अय्यूब 1:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, “तेरे बेटे-बेटियाँ बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,

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अय्यूब 1:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

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यह अय्यूब के कठोर दुख के समय का वह क्षण है जब दुखद घटनाओं की तरंगें एक के बाद एक आ कर उसकी जीवन-स्लेट को हिला देती हैं। यह पद बताता है कि पथभ्रष्ट घटनाओं के बीच भी आशीष और विपत्ति की परख कैसी रहती है, और हमारी आस्था किस प्रकार परमेश्वर की souverainता (पर्याय) में टिके रहने की आवश्यकता सिखाती है। अय्यूब 1:18 में एक बार फिर से दुखद समाचार आते हैं: उसका पुत्र–पत्नी आदि सामान्य जीवन के साथ व्यस्त थे, और तभी दूसरी खबर आती है कि बेटे-बेटियाँ बड़े भाई के घर में भोजन और मदिरा के साथ थे—और यह भी हमारा ध्यान है कि जीवन के हर मोड़ पर ईश्वर के नियंत्रण को याद रखना चाहिए।

verses in context of the chapter

इस अध्याय का प्रमुख संदेश है—पहचान, आस्था और परीक्षण। शुरू में अब्राह्मिक धरोहर की तरह आशीर्वाद बनाम आपदा; भगवान के सेवक अय्यूब की धार्मिक स्थिति और उसकी सत्यनिष्ठा को छलांकित करता है। इस वाक्य के साथ, यह दिखता है कि दुःख के समय भी समाचार एक-एक कर आ रहे हैं, और हर सूचना से अय्यूब का दर्द बढ़ता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

यह वचन हमें यह सिखाता है कि - दुख के दृश्य में भी, कठिन समय में भी, विश्वास की स्थिरता जरूरी है। जब संसार की घटनाएँ अचानक घेर लेती हैं, तब भी परमेश्वर के नियंत्रण की याद रखना चाहिए। अय्यूब के जीवन में जब विशाल नुकसान दिखते हैं, तब उसकी पवित्रता और प्रार्थना का आग्रह लक्ष्य बनता है—मन को स्थिर रखने का अभ्यास।

तुलना और समकक्ष संदर्भ

  • उद्धृत घटना से पहले का दृश्य: यह दिखाता है कि दैवीय नियति के सामने मानव जीवन कितना अस्थिर है; फिर भी परमेश्वर के वचन में विश्वास रखने की प्रेरणा मिलती है।
  • अन्य पुस्तकें—आस्था बनाम दुःख: उदाहरण के लिए यशायाह और भयोन्नतियों में भी प्रभु की नीतियों पर टिके रहना सिखाया गया है।
  • मनोरथ बनाम वास्तविकता: यह पाठ बताता है कि आंतरिक श्रद्धा, बाहरी समाचारों से अधिक महत्वपूर्ण है।

व्यावहारिक आवेदन

- जब जीवन अचानक कठिन हो जाए, तब संतुलन बनाए रखें: भय से नहीं, विश्वास से काम लें।

- समाचारों के बीच परमेश्वर की सत्ता याद रखें; वह वही है जो घटनाओं को दिशा देता है।

- परिवार और समुदाय के साथ सहानुभूति और प्रार्थना के साथ स्थिति को संभालें; दुख साझा करना धैर्य बढ़ाता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

1) पाप और दुःख के बीच विश्वास की धुरी: निर्भरता केवल तत्काल स्थितियों पर नहीं बल्कि परमेश्वर पर है। (সংख्या ११:२८; हा॥)

2) धैर्य और नम्रता की सीख: कठिन समय में भी ईश्वर के उद्देश्य पर भरोसा बना रहे।

3) दृष्टिकोण का परिवर्तन: परिस्थितियाँ गिराने के बजाय सीख देती हैं; इन घटनाओं को अलखित करते हैं कि परमेश्वर कितना पुरा नियंत्रण में है।

संक्षेप निष्कर्ष

अय्यूब 1:18 ने एक बार फिर यह दिखाया कि जीवन की तेज़ घटनाओं के बीच भी परमेश्वर के नियंत्रण को याद रखना आवश्यक है। पुरानी धरोहरों के माध्यम से जो विश्वास बना रहता है, वही दुःख के क्षणों में भी टिके रहते हैं। इस वचनों के साथ, पाठक अपने विश्वास को पुनः मजबूत कर सकता है और परमेश्वर की सत्ता में आशा रख सकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 1:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अय्यूब 1:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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उसके बेटे बारी-बारी दिन पर एक दूसरे के घर में खाने-पीने को जाया करते थे; और अपनी तीनों बहनों को अपने संग खाने-पीने के लिये बुलवा भेजते थे।

अय्यूब 1:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 1:13 (HINIRV) »
एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियाँ बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे;

आमोस 4:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
आमोस 4:6 (HINIRV) »
“मैंने तुम्हारे सब नगरों में दाँत की सफाई करा दी, और तुम्हारे सब स्थानों में रोटी की घटी की है, तो भी तुम मेरी ओर फिरकर न आए,” यहोवा की यही वाणी है।

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