Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
इब्रानियों 9:1 इब्रानियों 9:2 इब्रानियों 9:3 इब्रानियों 9:4 इब्रानियों 9:5 इब्रानियों 9:6 इब्रानियों 9:7 इब्रानियों 9:8 इब्रानियों 9:9 इब्रानियों 9:10 इब्रानियों 9:11 इब्रानियों 9:12 इब्रानियों 9:13 इब्रानियों 9:14 इब्रानियों 9:15 इब्रानियों 9:16 इब्रानियों 9:17 इब्रानियों 9:18 इब्रानियों 9:19 इब्रानियों 9:20 इब्रानियों 9:21 इब्रानियों 9:22 इब्रानियों 9:23 इब्रानियों 9:24 इब्रानियों 9:25 इब्रानियों 9:26 इब्रानियों 9:27 इब्रानियों 9:28



क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
व्यवस्था के पुराने व्यवस्थापक महायाजक के बार-बार बलिदान के कार्य से यह एक खास संकेत देता है कि यीशु का प्रायश्चित्त किस प्रकार उससे भिन्न है। इब्रानियों 9:25 में कहा गया है कि वह अपने आप को बार-बार नहीं चढ़ाता, जैसा कि महायाजक प्रतिवर्ष पवित्रस्थान में प्रवेश करके दूसरे का लहू लेकर करता है। यह वाक्य हमें बताता है कि नया चयनित रास्ता—येशु का एक बार का पूर्ण प्रायश्चित्त—पुराने नियम के लगातार और असफल प्रयासों पर विजय प्राप्त कर देता है।
पाठ का मूल संदर्भ
लेखक इन चित्तियों के माध्यम से यह दिखाते हैं कि पुरानी व्यवस्था में महायाजक हर वर्ष अर्पण के साथ पवित्रस्थान में प्रवेश करता है क्योंकि मनुष्यों के दुष्कर्म बारम्बार होते रहते हैं। लेकिन यीशु ने अपना बलिदान एक बार किया और वही अर्ध-स्वर्गीय महिमाओं के बीच पहुंचकर सदा के लिए पुनर्स्थापन का मार्ग बना दिया। यह एक ऐसी प्रासंगिकता है जो विश्वासियों के लिए आश्वासन बनती है कि हमारे प्रभावी उद्धार का स्रोत केवल धर्म-महायाजक नहीं, बल्कि परमेश्वर के पुत्र का पूर्ण प्रतिफलन है।
प्रमुख संदेश
सापेक्ष विषयक विचार
इस वाक्य में तीन तरह की मति उभरती है: पहले, पुरानी व्यवस्था के लिए बार-बार जाना आवश्यक था; दूसरे, नया संयम—एक बार के बलिदान से सब कुछ समाप्त हो गया; तीसरे, विश्वासियों के लिए समानता और सुरक्षा की भावना—जो कि पवित्रस्थान के प्रति निरंतर आस्था से प्रकट होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यूद्ध-फरमानों और उद्धार की दिशा में समान धारणा के साथ निम्न विशेषज्ञ संदर्भ बढ़ावा देते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना कैसे एक सम नवीन विधान के माध्यम से मनुष्य को वास्तव में शांति देती है.
छोटा devotional विचार
हम अक्सर कई बार अपने आचरण में संघर्ष करते हैं, लेकिन यह पद हमें याद दिलाता है कि हमारा विश्वासी जीवन एक बार और पूर्ण परिणाम के लिए यीशु के बलिदान पर टिका हुआ है। भय, अपराधबोध या असफलता के समय भी, हमें याद रखना चाहिए कि परमेश्वर की पहुँच और उद्धार एक बार की पूर्णता में है—जो भय के बजाय विश्वास को मजबूत बनाती है।
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द देखें
यदि उपलब्ध हों, तो इन महान पवित्र-करीदारों के संकलनों से कुछ स्पष्ट उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं, परंतु उनके विचार इस प्रकार हैं: बार-बार चढ़ाव के बजाय एक बार का प्रायश्चित्त—यीशु के क्रॉस का संकेत है; पुराने संस्थार के कर्मगत बलिदान अब शेष नहीं रहे, क्योंकि नया विधान ने पूर्णता प्राप्त कर ली है।
संक्षेपित निष्कर्ष
इस verse से सुसंगत संदेश यही है कि यीशु का बलिदान बहु-मुखी बनाम बार-बार प्रयासों से मुक्त है। यह नई व्यवस्था का एक प्रमुख अंग है जिसका उद्देश्य शांति और पुनर्स्थापना है, न कि पुरानी व्यवस्था के निरंतर प्रयत्न।