Old Testament
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अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
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सीधे अर्थ का संकेतः
यहोवा के वचन में अय्यूब 36:18 कहता है: जलजलाहट और ठट्ठामंस से भरी दावेदारी मत खोजो; न घूस-भरोसे या मार्ग से घूम कर अपने अहंकार को बढ़ाओ। यह चेतावनी भीतर से विनम्र रहने और ईश्वरीय मार्ग के अनुरूप चलने की है।
संदर्भ-भूमिका
यह अध्याय अय्यूब की कथा में ईश्वर के दयालु किन्तु कठोर विवेचन का भाग है, जहाँ इंजेक्शन-युक्त दैवी प्रेरणा में ज्योति-सी तकसीम और धैर्यपूर्ण आचार-व्यवहार की शिक्षा मिलती है। मित्रों की बहस के बीच परमेश्वर की महिमा और मानव की छोटीपन स्पष्ट होती है।
व्याख्या के प्रमुख अवलोकन
छोटी थीमेटिक सूची
अन्य संदर्भ और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध
1) नीतस 16:18 — घमंड गिराए जाने का खतरा, क्योंकि उच्च-उद्धार से नीचे आना अनिवार्य है; अहंकार परमेश्वर के विरुद्ध जाता है।
2) यशायाह 57:17 — अपनी चाल में अशांति होने पर भी ईश्वर दया दिखाते हैं, पर घूस-घटाव नहीं होता; सत्य मार्ग पर चलना चाहिए।
3) भवन-उद्धारक स्तोत्र 131:1 — विनम्रता, तात्कालिक सफलता से ऊँचा स्थान नहीं पाती; मनुष्य का स्वाभिमान परमेश्वर से जुड़ा रहना चाहिए।
खास उद्धरणों के संकेत
नीचे Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रसिद्ध विचारों के संक्षेप उपयोगी हो सकते हैं, परंतु यह स्थान उन्हीं की पूर्ण उद्धृत रचनाओं को नहीं दिखाता। यदि आवश्यक हो, तो योग्य अंशों का चयन किया जा सकता है:
• Henry के दायरे में: अहंकार और दुष्कर्म के विरुद्ध चेतावनी।
• Barnes के अनुसार: मार्ग-भ्रष्टाचार से बचना चाहिए ताकि धार्मिक विश्वास बना रहे।
• Clarke के अनुसार: शास्त्र-नैतिकता में धैर्य और ईश्वरीय मार्ग की महिमा प्रमुख है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संकेतित पाठ):
• न्याय और विनम्रता पर बल देने वाले अन्य ढांचे: दयालुता, निष्कपटता, और ईश्वर के मार्ग पर चलना।
• मार्ग-वंचना से बचने के लिए पवित्र जीवन-नीति का पालन जरूरी है।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
कथन यह है कि outside दिखावे, सफलता की छोटी-छोटी लहरें हमें प्रभु से दूर नहीं करेंगी; विनम्रता, सत्य मार्ग, और दया से चलना ही आंतरिक सुरक्षा और ईश्वर-आशीष का रास्ता है।