Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



reader-friendly overview
अय्यूब 4:8 वह शास्त्रीकृत सत्ता का संकेत देता है: जो लोग पाप बोते हैं, वे अपने कर्मों के विपरीत दुःख का काटना पाते हैं। इस पाठ में ईश्वरीय निर्णय की स्पष्टता है कि जीवन के कर्म-परिणाम निर्धारित करते हैं और अन्याय भी अंततः कर्म के बराबर प्रतिफल देता है। लेखक अय्यूब के मित्रों के तर्क के संदर्भ में एक ठोस नैतिक कारण-भाव प्रस्तुत करता है: जो लोग बुराई उत्पन्न करते हैं, वे नुकसान उठाते हैं; इस विचार से त्रुटिहीन न्याय की झलक मिलती है कि परमेश्वर हर कर्म का न्याय करता है।
Verse context in the chapter
यह आयातन में एलिप्टिक मित्रों की बातों और अय्यूब की आस्थागत चोट के बीच है।4:8 कहता है कि वही कर्म जो लोग पाप बोते हैं, वे उसे काटते हैं, यानि उनका दुःख भी उनके कर्मों के परिणामस्वरूप आता है। यह संदेश अधिकतर यह बताता है कि जीवन के अनुभव—दुःख, पतन, और मान-हानि—कभी भी बिना कारण नहीं होते; बुरे कर्मों के लिए परमेश्वर न्याय करता है और आशर एवं धैर्य के साथ सत्य का मार्ग खोलता है।
Main spiritual lesson
Cross-references (brief explanations)
1) पवित्र शास्त्र में कर्म-फल का सिद्धांत कई जगह आता है (जैसे पाप के बाद दुःख, भलाई के प्रभाव)। यह समझाता है कि नियति एक धारदार नैतिक कानून के अनुसार चलती है।
2) एक स्थान जहाँ कर्म के प्रतिफल पर बल दिया गया है—यह बताता है कि धैर्य और ईमानदारी से जीवन जीने पर भी परमेश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
3) न्याय का ईश्वर हर समय न केवल बाह्य घटनाओं पर, बल्कि आंतरिक मनोभावों पर भी विचार करते हैं, ताकि व्यक्ति सच से परिचित रहे।
Commentary insights
हिनिर्व अनुवाद के अनुसार यह वक्तव्य बताता है कि जो लोग पाप करते हैं वे उसे काटते हैं। एडम क्लार्क कहते हैं कि क्रूरतापूर्ण कर्मों का परिणाम समय के साथ सामने आता है और ईश्वर की व्यवस्था में किसी दृश्य दुर्घटना से अधिक गहराई है। मैथ्यू हैन्री के शब्दों का सार यह है कि बुराई करने वालों के लिए दयालुता नहीं है, बल्कि उनके अपने कर्म उनके लिए दंड बनते हैं। एल्बर्ट बार्न्स का मानना है कि यह वाक्य संभवतः मित्रों की आलोचना का एक भाग है—उनके तात्कालिक तर्कों में भी एक नैतिक कानून है। इन तीनों टिप्पणियों में एक सामान्य बात है: कर्म के परिणाम निर्जीव नहीं होते, वे जीवित नैतिक कानून हैं जो परमेश्वर के न्याय के साथ जुड़े हैं।
Careful application
भारतीय पाठक के लिए यह सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयाँ आने पर दोषारोपण के बजाय आत्मनिरीक्षण और धैर्य आवश्यक है। यदि कोई पाप बोता है, तो उसका दुःख एक न्यायसंगत परिणाम है। परंतु हमारी दृष्टि यह भी रखनी चाहिए कि परमेश्वर की करुणा और पाप-न्याय दोनों एक साथ चलते हैं। उचित उपाय: सत्य-पथ पर चलना, ईश्वर के सामने विनम्रता से योग करना, और दूसरों के उद्धार हेतु प्रेमपूर्वक व्यवहार करना।
Summary
अय्यूब 4:8 एक नैतिक कानून की पुष्टि करता है कि कर्म के अनुसार परिणाम मिलते हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत दोषारोपण नहीं है, बल्कि ईश्वर के न्याय की पुष्टि है जो हर कर्म को देखता है। हैन्री, बार्न्स और क्लार्क के विचार मिलाकर इसे इस तरह समझाते हैं: जो लोग बुरे कर्म करते हैं, वे अपने ही दुःख के भागीदार बनते हैं; परन्तु परमेश्वर की करुणा भी सक्रिय रहती है ताकि सचाई और सुधार संभव हो।