Old Testament
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Reader-friendly overview
अय्यूब 15:30 का यह वचन उन धर्म-निष्ठ नेताओं के लिए है जो अभिमान में डूबे रहते हैं और परमेश्वर के भय को भूल जाते हैं। शास्त्रीय टिप्पणीकार बताते हैं कि इस आयत में दुष्ट की अन्तःस्थिति और परमेश्वर के न्याय का निश्चित प्रभाव सामने आता है: अंधकार से उसका निकलना नहीं, डालियों का जल जाना और परमेश्वर के मुँह की श्वास से उसका नाश। यह संदेश हर प्रकार के कुटिल प्रतिरोध के बावजूद सत्य के सामने टिके रहने की चेतावनी देता है।
व्याख्या: अध्याय संदर्भ में
पर्व-आयत 15 का पाठ अय्यूब के मित्रों की कटु आलोचना के क्रम में है। यहाँ यह दर्शाया गया है कि मुँहफट, अभिमानी व्यक्ति कितने भी प्रयास कर लें, परमेश्वर की पवित्रता और न्याय से बच नहीं सकते। अंधियारे से न निकलने, डालियाँ झुलस जाने, और श्वास से उड़ जाने जैसा दृश्य-रूपक तीखे अनुशासन का संकेत देता है। यह केवल दुष्ट की स्थिति का वर्णन नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर के सामने निर्दोषता नहीं, उसकी पवित्रता और न्याय है जो अंततः विजयी रहती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
कुरआनों-सम्पर्क और तुलनात्मक विचार
- यशाय 53:9 के संदर्भ में दुष्ट के निष्कासन और नरम-नर्मी के बजाय क्रोध और न्याय की विक्ट्री पर विचार होता है।
- नीदानी 1–2: परमेश्वर के बिंदु-निर्णय से मनुष्य के अभिमान का विनाश होता है, और वह दया के मार्ग पर लौटता है।
- भजन 1:5 में भी कहा गया है कि केवल वह लोग सुरक्षित रहते हैं जो परमेश्वर के नियमों पर चलते हैं; अन्यथा मार्ग शीघ्र नष्ट होता है।
कायदे-सम्बन्धी अनुप्रयोग
1) अपने जीवन में अभिमान से बचें: यह आयत याद दिलाती है कि गरिमामय जीवन वही है जिसमें हम परमेश्वर के नियम के अनुरूप कदम बढ़ाते हैं।
2) विवेकपूर्ण व्यवहार बनाए रखें: कठिन परिस्थितियों में भी संयम और निष्ठा बनाए रखना चाहिए, ताकि हमारे “डालियाँ” न जलें और हमारे संकल्प टिके रहें।
3) परमेश्वर के भय को बनाए रखें: परमेश्वर के मार्गों की ओर लौटना, उसकी श्वास-निर्देशों को स्वीकारना और समय-समय पर आत्मसमर्पण आवश्यक है।
आख़िरी विचार: एक संगत समरी
यद्यपि अय्यूब 15 का यह भाग मित्रों की आलोचना की बढ़त में है, परन्तु संदेश स्पष्ट है: परमेश्वर के सामने अभिमान टिक नहीं सकता; दुष्टता की डालियाँ अंततः झुलसती हैं और वह विनाश की दिशा में बढ़ता है। यह आयत धर्मी जीवन की सुरक्षा और न्याय की गारंटी के विषय में एक चटक स्मरण कराती है—जो लोग परमेश्वर के हुक्म-निर्णय के अनुरूप चलते हैं, वे अंधकार से निकलते हैं और अपने जीवन में स्थिर रहते हैं।
संक्षेप संकेत
- अभिमान बनाम निर्भीक सत्य
- दुष्टता के परिणाम स्वरूप आत्म-उद्धारण
- परमेश्वर के भय में पालन और विश्वास
Cross-references: यशाय 57:11-12; भजन 37:37-38; मत्ती 7:16-20. समझाइश: वे संकेत देते हैं कि सत्य के मार्ग पर चलना, दुष्टता के विरुद्ध स्थिर रहना और परमेश्वर के न्याय से डरना कैसे एक भरोसेमंद जीवन बनाते हैं।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण केवल संदर्भ हेतु शामिल हैं; पूर्ण वाक्य नहीं हैं.
याद रखने योग्य: यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों की सम्यक-ज्ञान-आधार से प्रेरित होकर Hindi में सहज रूप में प्रस्तुत है।