अय्यूब 36:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

चौकस रह, अनर्थ काम की ओर मत फिर, तूने तो दुःख से अधिक इसी को चुन लिया है।

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अय्यूब 36:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 36:21 का सरल अर्थ

इस पद में कहा गया है: चौकस रहो और किसी भी प्रकार के अन्धेरे, हताशा या दुःख के कारण अनर्थकारी कर्म की ओर मत मुड़ो; तुम्हें दुख के कारण भी कई बार उसी पथ को अपनाने का आग्रह मिलेगा, किन्तु ईश्वर चाहता है कि तुम सत्य और भलाई की राह पर चलो।

संदर्भभूमि

यह अध्याय समय-समय पर नीतिवचन की तरह अय्यूब के मित्रों की चर्चा का क्रम दिखाता है, जिसमें वे उसकी कठिनाईयों के पीछे वजहों को समझाने की कोशिश करते हैं। अध्याय 36 में इलिपाजन्यूदा (जेम) के भाव स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की सत्ता और न्याय कभी भी मानवीय दुःख के कारण भटकने के अधिकार नहीं देते; बल्कि वे उच्चतर योजना की सुरक्षा में रहते हैं। इस वाक्य की मार्मिकता यह है कि दुःख के दौरान भी हमें गलत रास्ते नहीं अपनाने चाहिए, बल्कि ईश्वर के विश्वासयोग्य मार्ग पर टिके रहना चाहिए।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • चौकस रहना: दोनों ओर से सावधानी और आत्म-परख के साथ चलना। हर विचार और निर्णय को ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप सत्यापित करना।
  • अनर्थ काम की ओर मत मोड़ना: विपरीत परिस्थितियाँ कभी-भी सत्य को छोड़ने या छल-प्रयोजन की ओर ले जा सकती हैं; परन्तु भलाई के मार्ग पर दृढ़ता जरूरी है।
  • दुःख के समय भी सही चुनाव: रोष या अकर्मण्यता से नहीं, बल्कि धैर्य, प्रार्थना और पवित्रता से काम लेना।

संक्षिप्त थीमैटिक सूची

  1. विश्वास के प्रति चौकस रहना
  2. अनर्थ से बचना
  3. दुःख में भी परमेश्वर की तैयारी पर भरोसा रखना

अन्य ग्रहणीय उपदेश (Cross-references)

1) परन्तु यूहन्ना 16:33 से प्रेरणा लेते हुए कि संकट के बीच भी शांति की राह में टिके रहना उचित है — यह स्मरण दिलाती है कि ईश्वर की सत्ता दुखों के बीच भी रहती है।

2) यिर्मयाह 17:7-8 का विचार: जो भरोसा ईश्वर पर रखता है, वह जल की गहराइयों में लगे हुए वृक्ष की तरह फल देता है — विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूत रहता है।

3) स्तोत्र 31:24 का निश्चय: परमेश्वर पर आशा रखने वालों के साहस को बढ़ाता है और धैर्य बनाए रखता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway

दुख की घड़ियों में भी पीछे हटकर नहीं, बल्कि हर निर्णय को परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुरूप कठोर परख से देखें। अय्यूब की तरह हमने भी अपने दिल में विनम्रता और सत्यनिष्ठा बनाए रखनी है, ताकि दुःख हमें नयी समझ और विश्वास की ओर ले जाए, न कि भटकाव की तरफ।

कथन-सार

इस वाक्य का संदेश है: दुख के समय भी आत्म-चेतना बनाए रखें; अनर्थकारी मार्ग चुनना नहीं, बल्कि भगवान के विरुद्ध नहीं झुकना। यह नैतिक निर्देश हमें जीवन की कठिनाइयों में भी सत्य और पवित्रता के साथ चलने का प्रोत्साहन देता है।

प्रमुख टिप्पणीकारों से संक्षेप: Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचार इस पाठ की धारणा के साथ सामंजस्य बिठाते हैं—परन्तु नीचे केवल आवश्यक संकेत दिए जा रहे हैं, पूर्ण उद्धरण मामूली रूप से यहाँ नहीं हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 36:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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