अय्यूब 36:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि वह देश-देश के लोगों का न्याय इन्हीं से करता है, और भोजन वस्तुएँ बहुतायत से देता है।

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अय्यूब 36:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 36:31 पर टिप्पणी – संदर्भ और अर्थ

यह पद अय्यूब के दुःखद अनुभवों के बीच परमेश्वर के शासन की व्यवस्था को समझाने वाला भाग है। अय्यूब 36 अध्याय में इलूहि की बातों के क्रम में पुराने सिद्धांत दोहराते हैं: परमेश्वर की जयाकारी न्याय और उसका दयालु पालन। यहाँ कहा गया है कि परमेश्वर “देश-देश के लोगों का न्याय इन्हीं से करता है, और भोजन वस्तुएँ बहुतायत से देता है।” इसका आशय यह है कि प्रभु प्रत्येक देश के आचरण और उसके परिणामों के लिए जिम्मेदार हैं—वह जहां-जहां अन्याय या भौतिक आवश्यकता हो, वहां प्रतिफल और साक्षरता का कार्य करते हैं। यह वाक्य एक व्यापक दृश्य को उभारता है: परमेश्वर की सत्ता और उसकी करुणा दोनों एक साथ चलते हैं, जो मानवता के सभी संदर्भों में न्याय और आशीष के स्रोत हैं।

मुख्य विचार

1) सार्वभौमिक शासन: परमेश्वर सभी राष्ट्रों को नियंत्रित करते हैं और उनके निर्णयों में हस्तक्षेप करते हैं। यह प्रेरणा देता है कि किसी भी सत्ता को मानव-आदर से ऊपर नहीं माना जा सकता।

2) करुणा के साथ व अनुभव: “भोजन वस्तुएँ बहुतायत से देता है” बताता है कि प्रभु के हाथ में दैनिक आवश्यकताओं की उपलब्धता है—चाहे प्रत्यक्ष आशीष हो या परिस्थितियों के माध्यम से संतोष।

कुंजी विषय

  • न्याय और दया का संतुलन: परमेश्वर न्याय भी करते हैं और दयालु कृपा भी।
  • विश्वास की परीक्षा: अय्यूब के क्लेश में भी देव की व्यवस्था का स्मरण दिलाता है कि प्रभु की योजना समृद्ध और उद्देश्यमय है।
  • आधारभूत प्रावधान: भौतिक आशीष और नैतिक आचरण एक दूसरे से जुड़े हैं; ईश्वर के राज्य में भोजन और दया दोनों क्रमबद्ध बनाए जाते हैं।

संबंधित पद

• उत्पत्ति 41:43-44 – प्रभु की सत्ता और हर राष्ट्र पर उसका अधिकार दिखता है।

• गलतियों के परिणामों के प्रति यह संदेश: दान और भोजन की उपलब्धता के पीछे प्रभु की व्यवस्था एक गुप्त योजना का भाग है।

• दानिशों के उद्धार के साथ: भौतिक आशीष का उद्देश्य मानवीय दायित्वों को पूरा करना है।

व्यावहारिक चिंतन

हम कहें कि जहाँ भी जीवन के क्षणों में कमी महसूस हो, वहाँ यह विचार करें कि परमेश्वर की आज्ञा और उसकी Provision एक साथ हैं। अन्यायपूर्ण वातावरण में भी विश्वास रखने से आंतरिक शांति मिलती है और ईश्वर के न्याय की योजना पर भरोसा मजबूत होता है।

छोटा निष्कर्ष

अय्यूब 36:31 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर विश्व के प्रत्येक भाग में न्याय स्थापन करते हैं और सामान्य जरूरतों के लिए भी उपाय करते हैं। यह दृश्य हमारे जीवन में ईश्वर के कानून की पूर्णता और उसकी दयालुता का संतुलन प्रस्तुत करता है।

प्रासंगिक उद्धरण (संदर्भ संग्रहीत)

मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, और अ‍ैडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट(commentator) विचार इस विषय को मौलिक उत्तरदायित्व के साथ संजोते हैं: न्याय और दया, आदेश और आशीष एक साथ चलते हैं; प्रभु प्रत्येक देश के लिए न्याय करता है और दैनिक आशा प्रदान करता है।

उद्धरणों के छोटे संकेत

यदि उपलब्ध हो, नीचे दिए गए शॉर्ट उद्धरणों को आप उद्धृत कर सकते हैं: “उसने देश-देश के लोगों का न्याय इन्हीं से किया है”—यह विचार उनके विस्तृत टिप्पणी-समूह में प्रकटन पाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 36:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तो भी उसने अपने आप को बे-गवाह न छोड़ा; किन्तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्त ऋतु देकर तुम्हारे मन को भोजन और आनन्द से भरता रहा।” (भज. 147:8, यिर्म. 5:24)

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चाहे ताड़ना देने के लिये, चाहे अपनी पृथ्वी की भलाई के लिये या मनुष्यों पर करुणा करने के लिये वह उसे भेजे।

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