अय्यूब 4:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वे तो परमेश्‍वर की श्‍वास से नाश होते, और उसके क्रोध के झोके से भस्म होते हैं। (2 थिस्सलु. 2:8, यशा. 30:33)

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अय्यूब 4:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 4:9 का immediate setting

यह पद अय्यूब की मित्रों की पहली दीवानी विवेचना से जुड़ा है, जहाँ एलिपाज की शिक्षाओं के context में शांति नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रभावशाली न्याय का डर जगता है। श्लोक का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर की श्वास से कुछ निर्मूल होते हैं और उसके क्रोध के झोंके से भस्म हो जाते हैं। यह विचार गहराई में दिखाता है कि जीवन-स्तर और अस्तित्त्व की स्थिरता परमेश्वर के स्तर पर निर्भर है, न कि मानवीय शक्ति या जातिगत स्थिति पर।

परोपकारी विवेक के रूप में पाठक के लिए अर्थ

इस आयत में दो दृश्य स्पष्ट होते हैं: एक, परमेश्वर की श्वास (हवा, प्राण) के स्पर्श से नाश; दो, उसके क्रोध के झोके से जलना। यह कल्पना न केवल प्रकृत शास्त्र के अनुसार बल्कि नैतिक चातुर्य के संकेत भी देता है: परमेश्वर का सन्निकट भय और उसकी सत्ता के सामने मनुष्य के कल्याण के लिए सावधानी अपेक्षित है।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की clarification

  • — जीवन के स्रोत का संकेत, उसी से सृष्टि चलती है; परमेश्वर की सक्ती से जीव नष्ट होना संभव है।
  • — एक निर्णायक, तीव्र क्रिया जो असत्य, अभिमान या पाप के प्रभाव को दूर कर देती है।

संबद्ध संदर्भ

यह विचार 2 थिस्सलु 2:8 और यशा 30:33 के साथ संगत दिखता है: प्रभु के आगमन और उसके निर्णय का चित्रण। साथ ही, अन्य प्रवचनों में परमेश्वर की पवित्र क्रोध और उद्धार की क्षमा का संतुलन भी दिखता है।

सार-संप्रेषण: आज के संदर्भ में क्या सिखाता है

1) परमेश्वर की सत्ता से कोई प्रतिभा सुरक्षा नहीं देती; जीवन वही स्थिर रहता है जो Creator के नियंत्रण में हो।

2) अनुभव में कठिनाई आने पर भी भय और स्वार्थ से ऊपर उठकर परमेश्वर की प्रत्यक्षता को मानना आवश्यक है।

3) निराशाजनक परिस्थिति में भी आस्था की परीक्षा अभी भी जारी रहती है—क्या मैं परमेश्वर के क्रोध और दया के बीच संतुलन पकड़ पा रहा हूँ?

मूल बातों का संयुक्त विवेचन

यह शास्त्र मानव की सीमाओं को उभारता है: शक्तिशाली भी क्षण भर में मिट सकता है यदि परमेश्वर उसकी दिशा बदल दे। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उद्धृत सारों के जोड़ से एक ही निष्कर्ष निकलता है: परमेश्वर की सत्ता के सामने मानवता की निर्भरता अनिवार्य है; भय और श्रद्धा के साथ जीवन जीना चाहिए।

सीधे उल्लेखित उद्धरण (संक्षेप में): Henry, Barnes, Clarke आदि के विचार—“परमेश्वर की श्वास से नाश; उसके क्रोध के झोंके से भस्म”—यह धारणा एक साथ दर्शाती है कि परमेश्वर की व्यक्ति-स्थित सत्ता के सामने भय, पवित्रता और धार्मिकता आवश्यक हैं।

छोटे cross-references के साथ संक्षिप्त सार

• 2 Thessalonians 2:8: प्रभु के प्रकाशन और शक्तिशाली प्रदर्शनों से विरोधी का अंत।

• Isaiah 30:33: गहरी क्रोध की विविधता और उसे दुष्टों के लिए एक स्थापित स्थान माना गया है।

• Job 1–2: पलों के भीतर स्थिति के परिवर्तन और ईश्वर के अधिकार का अनुभव।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 4:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 30:33 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 30:33 (HINIRV) »
बहुत काल से तोपेत तैयार किया गया है, वह राजा ही के लिये ठहराया गया है, वह लम्बा-चौड़ा और गहरा भी बनाया गया है, वहाँ की चिता में आग और बहुत सी लकड़ी हैं; यहोवा की साँस जलती हुई गन्धक की धारा के समान उसको सुलगाएगी।

अय्यूब 15:30 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 15:30 (HINIRV) »
वह अंधियारे से कभी न निकलेगा, और उसकी डालियाँ आग की लपट से झुलस जाएँगी, और परमेश्‍वर के मुँह की श्‍वास से वह उड़ जाएगा।

यशायाह 11:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 11:4 (HINIRV) »
परन्तु वह कंगालों का न्याय धर्म से, और पृथ्वी के नम्र लोगों का निर्णय खराई से करेगा; और वह पृथ्वी को अपने वचन के सोंटे से मारेगा, और अपने फूँक के झोंके से दुष्ट को मिटा डालेगा। (2 थिस्स. 2:8, प्रका. 19:15, इफि. नीति. 31:8-9)

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