Old Testament
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अय्यूब 36:6 का संदर्भ और उसका अर्थ
यह पद दयालु परमेश्वर के चरित्र की उस दीप्ति को दर्शाता है जो असमानता और दमन के बीच न्याय को बनाए रखता है। पुराने धर्मग्रंथ में Job के संवाद के बीच भगवान के बारे में वेदना और युक्ति का मिश्रण आता है। यहाँ कहा गया है कि वह दुष्टों को जिलाए नहीं रखता और दीनों को उनका हक़ देता है। इसका आशय यह है कि परमेश्वर न्यायप्रिय हैं और समाज के कमजोर पक्ष के साथ संवेदनशील रहते हैं, भले ही हम इस लोक में तुरंत परिणाम न देखें।
मुख्य अर्थ
इस आयत में ईश्वर की सक्रिय सम्बलता और नीति स्पष्ट है: अन्याय के विरुद्ध वह चुप नहीं रहता, और दीन-जीवन जी रहे लोगों को ढाल बनकर उनका अधिकार लौटाता है। यह केवल दयालुता का बयां नहीं है, बल्कि एक न्यायपूर्ण व्यवस्था का संकेत है जिसमें दशा हर किसी के साथ उपयुक्त रूप में भुगताई जाती है।
मुख्य विषय (केन्द्रीय विचार)
संबंधित आयतें (पासेज)”
- दीनों की सहायता के बारे में अन्याय के विरुद्ध ईश्वर के प्रतिपादन के संदर्भ हेतु: परमेश्वर दीनों के रोष के बीच भी सक्रिय रहते हैं और उनका हक़ लौटाते हैं।
- न्याय का नियम उद्धार के साथ जुड़ा है; जब लोग सत्य और न्याय से चलते हैं, तब उनके लिए राहत मिलती है।
- दुष्टों की स्थिति का स्पष्टीकरण: परमेश्वर समय के साथ दुष्टों के बर्ताव का न्याय करता है और पृथ्वी पर शासन की व्यवस्था में संतुलन बनाता है।
व्यावहारिक चंदन
हम कैसे व्यवहार करें? समाज में कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील रुख बनाए रखें; अन्याय के विरुद्ध दया न छोड़ें, परन्तु परमेश्वर के समय पर भरोसा रखें। अपने प्रार्थना-जीवन में न्याय और दया के लिए माँग रखें, ताकि हमारे काम भी इस सच को प्रतिबिम्बित करें कि ईश्वर दीनों के पक्ष में हैं।
संक्षिप्त समापन
अय्यूब 36:6 एक ऐसी धुरी है जो यह स्मरण कराती है कि ईश्वर न केवल दयालु हैं, बल्कि वे दुष्टों के दमन को भी रोकते हैं और दीनों को उनका हक़ देते हैं। यह प्रश्न उठाता है कि हम अपने समय में कैसे न्याय और दया के बीच संतुलन बनाए रखें, जबकि ईश्वर के न्याय की पूर्णता के लिए भरोसा करें।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस
1) पादरी के तस्कर के संदर्भ में दीनों के उद्धार की आशा—क्योंकि न्यायविश्वासी ईश्वर उन्हें सुरक्षा देता है। 2) सामाजिक न्याय के लिए मानवकेंद्रित दया और कार्रवाई का संतुलन। 3) उद्धार के पाठ में दीनों को बचाने और दुष्टों के विरुद्ध ईश्वर की रक्षा का मिलान।
उद्धृत कथन: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि किसी जगह स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हो तो वही प्रयुक्त माना जाएगा; फिलहाल इस पाठ में उनके विशिष्ट उद्धरण सीधे नहीं दिए गए हैं।