीह ने अपने बलिदान से वैध प्रवेश रास्ता बना दिया है।
- प्रभु के दफ्तर का उद्घाटन: तम्बू के पीछे परमपवित्र स्थान से संकेत मिलता है कि शाश्वत आराधना और पूजना एक नई भेंट और नवीन प्रतिमान के साथ हो रहा है।
संझे हुए सुराग: 2-3 चोटी संदर्भ और उनके तात्पर्य
इन संदर्भों से स्थिर निष्कर्ष: प्रवेश की अनुमति सिर्फ प्राचीन व्यवस्था के भीतर नहीं है, बल्कि मसीह के माध्यम से सभी विश्वासियों के लिए नयाँ निकटता और आराधना संभव है।
छोटा थीम-सूची
उद्धरण योग्य टिप्पणियाँ (संक्षेप)
अगर आवश्यक हो, तो प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे शब्दों के छोटे अंश संदिग्ध नहीं हैं। (पूर्ण उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है ताकि पाठ के सन्दर्भ पर निर्भर रहे।)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारा लक्ष्य यह है कि हम परमपवित्र स्थान के बारे में पुरानी व्यवस्था की सीमा को समझते हुए भी यह पहचान लें कि यीशु के माध्यम से हमारा सीधा नज़दीकी संबंध परमेश्वर के साथ बना रहता है। नयी विधान में भक्ति का स्थान और प्रक्रिया सरल, सच्ची और व्यक्तिगत हो गयी है; हमारे worship-जीवन में बहिर्वाह और भरोसा प्रमुख हैं।